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इलाहाबाद HC ने पूछा- किसकी इजाजत बज रहे हैं मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे में लाउडस्पीकर

कोर्ट ने पूछा है कि इन स्थलों पर लाउडस्पीकर लगाने के लिए रिटेन में किस अफसर की परमिशन ली गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 20, 2017, 07:54 PM IST

इलाहाबाद HC ने पूछा- किसकी इजाजत बज रहे हैं मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे में लाउडस्पीकर

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी के मंदिरों,मस्जिदों, चर्च, गुरुद्वारों सरकारी भवन में बिना सरकारी अनुमति के लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर सख्त एतराज जाहिर किया है। कोर्ट ने पूछा कि इन स्थलों पर लाउडस्पीकर लगाने के लिए रिटेन में किस अफसर से परमिशन ली गई है। अगर परमिशन नहीं ली गई, तब ऐसे लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।कोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह) एवं UP प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन से एक फरवरी को व्यक्तिगत तौर पर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता ने की मांग...

- जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन की बेंच ने एक स्थानीय वकील मोतीलाल यादव की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।

- याचिकाकर्ता ने कहा, "साल 2000 में केंद्र सरकार के द्वारा बनाए गए न्वॉयज पॉल्यूशन रेग्युलेशन एण्ड कंट्रोल रूल्स (2000) के प्रावधानों का पालन न होने का आरोप लगाते हुए मांग की थी। इन प्रावधानों को लागू कराए। इसमें किसी भी तरह की कोताही न की जाये।"


- "रूल्स 2000 के पैरा-5 में प्रावधान है कि बिना जिम्मेदार अधिकारी की अनुमति ते लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रयोग नहीं किया जाएगा। यह भी प्रावधान है कि ऑडोटोरियम ,कांफ्रेंस रूम, कम्यूनिटी हाल जैसे बंद स्थानों को छोड़कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकरों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।"


-"राज्य सरकार को यह छूट है कि वह एक कैंलेडर ईयर में अधिकतम 15 दिनों के लिए सांस्कृतिक या धार्मिक मौके पर रात 10 बजे से 12 बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण कम करने की शर्तो के साथ लाउडस्पीकर बजाने की छूट दे सकती है। कोर्ट ने इन मामलों पर विचार करने के बाद पाया कि अदालतेां ने इस मामले पर बार बार आदेश जारी किये है, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के ऐसे ही मामलों को लेकर अक्सर याचिकाएं दाखिल होती है।"

-कोर्ट ने कहा, "जब 2000 में ध्वनि प्रदूषण को रेग्यूलेट करने के लिए नियम बना दिये गये हैं तो फिर अफसर उनका कड़ाई से पालन क्यों नही करते।"

-ध्वनि प्रदूषण से स्वतंत्रता एवं शान्तिपूर्ण नींद को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मूलभूत अधिकार हेाने की बात हो दोहराते हुए कोर्ट ने कहा कि बार-बार इस विषय पर याचिकाएं दाखिल होने से एक बात तय है कि या तो संबधित अफसरों के पास 2000 रूल्स के उक्त प्रावधानों को लागू की इच्छाशक्ति नहीं है या उनका उत्तरदायित्व तय नही हैं। दोंनेा ही हालात गंभीर है कि अदालत को दखल देना पड़ रहा है।


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Web Title: highkort ne puchhaa- kiski ijaajt se bj rahe hain mandir, msjid aur gaurudvaare mein laaudspikar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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