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10 की उम्र में हुई अनाथ, ये काम कर भाई-बहन को पाल रही छात्रा

सोनी स्कूल की छुट्टी के बाद लोहे के औजार बनाने का काम करती है।

Dainik Bhaskar

Feb 06, 2018, 07:30 PM IST
सोनी ने अपने पिता के पुश्तैनी काम को सम्भाल लिया है। सोनी ने अपने पिता के पुश्तैनी काम को सम्भाल लिया है।

गोंडा. मां-बाप की मौत के बाद उसके तीन बच्चे अनाथ हुए तो हर कोई यही कह रहा था कि आखिर अब इन बच्चों की परवरिश कौन करेगा। फिलहाल, अनाथ हुए बच्चों में सबसे बड़ी 13 साल की सोनी अपने दो छोटे भाई-बहनों को पाल रही है। सोनी ने अपने पिता के पुश्तैनी काम को सम्भाल लिया है। लोहे के औजार बनाती है सोनी...

बता दें कि सोनी के पिता लोहार थे और लोहे के औजार बनाते थे। अब पिता की मौत के बाद सोनी लोहे के औजार बनाने का काम करती है। DainikBhaskar.com ने सोनी के चाचा किशनलाल से बात की।

2014 में सोनी हो गई अनाथ

- किशनलाल ने बताया कि "उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज इलाके में रहने वाले बृजेश विश्वकर्मा लोहार का काम किया करते थे। बृजेश की पत्नी की किसी बीमारी के चलते काफी साल पहले मौत हो चुकी थी। बृजेश भी कैंसर की चपेट में आ गए, जिससे 2014 में उनकी मौत हो गई।"

पिता की मौत के समय 10 साल की थी सोनी

- उन्होंने बताया- "पिता की मौत के समय सोनी सिर्फ 10 साल की थी। उसके बाद सोनी के ऊपर उसके छोटे भाई अरुण और छोटी बेटी शारदा की जिम्मेदारी आ गई। लेकिन, इन सबके बाद भी सोनी ने अपने हौंसलों को जिन्दा रखा। किसी पर आश्रित होने के बजाय उसने पिता का पुश्तैनी काम संभाल लिया। अब लोहे के औजार बना कर सोनी परिवार का खर्च निकाल रही है।"

आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे अपने छोटे भाई-बहन को पाल रही है सोनी...

10 year old girl soni working as Blacksmith in gonda

स्कूल से लौटने के बाद संभालती है दुकान

 

किशनलाल ने बताया- "सोनी 7वी क्लास में पढ़ती है। वो दुकान से घर का खर्च निकालने के साथ ही अपना और अपने भाई-बहन की पढ़ाई का खर्च भी निकाल रही है। उसे स्कूल ड्रेस में लोहे की भट्टी के सामने बैठकर औजार बनाते देख हर किसी कोई आश्चर्यचकित हो जाता है, लेकिन उसको बस एक धुन लगी रहती है कि जल्द-जल्द दुकान का काम खत्म कर वो घर का काम और फिर पढ़ाई करे। ये सोनी की रोज की दिनचर्या है।"

 

किशनलाल बताते हैं कि- "सोनी अपने भाई-बहन के लिए मां और बाप दोनों का फर्ज अदा कर रही है। सोनी बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज रही है। वो अपने क्लास में अव्वल रहती है।"

10 year old girl soni working as Blacksmith in gonda

दादा-दादी की भी कर रही है सेवा

 

- सोनी अपने दादा-दादी की भी सेवा कर रही है। 90 साल के सोनी के दादा राम देव ने बताया कि "अब मेरे अन्दर कुछ करने की क्षमता नहीं रह गई है। सोनी ही हमारे खाने-पीने का प्रबंध करती है।"

 

- सोनी की दादी का कहना है कि "हमें पहले काफी चिंता होती थी कि इन तीन बच्चों की परवरिश कैसे होगी, लेकिन सोनी ने सब कुछ ऐसे संभाला लिया है, जिससे हमारी चिंता कम हो गई है।"

10 year old girl soni working as Blacksmith in gonda

विश्वकर्मा समाज के लोगों ने की मदद
 
- किशनलाल ने बताया कि सोनी की "मदद के लिए अभी तक केवल विश्वकर्मा समाज के लोग ही आए हैं। लेकिन, अब भी सोनी के सामने पूरी जिन्दगी पड़ी है। उस पर अपने साथ ही दो छोटे-भाई बहनों की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में वो इस पारंपरिक काम से कब तक इस गृहस्थी की गाड़ी खींचेगी यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।"

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सोनी ने अपने पिता के पुश्तैनी काम को सम्भाल लिया है।सोनी ने अपने पिता के पुश्तैनी काम को सम्भाल लिया है।
10 year old girl soni working as Blacksmith in gonda
10 year old girl soni working as Blacksmith in gonda
10 year old girl soni working as Blacksmith in gonda
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