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यहां शिक्षा की डगर बड़ी कठिन; हर दिन पिता की पीठ पर बैठकर नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे

एक वर्ष पहले
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  • 40 बच्चों को पुरा नदी पारकर स्कूल पहुंचाते हैं उनके अभिभावक
  • ग्रामीणों में रोष, बोले- कब आएगा विकास पता नहीं?

इटावा. यहां नगला मेहरा गांव में शिक्षा की डगर बड़ी कठिन है। गांव में स्कूल न होने के कारण 40 बच्चों को हर दिन नदी पार करना पड़ता है। अभिभावक अपने-अपने बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार करते हैं। छुट्टी होने पर अभिभावक फिर यही प्रक्रिया अपनाते हैं। बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई बाधित भी होती है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।
 

1) कई बार उठाई आवाज पर नहीं बना स्कूल

ताखा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुरखा के ग्राम नगला मेहरा की आबादी करीब 800 की है। लेकिन यहां स्कूल नहीं है। पुरा नदी उस पार दीग गांव में आंगनबाड़ी व परिषदीय विद्यालय हैं। नगला मेहरा गांव के करीब 40 बच्चों को पुरा नदी को पार कर स्कूल जाना व आना पड़ता है। 

ग्रामीणों ने बताया कि, दीग गांव में जाने के लिए जस्सी एक्सप्रेसवे बना है, लेकिन हमारे गांव का संपर्क मार्ग टूट गया है। अगर हमारे बच्चे स्कूल जाने के लिए सड़क मार्ग से जाएं तकरीबन 7 किलोमीटर का चक्कर बैठता है और अगर नदी पार करके जाए तो 2 किलोमीटर ही बैठता है। लेकिन इस रास्ते बच्चों का अकेली जाना आना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए हम सभी अपने बच्चों को लेकर सुबह कंधे पर बैठाकर नदी पार कर आते हैं और छुट्टी होने पर वैसे ही बच्चों को घर लेकर आते हैं।

ग्रामीण सुधीर, प्रदीप कुमार, संतोष कुमार, शिवप्रताप सिंह, महेश बाबू आदि ग्रामीणों ने कहा कि हम लोग कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या के बारे में बता चुके हैं, लेकिन अभी तक हमारी समस्या का समाधान नहीं किया गया। न ही गांव में स्कूल बना। गांव के बच्चे खतरों का सामना कर स्कूल में पढ़ने जाते हैं। हमारे बच्चों के भविष्य के गांव में स्कूल बनना चाहिए।

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