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खुदाई में मिले 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता के अवशेष, रथ और योध्दाओं के शव के साथ मिली तलवारें..

मिले 5000 साल पुरानी सभ्यता के अवशेष, अब होगी सभ्यता की खोज और खुलेंग कई रहस्य।

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 11:07 AM IST
योद्धाओं के शव औऱ तांबे की तलवार योद्धाओं के शव औऱ तांबे की तलवार

सिनौली/ बागपत (यूपी). 2005 में बागपत के सिनौली में जहां शवाधान केंद्र से एकसाथ 116 शव मिले थे, उसी के पास उत्खनन साइट से 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता के कुछ अवशेष मिले हैं। इनमें 8X2.5 फीट के सैन्य ताबूत, अश्वचालित साढ़े तीन फीट के रथ और 2.5 फीट की तलवार है। सभी में तांबे का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ है। ताबूत पर 8 योद्धाओं की उकेरी गईं आकृतियां तांबे से सुसज्जित हैं। चारों पाए भी तांबे से गढ़े हैं। रथ पर तांबें की परत चढ़ी है। तलवार भी तांबे से बनी है।

- आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की 10 सदस्यीय टीम इन सबको (दिल्ली) ले गई, जहां म्यूजियम में इनका अध्ययन होगा।

- पुरातत्व सर्वेक्षण टीम इसे 200 वर्षों के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रही है।

- यह भी है कि ये सभी साक्ष्य जमीन के महज ढाई फीट नीचे से ही मिलने शुरू हो गए। इसीलिए इन साक्ष्यों के अध्ययन के बाद जल्द क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्खनन की संभावना जताई जा रही है। यहां से फिलहाल लाशें मिली हैं, लेकिन प्राचीनतम सभ्य जीवन के खोज में ये मील का पत्थर साबित होंगी।

- एक संयोग यह भी है कि 1900 ईसा पूर्व हड़प्पा सभ्यता का पतन बताया जाता है। यही वह काल भी है, जब सिनौली में योद्धाओं को दफनाया गया।

- 15 फरवरी 2018 को यहां पर एएसआई की महानिदेशक डॉ. ऊषा शर्मा के निर्देश पर पुरातत्वविद डॉ. संजय मंजुल और डॉ. अरविन मंजुल के निर्देशन में यह खुदाई हुई।

किसान की सूचना पर 120 मीटर जगह में चला ट्रायल ट्रेंच

सिनौली में 2005 में भी खुदाई के दौरान सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित 116 शव मिले थे। फरवरी 2018 में यहां का किसान अपनी जमीन पर खुदाई कर रहा था तो उसे कुछ साक्ष्य मिले। जिसकी सूचना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मिली तो उसके बाद रिसर्च करने की योजना बनी। पहले भी यहां कृषि कार्य के दौरान तांबे के टुकड़े मिलते रहे हैं।

ये मुख्य अवशेष व प्रमाण मिले: रथ और ताबूत के साथ दफन दो योद्धा, उनकी तलवारें, ढाल, मुकुट, सोने और बहुमूल्य पत्थरों के मनके, कवच आदि मिले हैं। पास में ही पांच अन्य लोगों के भी शव मिले हैं। एक श्वान का भी अवशेष प्राप्त हुआ है। इनका सिर-पैर पूर्व-पश्चिम की ओर है। दाल व अन्य अनाज के दाने, चूड़ियां, कंघा, दर्पण, कटोरे, मृद भांड और कई रोजमर्रा की चीजें मिली हैं।

योद्धाओं के शव: कुल 7 शवों में से 2 ताबूत में बंद हैं। ताबूत के सिर के पास मिट्‌टी का बर्तन मिला है, जिसमें उड़द के साथ अन्य अनाजों के दाने मिले हैं। पैर के पास भी मिट्‌टी का बर्तन मिला है। जिस सुव्यवस्थित तरीके से शवों का अंतिम संस्कार किया गया है।

