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सपा में शामिल हुए आरके चौधरी, अमित शाह ने BJP की टिकट पर चुनाव लड़ने का दिया था ऑफर

2017 के विधानसभा चुनाव में हुई थी हार।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 12:37 PM IST
आरके चौधरी ने सपा में अपनी पार्टी का विलय कर दिया। आरके चौधरी ने सपा में अपनी पार्टी का विलय कर दिया।

लखनऊ. बसपा सरकार में मंत्री रहे आरके चौधरी ने शुक्रवार को अपनी पार्टी (राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी) का सपा में विलय कर दिया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में वो सपा में शामिल हुए। यूपी विधानसभा चुनाव -2017 के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरके चौधरी को भाजपा के टिकट चुनाव लड़ने के लिए कहा था। अब वो नेता सपा में शामिल हो गए हैं। इससे पहले आरके चौधरी बसपा सरकार में मंत्री थे। 2017 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी पार्टी (राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी) का भाजपा के साथ गठबंधन किया था लेकिन चुनाव हार गए थे। आगे पढ़‍िए आरके चौधरी ने क्या कहा...

-आरके चौधरी ने कहा, ''समाज को नई दिशा देने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया और बाबा साहेब अम्बेडकर का मैं अनुयायी हूं। मैंने 1982 से ही समाज से उत्थान का काम किया।''

-''हमारी ताकत को देखकर भाजपा वालों का दिमाग खराब हो गया था। तब पहली बार मुलायम स‍िंह और कांशी राम म‍िले थे। एक बार वही संगठन बनाने की जरूरत फिर है। हम सब एक हो, तभी ऐसी ताकतों को रोक सकते हैं।''

-''हिन्दू हम भी हैं, सब हिन्दू हैं। न जाने कितने हिन्दू बेरोजगार हैं? कौन इनके लिए काम करेगा, क्या सिर्फ हिन्दू होने से रोजगार मिलेगा।''

-''मैं अपनी गलती मानता हूं। मुझे अखिलेश यादव ने 2012 में ज्वॉइन करने को कहा था, लेकिन अपनी गलती पर माफी मांगता हूं। अब से मेरा हर साथी सपा का जमीनी सिपाही है।''

अमित शाह ने किया था फोन
-2017 विधानसभा चुनावों के दौरान पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने भाजपा का सर्मथन किया था। जिसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने खुद उनसे फोन कर भाजपा के सिम्बल पर चुनाव लड़ने को कहा था। लेकिन आरके चैधरी ने अपने चुनाव निशान पर भाजपा के समर्थित प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े थे।
-आरके चैधरी के लिए खुद गृहमंत्री राजानाथ सिंह ने उनके विधानसभा क्षेत्र मोहनलाल गंज में एक रैली और एक जनसभा को सम्बोधित किया था। इसके अलावा पीएम मोदी की रैली के दौरान भी आरके चौधरी को विशेष स्थान देते हुए उनसे मिलवाया गया था।
-लखनऊ में आरके चौधरी की सीट मोहनलाल गंज के अलावा बाकी भाजपा ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। मोहनलाल गंज से सपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

मायावती से बढ़ा था मनमुटाव

-पूर्व सीएम मायावती से आरके चौधरी का विवाद- 2012 में बढ़ गया था उस वक्त तक आरके चौधरी बसपा से मंत्री थे। लेकिन विवाद के बाद मायावती ने उनसे किनारा कर लिया था।
-2012 में मोहनलालगंज सीट से आरके चौधरी ने जीत दर्ज की थी।

कौन हैं आरके चौधरी

-आरके चौधरी पासी समाज के बड़े नेता माने जाते हैं। वह दलित समाज को जागरूक करने के अभियान के लिए भी याद किए जाते रहे हैं। बीएसपी और सपा की पहली साझा सरकार में वह मंत्री थे।
-बीएसपी में मायावती के बढ़ते प्रभाव के कारण उन्होंने बीएसपी का दामन छोड़ दिया था।

राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी भी बनाई

-बीएसपी से अलग होकर आरके चौधरी ने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी बनाई। इसके बैनर तले उन्होंने मोहनलालगंज से दो बार विधायक बने। बीएसपी में आने के बाद उन्होंने पार्टी का विलय कर दिया था।
-2014 के लोकसभा चुनाव में वह बीजेपी कैंडिडेट कौशल किशोर से हार गए थे।