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कुशीनगर हादसा: बच्चे को सीने से लगाकर बोली मां- शुक्र है ये नहीं गया, वरना पूरा घर उजड़ जाता

कुशीनगर में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार को हुए स्कूल बस हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 27, 2018, 03:22 PM IST

  • कुशीनगर हादसा: बच्चे को सीने से लगाकर बोली मां- शुक्र है ये नहीं गया, वरना पूरा घर उजड़ जाता
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    राज्य सरकार ने मारे गए बच्चों के परिवार वालों को 2-2 लाख रुपए देने का एलान किया।
    • कुशीनगर में गुरुवार को एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हादसा हुआ।
    • ट्रेन और स्कूली वैन की भिड़ंत में 13 बच्चों की मौत हो गई।
    • वैन में बच्चों समेत 25 लोग सवार थे। 15 से ज्यादा बच्चे जख्मी हुए हैं।

    कुशीनगर. यहां मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार को हुए स्कूल बस हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई। इनमें से 3 बच्चे मिश्रौली गांव के अमरजीत कुशवाहा के थे। उन्हें जैसे ही इसकी खबर लगी वे बेहोश हो गए। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि ट्रेन देखने के बाद वैन के ड्राइवर ने स्पीड बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन ट्रैक में फंस गई। इसी दौरान ट्रेन आ गई।

    मैनुद्दीन ने 2 बच्चे खोए, एक होमवर्क नहीं होने से स्कूल नहीं गया था

    - मैहिहरवा गांव के मैनुद्दीन ने अपने दो बच्चे खो दिए। उनकी पत्नी ने बताया कि 8 साल का मेराज और 7 साल की मुस्कान की मौत हो गई। छोटे बेटे को सीने से चिपकाते हुए कहा कि इसका होमवर्क पूरा नहीं था। इसलिए यह नहीं गया। नहीं तो हमारा पूरा परिवार ही उजड़ जाता था। मैनुद्दीन फिलहाल खाड़ी देश में हैं।

    अमरजीत ने तीनों बच्चे खोए...

    -अमरजीत कुशवाहा के दो बेटे संतोष (10) और रवि (8) थे, जबकि सबसे छोटी बेटी का नाम रागिनी (7) था। गांववालों का कहना है कि तीनों बच्चे पढ़ने में काफी होशियार थे। बच्चों की मां किरण मिश्रौली गांव की प्रधान हैं। किरण ने रोते हुए कहा कि अब तो मुझे बच्चा भी नहीं हो सकता। अब जिंदगी भर हमें बेऔलाद रहना पड़ेगा। हमारे जीने का मकसद ही खत्म हो गया।

    मन्नत से पैदा हुआ था इकलौता बेटा, वो भी चला गया

    - वहीं, बतरौली के अंबर सिंह ने भी इस हादसे में अपना एक बच्चा हरिओम खो दिया। उनके पड़ोसी दीपक ने बताया कि बड़ी मन्नतों के बाद हरिओम पैदा हुआ था। अंबर बार-बार यही कह रहे हैं कि बेटा बाप को कंधा देता है लेकिन मुझे अपने 8 साल के बेटे को कंधा देना पड़ेगा।

    - इसी गांव के हसन की भी दो बच्चियों की मौत हो गई। हसन ने कहा " मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई। आज भोर तक जिन बच्चों के शोर से घर का चप्पा चप्पा गूंजा करता था, अब वहां वीरानी छाई रहेगी। मेरी जिंदगी का सहारा मुझसे बिछड़ गया। अब जीने की कोई तमन्ना नहीं है।''

    - हसन ने बताया कि बड़ा बेटा 13 साल का है। वह भी इसी स्कूल में पढ़ता है। उसकी जान सिर्फ इसलिए बच गयी, क्योंकि वह साइकिल से स्कूल गया था।

    पूरी खबर यहां पढ़ें:

    कुशीनगर: मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन-स्कूल वैन की भिड़ंत में बच्चों की मौत, प्रिंसिपल हिरासत में

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    इस हादसे में हसन की दो बच्चियों की मौत हो गई। पत्नी ने कहा- हमने सबकुछ खो दिया।
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    मिश्रौली गांव की मुखिया किरण ने अपने तीनों बच्चों को खो दिया।
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Web Title: Emotional Stories From Kushinagar Accident 13 Childrens Died
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