दो रथ : रथ को लेकर पुरातत्व विज्ञानियों में कौतूहल है, क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप में पहली बार किसी योद्धा के साथ रथ प्राप्त हुए हैं। इससे पहले मेसोपोटामिया, जॉर्जिया और ग्रीक में इसी बनावट के रथ मिल चुके हैं। शवों के करीब 5 फीट नीचे रेत और भिक्षु कंकड़ प्राप्त हुए हैं। इससे लगता है कि अभी 7 किलोमीटर दूर बह रही यमुना पहले यहीं से बहती होगी। नदी का किनारा होने के कारण ही शवाधान केंद्र के रूप में इस स्थान का चयन किया गया हो। रथ की बनावट वैसी ही है, जैसे महाभारत काल के समय में बताई गई है। इस रथ के पहिए की बनावट ठोस है। इसमें तीलियां नहीं हैं। रथों के बारे में वर्णन ऋग्वेद में मिलता है, जिससे सिद्ध होता है कि दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में भारतीय उपमहाद्वीप में रथ थे।

तांबा: यहां प्राप्त तलवार ताबें की है। ताबूत और रथ में भी तांबे का प्रयोग किया गया है। ताबूत पर तांबे से पशुपतिनाथ और पीपल के पत्ते की आकृति उकेरी गई है। इतिहासकारों के मुताबिक पत्थर के बाद तांबे को ही मनुष्य ने हथियार बनाया।

खेती और खुदाई से बर्बाद हो रहे अवशेष

महज दो से ढाई फीट नीचे ही अवशेष दबे पड़े हैं। हाल ही में एक किसान ने जेसीबी से 10 बीघे खेत से मिट्‌टी निकाली थी, जिसमें बड़े पैमाने पर पुरातात्विक महत्व के प्रमाणों के मिटने की आशंका जताई गई थी। इतिहासकारों ने 100 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की मांग की थी, ताकि उस पर विश्व स्तरीय रिसर्च हो सके।

खुदाई में मिला सामान। खुदाई में मिला सामान।
खेती और खुदाई से बर्बाद हो रहे अवशेष खेती और खुदाई से बर्बाद हो रहे अवशेष
शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और सिनौली में एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे संजय मंजुल शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और सिनौली में एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे संजय मंजुल

महाभारत और हरियाणा से गहरा नाता

 

शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन के प्रस्ताव पर एएसआई ने खुदाई की है। राय का कहना है कि बागपत के सिनौली का महाभारत और हरियाणा से गहरा संबंध है। महाभारत में वर्णित स्वर्णप्रस्थ (सोनीपत), प्राणप्रस्थ (पानीपत), व्याग्रप्रस्थ (बागपत) और वर्णाप्रस्थ (बरनावा) कुरु महाजनपद का हिस्सा थे। इन्हीं चार गांवों को श्रीकृष्ण ने कौरवों से संधि के लिए मांगा था। महाभारत में बड़ी संख्या में योद्धा मारे गए। शायद ये योद्धा वही हों। क्योंकि कार्बन डेटिंग में सिनौली के साक्ष्य 5000 वर्ष पुराने पाए गए हैं। साथ ही तांबे के उपयोग का जिक्र महाभारत काल के ग्रंथों में आता है। यहां मिले साक्ष्य भी ताम्रकालीन युग की पुष्टि करते हैं। 

 

अागे क्या: विश्वस्तरीय लैब भेजे जाएंगे अवशेष

 

सिनौली में एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे संजय मंजुल का कहना है कि यहां मिले रथ, ताबूत, हथियार और अन्य साक्ष्य काफी पुराने हैं। इसे कोई भी महाभारत से ही जोड़कर देखेगा। लालकिला में विशेषज्ञ रासायनों से इन्हें साफ करेंगे। तब डीएनए जांच के लिए शवों के अंश काे मानव विज्ञान संस्थान, हैदराबाद और डेक्कन यूनिवर्सिटी, पुणे भेजा जाएगा। कार्बन डेटिंग के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, आईआईटी गांधीनंगर, बीरबल साहनी इस्टीट्यूट, लखनऊ भेजा जाएगा। ताबूत, अाभूषण,गोल्ड और तांबे की जांच विश्व स्तरीय विशेषज्ञ दिल्ली में ही करेंगे। 

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योद्धाओं के शव औऱ तांबे की तलवारयोद्धाओं के शव औऱ तांबे की तलवार
खुदाई में मिला सामान।खुदाई में मिला सामान।
खेती और खुदाई से बर्बाद हो रहे अवशेषखेती और खुदाई से बर्बाद हो रहे अवशेष
शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और सिनौली में एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे संजय मंजुलशहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और सिनौली में एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे संजय मंजुल
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