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नए साल में जनता को योगी सरकार का तोहफा, सेल्फी लेने पर लग सकता है यूपीकोका : अखिलेश

Dainik Bhaskar

Dec 21, 2017, 09:23 AM IST

बुधवार को विधानसभा में यूपीकोका बिल पेश किया गया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसका विरोध करते हुए कहा- ये दलितों-अल्पसंख्यकों को खत्म करने वाला कानून है। (फाइल) बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसका विरोध करते हुए कहा- ये दलितों-अल्पसंख्यकों को खत्म करने वाला कानून है। (फाइल)

लखनऊ. योगी सरकार ने बुधवार को विधानसभा में 'यूपीकोका' बिल पेश किया। बिल पेश होने के साथ ही सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। मकोका की तर्ज पर माफिया और संगठित अपराध से निपटने के लिए पेस किए गए बिल पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "नए साल में जनता को उत्तर प्रदेश सरकार का तोहफा, सेल्फी लेने पर लग सकता है यूपीकोका!"

-अखिलेश ने आगे लिखा- "यूपीकोका नहीं ये धोखा है। फर्नीचर साफ करने के पाउडर को PETN विस्फोटक बताने वाले जनता को बहकाने में माहिर हैं। 9 महीनों में बीजेपी ने जनसुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए न सिर्फ समाजवादी 'यूपी100' और महिला सुरक्षा की '1090हेल्पलाइन' को बल्कि समाजवादी विकास पथ पर बढ़ते प्रदेश को रोका है।"
-वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसका विरोध करते हुए कहा- "ये दलितों-अल्पसंख्यकों को खत्म करने वाला कानून है।"


मकोका की तर्ज पर काम करेगा यूपीकोका

-यूपीकोका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की तर्ज पर काम करेगा।
-सीएम योगी ने सत्ता संभालने के बाद संगठित अपराध, माफियाओं पर शिकंजा कसने का आदेश दिया था। इसके बाद तत्कालीन गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने मुंबई, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में संगठित अपराध के लिए बनाए गए कानून के बारे में जानकारी जुटाई।

सख्त है मकोका कानून

- ‌मकोका लगने के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है। मकोका के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का वक्त मिल जाता है, जबकि आईपीसी के प्रावधानों के तहत यह समय सीमा सिर्फ 60 से 90 दिन की है। मकोका के तहत आरोपी की पुलिस रिमांड 30 दिन तक हो सकती है, जबकि आईपीसी के तहत यह अधिकतम 15 दिन की होती है।

ऐसे लगता है किसी पर मकोका


-किसी के खिलाफ मकोका लगाने से पहले पुलिस को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से मंजूरी लेनी होती है। इसमें किसी आरोपी के खिलाफ तभी मुकदमा दर्ज होगा, जब 10 साल के दौरान वह कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो।
-संगठित अपराध में कम से कम दो लोग शामिल होने चाहिए। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एफआईआर के बाद चार्जशीट दाखिल की गई हो। अगर पुलिस 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।

यूपीकोका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की तर्ज पर काम करेगा। यूपीकोका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की तर्ज पर काम करेगा।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसका विरोध करते हुए कहा- ये दलितों-अल्पसंख्यकों को खत्म करने वाला कानून है। (फाइल)बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसका विरोध करते हुए कहा- ये दलितों-अल्पसंख्यकों को खत्म करने वाला कानून है। (फाइल)
यूपीकोका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की तर्ज पर काम करेगा।यूपीकोका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की तर्ज पर काम करेगा।
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