Hindi News »Uttar Pradesh »Kushi Nagar» कुशीनगर वैन हादसा, Kushinagar Van Accident Claims 13 Children Death

कुशीनगर वैन हादसा: रेलवे ऐसे डिसाइड करता है कौन-सा मानवरहित क्रॉसिंग करना है बंद

गुरुवार सुबह कुशीनगर में एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुए हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 28, 2018, 12:15 AM IST

कुशीनगर वैन हादसा: रेलवे ऐसे डिसाइड करता है कौन-सा मानवरहित क्रॉसिंग करना है बंद

कुशीनगर (यूपी).कुशीनगर हादसे को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे बोर्ड को 11 जोन की सभी मानवरहित क्रॉसिंग्स इसी साल सितंबर महीने तक बंद करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, इंडियन रेलवे के ब्रॉड गेज पर 3,479 मानवरहित क्रॉसिंग हैं। बता दें कि गुरुवार को कुशीनगर में एक मानवरहित क्रॉसिंग पर दर्दनाक हादसा हो गया। स्कूल वैन-ट्रेन की भिड़ंत में 13 बच्चों की जान चली गई। मारे गए सभी बच्चे 8-10 साल की उम्र के थे। आइए जानते हैं रेलवे कैसे डिसाइड करता है मैन लेवल क्रॉसिंग?

- बता दें कि रेलवे हर लेवल की क्रॉसिंग को ट्रेन व्हीकल यूनिट्स (TVU) के जरिए फिगर करता है।

- इसका कैलकुलेशन 24 घंटे में ट्रेन मूवमेंट और ट्रैफिक डेन्सिटी के आधार पर होता है।
- मान लीजिए, किसी रूट पर 10 ट्रेनें चल रही हैं और 24 घंटे के अंदर वहां से 200 वाहनों का आना-जाना है, तो यहां 2000 टीवीयू माना जाएगा।
- रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी का कहना है कि कुशीनगर (जहां दर्दनाक हादसे में 13 बच्चों की जान चली गई) में टीवीयू 2000 से भी कम है, जो बेहद कम है।

मानवरहित क्रॉसिंग पर तैनाती को लेकर क्या कहता है रेलवे का मैनुअल?
रेलवे ने मानवरहित लेवल क्रॉसिंग को मैनेज करने के लिए उसे 5 कैटेगरी में बांटा है।
1. जहां टीवीयू 10,000 से ज्यादा है।
2. जहां टीवीयू 6,000 से ज्यादा और विजिबिलिटी कम है।
3. जहां टीवीयू 6,000 से कम और विजिबिलिटी कम है। लेकिन बस-गाड़ियां नियमित रूप से चलती हैं।
4. जहां टीवीयू 6,000 से कम हो और विजिबिलिटी कम है। लेकिन गाड़ियां नहीं चलती हैं।
5. जहां विजिबिलिटी ठीकठाक है, लेकिन ट्रैफिक डेन्सिटी 6,000 टीवीयू से ज्यादा है।

2014 में सेफ्टी के लिए लाई 'गेट मित्र' योजना
- 2014 में रेलवे मानवरहित क्रॉसिंग पर 'गेट मित्रों' की तैनाती की योजना लाई।
- रेलवे के प्रेस रिलीज के मुताबिक, सितंबर 2016 तक देश भर में पैसेंजर्स की सेफ्टी के लिए 4,326 गेट मित्रों की तैनाती की गई थी।
- हालांकि, गेट मित्रों की शिकायत है कि उन्हें 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। जिसके एवज में केवल 3,000-4,000 रुपए का ही भुगतान किया जाता है।

क्या है गेट मित्रों का काम?
- ज्यादातर हादसे वाले मानवरहित क्रॉसिंग्स कैसे हैंडल किए जाएं, इसके लिए गेट मित्रों को ट्रेनिंग दी जाती है।
- गेट मित्रों का काम सड़क पर आवाजाही करने वाले लोगों को अलर्ट करने से लेकर उन्हें पटरी के दूसरी ओर सेफ पहुंचाना होता है।
- क्रॉसिंग पर जब ट्रेन के आने का वक्त होता है, तब गेट मित्र का काम स्पॉट से कुछ यार्ड की दूरी पर ही सड़क मार्ग से आ रहे गाड़ियों व लोगों को रोकना होता है।
- गेट मित्रों को एक रिफ्लेक्टर जैकेट, फ्लैग और आइडेंटिटी कार्ड दिया जाता है। इसके अलावा क्रॉसिंग्स के पास उनके बैठने का भी इंतजाम किया जाता है।

5 साल में 50% कम हुए हादसे
- पिछले साल रेलवे कन्वेंशन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पांच साल में देश में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों में 50% की कमी आई है।
- रिपोर्ट में बताया गया कि मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर 2012-13 में 53 हादसे हुए। 123 लोगों की मौत हुई।
- वहीं, 2014-15 में ऐसे हादसों की संख्या 50 थी। 20-15-16 में मानवरहित क्रॉसिंग पर कुल 29 हादसे हुए।
- 2016-17 में हादसों की संख्या घटकर 20 हो गई और इनमें 40 लोगों की मौत हुई।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Kushi Nagar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×