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9 साल की उम्र में इस शख्स ने मारा था थप्पड़, 22 साल बाद मिली ऐसी सजा

एक महीने के लिए हिमांशु को पुवायां के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 2 तक सफाई कर रहा है।

Dainik Bhaskar

Dec 27, 2017, 03:52 PM IST
शख्स ने बताया- FIR होने के कई साल बाद उसके घर नोटिस पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया है। शख्स ने बताया- FIR होने के कई साल बाद उसके घर नोटिस पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया है।

शाहजहांपुर(यूपी). यहां एक शख्स को 22 साल साल बाद थप्पड़ मारने की सजा सुनाई गई। सजा के तौर पर शख्स को एक महीने तक सरकारी हॉस्पिटल में सफाई करनी है। दरअसल, 9 साल की उम्र में उसने गांव के एक बच्चे को थप्पड़ मारा था। युवक का कहना, ''उसे याद नहीं कि किस बात पर विवाद हुआ था, लेकिन अब लग रहा है- उस दिन बहुत बड़ी गलती हो गई थी।'' ये है मामला...

- मामला पुवायां थाना क्षेत्र का है। 1995 में 9 साल की उम्र में हिमांशु का विवाद गांव के बच्चे से हुआ था।

- इस दौरान हिमांशु ने बच्चे को थप्पड़ जड़ दिया था। फिर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। मामला थाने पहुंचा, तब उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।

- FIR होने के कई साल बाद उसके घर नोटिस पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया है। मामला किशोर न्याय बोर्ड में पहुंचा, मामले की सुनवाई 22 साल चली।

- जुवेनाइल बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट के सामने हिमांशु ने थप्पड़ मारने का जुर्म कबूला। दोषी पाए जाने के बाद 23 दिसंबर 2017 को योग्यतानुसार स्वास्थ्य सेवाएं देने की सजा सुनाई।

- जिला प्रोबेशन अधिकारी वीके सिंह ने कहा, ''इसके तहत एक महीने तक हिमांशु को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में सफाई करनी है।''

किस बात पर थप्पड़ मारा था, याद नहीं

- हिमांशु ने बताया, " उसे याद नहीं कि लड़के को किस बात पर मारा था, लेकिन अब लग रहा है कि उस दिन बहुत बड़ी गलती हो गई थी। अब सीएचसी में स्वीपर के तौर पर काम करने की सजा मिली है।''

-"मैंने ड्राइविंग सीखी, जॉब जॉइन की, शादी की और मेरे दो बच्चे हैं। सब कुछ ठीक चल रहा था। 2011 को मुझे कोर्ट से समन मिला, जिसमें कहा गया कि मेरे खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है।''

- ''200-250 रुपए की प्रति दिन कमाई के साथ मुझे पेशी पर जाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वकील की फीस भरने के लिए 4000 रुपए का कर्ज भी लेना पड़ा।''

- सीएचसी अधीक्षक डॉ. डी आर मनु ने कहा, ''हिमांशु शुक्ला अशिक्षित हैं, इसलिए हमने उन्हें अस्पताल की साफ-सफाई का काम दिया।''

शख्स का कहना है- मुझे याद भी नहीं है कि लड़के को थप्पड़ क्यों मारा था, लेकिन अब लग रहा है गलती हो गई थी। शख्स का कहना है- मुझे याद भी नहीं है कि लड़के को थप्पड़ क्यों मारा था, लेकिन अब लग रहा है गलती हो गई थी।
शख्स का कहना है- वकील की फीस भरने के लिए 4 हजार रुपए का कर्ज भी लिया। शख्स का कहना है- वकील की फीस भरने के लिए 4 हजार रुपए का कर्ज भी लिया।
जुवेनाइल बोर्ड के सामने हिमांशु ने जुर्म कबूल कर लिया। उसके बाद उसे ये सजा मिली। जुवेनाइल बोर्ड के सामने हिमांशु ने जुर्म कबूल कर लिया। उसके बाद उसे ये सजा मिली।
घटना के वक्त हिमांशु की उम्र 9 साल थी। घटना के वक्त हिमांशु की उम्र 9 साल थी।
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शख्स ने बताया- FIR होने के कई साल बाद उसके घर नोटिस पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया है।शख्स ने बताया- FIR होने के कई साल बाद उसके घर नोटिस पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके खिलाफ केस दर्ज हो गया है।
शख्स का कहना है- मुझे याद भी नहीं है कि लड़के को थप्पड़ क्यों मारा था, लेकिन अब लग रहा है गलती हो गई थी।शख्स का कहना है- मुझे याद भी नहीं है कि लड़के को थप्पड़ क्यों मारा था, लेकिन अब लग रहा है गलती हो गई थी।
शख्स का कहना है- वकील की फीस भरने के लिए 4 हजार रुपए का कर्ज भी लिया।शख्स का कहना है- वकील की फीस भरने के लिए 4 हजार रुपए का कर्ज भी लिया।
जुवेनाइल बोर्ड के सामने हिमांशु ने जुर्म कबूल कर लिया। उसके बाद उसे ये सजा मिली।जुवेनाइल बोर्ड के सामने हिमांशु ने जुर्म कबूल कर लिया। उसके बाद उसे ये सजा मिली।
घटना के वक्त हिमांशु की उम्र 9 साल थी।घटना के वक्त हिमांशु की उम्र 9 साल थी।
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