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लखनऊ डकैती कांड: ट्रैवलर गैंग पर शक, सर्विलांस के भरोसे खुलासे के लिए जेल पहुंची पुलिस

काकोरी के बनिया खेड़ा और कटौली में डकैती की वारदात के 24 घंटे बाद अब राजनीतिक रूप ले लिया है।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 11:20 PM IST
akhilesh yadav meets victim family of kakori dacoity case in lucknow

लखनऊ. काकोरी के बनिया खेड़ा और कटौली में डकैती की वारदात के 24 घंटे बाद अब राजनीतिक रूप ले लिया है। वहीं, आधुनिक होने का दावा करने वाली यूपी पुलिस सिर्फ सर्विलांस के भरोसे डकैती की वारदात के खुलासे में लगी है। यहीं नहीं, बीते 19 जनवरी को चिनहट में डकैती के मामलों में पुलिस बदमाशों की तलाश में लखनऊ जेल में बदमाशों से पूछताछ किया। फिलहाल लखनऊ पुलिस बीते 72 घंटे में हुए डकैती की 7 वारदातों में अब तक खाली हाथ हैं। दूसरी ओर, सोमवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अख‍िलेश यादव ने पीड़‍ित पर‍िवार से मुलाकात की। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...

-लखनऊ में बीते 5 दिनों में तीन इलाको में 7 अलग-अलग घरों में डकैती की वारदात के बाद पुलिसिंग पर सवाल उठने लगे है। राजधानी पुलिस को आशंका है कि यह डकैती की वारदात ट्रैवलर गैंग ने किया है।
-राजधानी में तैनात 4 ट्रेनी आईपीएस, सर्विलांस की टीम और क्राइम ब्रांच की लंबी फौज भी अभी तक खाली हाथ है।
-सोमवार को सीओ गोमतीनगर के साथ चार पुलिस की टीम ने लखनऊ जेल में बंद बदमाशों से पूछताछ किया है।

राजनीतिक मैदान बना काकोरी क्षेत्र
- प्रदेश की विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने इस घटना को सरकार की नाकामी से जोड़ते सरकार के काम करने के तरीके पर प्रश्न उठाए हैं।
- घटना के बाद कई राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेताओं का पीड़ित परिवारों से मिलने का सिलसिला जारी है।
- सोमवार को समाज वादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पीड़ित परिवारों से मिलने बनिया खेड़ा व कटौली गांव पहुंचे।
-उन्होंने कटौली गांव में डकैतों की गोली से मरे प्रधान पुत्र अभिषेक उर्फ कोमल के परिवारजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

शहीदों वाली काकोरी डकैतों वाली हो गई
-पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पत्रकारों से कहा कि जो काकोरी शहीदों के नाम से जानी जाती थी। वह आज चंबल की तरह डकैती के रूप में जानी जा रही है, जो दुखद है।
- इस घटना से लोगों में भय व्याप्त है। सरकार को पीड़ितों की सुरक्षा व डकैतों की गोलियों से घायल हुए लोगों का इलाज सरकार कराए और जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई भी सरकार करे।
-उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आए दिन व्यापारी लुटे जा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही लखनऊ के चिनहट में बड़ी वारदात हुई थी उसके दोषियों को भी पुलिस अभी नहीं पकड़ सकी है।

बहादुर युवा की मौत हो गई और पुलिस बहाने बना रही
- उन्होंने कहा कि पुलिस बहानेबाजी कर रही है। दोनों गांवों में 12 से 14 डकैतों द्वारा बड़े पैमाने पर फायरिंग कर लोगों को गोली मारी गई और लूटा गया है। जिसमें एक बहादुर नौजवान की मौत भी हो गई है और पुलिस ने सिर्फ चार बदमाशों दारा घटना को अंजाम देने का मुकदमा लिखा है इसकी जांच होनी चाहिए।
- 100 नंबर की पुलिस को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उसने भी सही काम नहीं किया है। एक 19 वर्ष का नौजवान डकैतों से लड़ने की हिम्मत जुटा कर उनसे भीड़ गया। लेकिन पास के गांव में मौजूद पुलिस के बड़े अधिकारी बदमाशों से लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। ना ही उन्हें घेर कर पकड़ पाए, अगर पुलिस चाहती तो स्थानीय सड़कों सहित आसपास जिलों की सड़कों पर निगरानी बढ़ाकर बदमाशों को पकड़ सकते थे। लेकिन पुलिस के बड़े अधिकारी भी डकैतों को नहीं पर पकड़ सके यह बड़ा प्रश्न है।
-अखिलेश यादव के साथ सपा के वरिष्ठ नेता अहमद हसन,सुनील सिंह साजन, राजेंद्र चौधरी सहित स्थानी नेता शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार यादव मौजूद रहे।

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