उन्नाव मामला / 37 दिन बाद भी केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं, पीड़ित की बहन ने कहा- हमें सीएम से मिलने नहीं दिया जा रहा

5 दिसंबर को रेलवे स्टेशन जाते वक्त पीड़ित को इसी जगह जिंदा जला दिया गया था। -फाइल 5 दिसंबर को रेलवे स्टेशन जाते वक्त पीड़ित को इसी जगह जिंदा जला दिया गया था। -फाइल
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5 दिसंबर को रेलवे स्टेशन जाते वक्त पीड़ित को इसी जगह जिंदा जला दिया गया था। -फाइल5 दिसंबर को रेलवे स्टेशन जाते वक्त पीड़ित को इसी जगह जिंदा जला दिया गया था। -फाइल

  • 5 दिसंबर 2019 को उन्नाव जिले के बिहार इलाके में दुष्कर्म के आरोपियों ने पीड़ित को जिंदा जलाया था
  • पीड़ित 43 घंटे मौत से लड़ी, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अंतिम सांस ली
  • सरकार ने केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने और नौकरी, मकान, आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था
  • बहन ने कहा- कई बार डीएम से मिल चुके, कोई कुछ नहीं बता रहा, विरोधियों से धमकियां मिल रहीं

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2020, 08:14 AM IST

उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में जिंदा जलाई गई गैंगरेप पीड़ित की मौत को 37 दिन बीत चुके हैं। परिवार सरकार जिला प्रशासन के एक्शन से संतुष्ट नहीं है। पीड़ित की बहन ने कहा- हमें मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया जा रहा। जब भी लखनऊ जाने की कोशिश करते हैं, जिला प्रशासन रोक लेता है। अभी तक दीदी का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं भेजा गया है, जबकि मुख्यमंत्री ने खुद इसका आश्वासन दिया था। मैं चाहती हूं कि दीदी के हत्यारों को फांसी मिले। दीदी को जिंदा जलाने वाले धमकी देते हैं। कहते हैं कि बयान दिया तो तुम्हारी ऐसी हालत करेंगे कि किसी लायक नहीं रहोगी। आज मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ जाऊंगी, अगर किसी ने रोकने की कोशिश की तो आत्मदाह कर लूंगी। 

योगी से मिलने नहीं दे रहे

पीड़ित की बहन ने कहा- 5 दिसंबर को मेरी बहन को जिंदा जलाया गया था। सीएम से मिलने के लिए तीन-चार बार लखनऊ जाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने रोक दिया। एक बार तो घर से निकलने ही नहीं दिया गया।   


प्रकरण को दबाने की कोशिश
पीड़ित की बहन ने कहा- मैंने और मेरे भाई ने करीब 6 बार डीएम से मुलाकात की, लेकिन सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। बस यही कहा जाता है कि मामले में एक्शन हो रहा है। लेकिन क्या हो रहा है, कुछ पता नहीं। कुछ लोग इस मामले को दबाना चाहते हैं। 

मांगें पूरी नहीं हुई, रोज मिल रहीं धमकियां
पीड़ित की बहन ने यह भी कहा- सरकार ने नौकरी, मकान और आर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक सिर्फ रुपए पिताजी के खाते में आए हैं। सरकार ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की सहायता प्रदान की थी। मकान और नौकरी की मांग अधूरी है। रोज धमकियां मिल रही हैं। तीन दिन पहले राशन लेने दुकान पर गई थी, तभी बाजपेई परिवार का एक लड़का और कुछ औरतें पीछे लगी थीं। उन लोगों ने कहा- तुमको मारेंगे तो बयान भी नहीं दे पाओगी। हर समय सुरक्षा वाले साथ नहीं होते। धमकियां ग्रामीणों के सामने दी गईं। लोग डरे सहमे हैं। इसलिए कोई खुलकर हमारा समर्थन भी नहीं करता। 


क्या था मामला, अब तक क्या हुआ?
उन्नाव के बिहार इलाके में 5 दिसंबर को गैंगरेप केस की पैरवी करने के लिए पीड़ित रायबरेली कोर्ट जा रही थी। तड़के गांव के बाहर शिवम और शुभम ने तीन अन्य के साथ मिलकर पीड़ित को जला दिया था। करीब 43 घंटे के बाद पीड़ित ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। मरने से पहले पीड़ित के बयान के आधार पर गांव के प्रधानपति हरिशंकर त्रिवेदी, उसके बेटे शुभम, गांव के शिवम और उमेश बाजपेई समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले की जांच एसआईटी कर रही है। घटना के 20 दिन बाद 26 दिसंबर को आरोप पत्र तैयार किया गया। एक जनवरी को कोर्ट खुलने पर पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था। तीन जनवरी को आरोपियों की पहली पेशी थी। 

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