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AMU में राष्ट्रपति के दौरे से छात्र नाराज, कहा- 2010 में दिए बयान के लिए मांगे माफी या दीक्षांत समारोह में न आएं

राष्ट्रपति 7 मार्च को विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में शिरकत करने वाले हैं।

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 01:46 PM IST
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दीक्षांत समारोह में शिरकत करने के लिए अलीगढ़ आ रहे हैं। फाइल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दीक्षांत समारोह में शिरकत करने के लिए अलीगढ़ आ रहे हैं। फाइल

अलीगढ़. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को आमंत्रित करने का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। राष्ट्रपति 7 मार्च को विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में शिरकत करने वाले हैं। बुधवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के उपाध्यक्ष सजाद सुभान ने कहा कि या तो राष्ट्रपति महोदय 2010 में अपने दिए गए एक बयान के लिए माफी मांगें और या तो वो विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में शिरकत न करें। बता दें कि 2010 में राष्ट्रपति ने कहा था कि 'इस्लाम और ईसाईयत' देश के लिए बाहरी हैं, ये बात उन्होंने रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कही थी।


रंगनाथ मिश्रा कमीशन का मामला

- उपाध्यक्ष सजाद सुभान ने कहा कि, रंगनाथ मिश्रा कमीशन ने सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए 15 फीसदी आरक्षण (10 फीसदी मुस्लिमों के लिए व 5 फीसदी अन्य अल्पसंख्यकों के लिए) की सिफारिश की थी।
- इस पर टिप्पणी करते हुए कोविंद ने कहा था कि ये संभव नहीं है क्योंकि मुस्लिम व ईसाइयों को अनुसूचित जाति में शामिल करना गैर-संवैधानिक होगा।
- कोविंद उस समय बीजेपी के प्रवक्ता थे, जब कोविंद से पूछा गया कि फिर सिखों को उसी वर्ग में कैसे आरक्षण दिया जाता है। तो उन्होंने कहा कि 'इस्लाम व ईसाईयत देश के लिए बाहरी हैं'। कोविंद के दौरे का विरोध करते हुए सजाद सुभान ने कहा कि या तो वो 2010 में दिए गए इस बयान के लिए अपनी गलती मानें या तो दीक्षांत समारोह में शामिल न हों।
- उन्होंने ये भी कहा कि अगर कुछ गलत होता है तो इसके लिए राष्ट्रपति और कुलपति खुद इसके लिए जिम्मेदार होंगे क्योंकि छात्रों में उनके बयान के कारण गुस्सा है।
- छात्र नेता ने कहा कि या तो वो स्वीकार करें कि सभी धर्म और हिंदू, मुस्लिम,सिख व ईसाई भारत के हैं या तो वो कैंपस में न आएं। अगर बीजेपी सरकार व राष्ट्रपति कोविंद शांति बनाए रखना चाहते हैं तो उन्हें अपने बयान को वापस लेना चाहिए। छात्र नेता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति कोविंद के आने से संस्थान को कोई लाभ नहीं होगा। कुलपति ने उन्हें अपने व्यक्तिगत कारणों के चलते आमंत्रित किया है।
- वो संदेश देना चाहते हैं कि एएमयू ने बीजेपी सरकार व उसकी विचारधारा को स्वीकार कर लिया है।
- उन्होंने कहा कि स्थानीय एमपी, एमएलए व आरएसएस के कार्यकर्ताओं को भी कैंपस के अंदर आने की अनुमति नहीं दी जायेगी और अगर उनको आमंत्रित किया जाता है तो छात्र संघ दीक्षांत समारोह का बहिष्कार करेगा और कुलपति का भी विरोध करेगा। क्योंकि कुलपति अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए संस्थान का भगवाकरण करने में लगे हुए हैं।

क्या है विवाद

- एएमयू छात्रसंघ के सचिव ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिख कर कहा है कि आगामी 7 मार्च को होने जा रहे यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में किसी भी संघी मानसिकता के लोगों को निमंत्रण न दिया जाए। आपको बता दे कि इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को न्योता दिया गया है।
- छात्रसंघ के सचिव मो. फहद ने कहा कि हम राष्ट्रपति का विरोध नहीं बल्कि संघी मानसिकता का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2010 में रामनाथ कोविंद ने अपने एक बयान में कहा था कि मुसलमान और ईसाई देश के लिए एलियन हैं। इस बयान से हमें अभी तक कष्ट है।
-छात्रसंघ के कैबिनेट मेंबर जैद शेरवानी ने कहा कि अगर 7 मार्च को राष्ट्रपति आते हैं तो हम उन्हें काले झंडे दिखा कर विरोध दर्ज करायेंगे।

क्या कहना है छात्रसंघ का
-एएमयू छात्रसंघ के पूर्व सचिव नदीम अंसारी का कहना है कि राष्ट्रपति की हम इज्जत करते हैं, लेकिन इस वक्त राष्ट्रपति का चेहरा संघी चेहरा है, किसी भी कीमत पर संघ के लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
- वहीं, मुस्लिम यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद आमिर रशीद ने एएमयू वीसी को पत्र लिखकर कहा है कि राष्ट्रपति के दौरे का विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ विश्यविद्यालय प्रशासन कार्रवाई करे नहीं तो 11 हजार राष्ट्रवादी मुस्लिम युवा भगवा ध्वज लेकर महामहिम राष्ट्रपति की आगवानी के लिए एएमयू कूच करेंगे।

32 साल बाद कोई राष्ट्रपति आ रहे हैं एएमयू
-अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 32 साल बाद कोई राष्ट्रपति आ रहा है।
-इससे पहले 1986 में ज्ञानी जैल सिंह और उनसे भी पहले 1976 में फखरुद्दीन अली अहमद यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे।

पहले भी हो चुका है विवाद
-अक्टूबर 2017 में सर सैयद की 200वीं जयंती के मौके पर यूपी सरकार में मंत्री संदीप सिंह को यूनिवर्सिटी में आमंत्रित किया गया था। तब भी छात्र संगठन ने प्रदर्शन किया था।
-छात्र संगठन के नेताओं का कहना था कि हमें अंधेरे में रख कर बीजेपी नेता को बुलाया गया। इसके लिए वीसी सार्वजनिक माफ़ी मांगे। छात्रसंघ का कहना था कि संदीप सिंह कल्याण सिंह के पोते हैं और वह बाबरी मस्जिद काण्ड के आरोपी हैं।

क्या कहना है यूनिवर्सिटी का
-एएमयू पीआरओ साफे किदवई का कहना है कि एएमयू में कोई भी किसी का विरोध नहीं करेगा, क्योंकि एएमयू के इतिहास में 32 वर्ष बाद कोई राष्ट्रपति मुख्य अतिथि बनकर आ रहे हैं। राष्ट्रपति का यहां इस्तकबाल किया जायेगा।

फाइल । फाइल ।