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कार में खींच बदमाशों ने मारा था चाकू, 1 घंटे तक ऐसे लड़ी थी बच्ची

पीएम मोदी ने बच्ची को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 12:09 AM IST

लखनऊ. 26 जनवरी को देश अपना 69वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। हर बार की तरह इस बार भी अदम्य साहस का परिचय देने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। इस बार देश भर से 18 बच्चों को पीएम नरेंद्र मोदी बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। बदमाशों से छुड़ाए थे छक्के...

इस खास मौके पर dainikbhaskar.com आपको लखनऊ की एक ऐसी मर्दानी के बारे में बताने जा रहा है, जिसने अपहरण की कोशिश कर रहे बदमाशों से लड़ते हुए उनके छक्के छुड़ा दिए थे। चाकू लगने के बाद भी बच्ची एक घंटे तक बदमाशों से लड़ती रही। आखिरकार बदमाशों को भागना ही पड़ा। वहीं, इस बच्ची को पिछले साल 23 जनवरी को पीएम मोदी ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित भी किया था।

स्कूल जा रही थी बच्ची

- 18 साल की अंशिका पाण्डेय ने खास बातचीत में बताया, "14 सितंबर 2015 को मैं 14 साल आठ महीने की थी। मैं उस दिन 11वीं का एग्जाम देने के लिए मॉर्निंग में घर से साइकिल चलाकर सेंट एंटोनी स्कूल जा रही थी।"

'युवक ने जोर से आवाज दी'

- "मैं उस दौरान साइकिल चलाना सीख रही थी। मैं जब राम-राम बैंक चौराहे से आगे बढ़ी। तभी सड़क पर खड़ी एसयूवी कार में बैठे एक युवक ने मुझे जोर से आवाज दी।"

आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे लहूलुहान बच्ची ने बदमाशों के छक्के छुड़ाए और उनके चंगुल से बच निकली...

'पता पूछने लगा शख्स'

- "मैं जब वहां गई तो उसने योगिता मोंटेसरी स्कूल का एड्रेस पूछा। मैंने जवाब देना शुरू ही किया था कि उसने इशारा करके पीछे वाली सीट पर बैठे शख्स को पता बताने के लिए कहा।"

 

'गाड़ी के अंदर खींचने लगा बदमाश'

- "जब मैं उसके पास गई तो उसने मुझे गाड़ी के अंदर खींचना शुरू कर दिया। इसके बाद मैंने दरवाजे पर अपना पैर लगा दिया और खुद को बचाने लगी।"

 

'चाकू से किया हमला'

- "वो लोग मुझे अंदर खींचने में कामयाब नहीं हो पाए तो मेरी आंखों में एक लिक्विड डालने को कोशिश की। जब इसमें भी वो सफल नहीं हो सके तो चाकू से मेरे चेहरे पर हमला कर दिया।"

'1 घंटे तक बदमाशों से लड़ती रही'

- "चाकू लगने से मैं काफी घायल हो गई। खून भी निकल रहा था। फिर उन लोगों ने मेरे बाल पकड़ कर गाड़ी के अंदर खींच लिया। इसके बाद मैं उनसे 1 घंटे तक लड़ती रही।"

 

'मेरी फ्रेंड मुझे ढूंढने आई'

- अंशिका ने बताया कि "मैं हमेशा अपनी फ्रेंड गरिमा के साथ ही स्कूल जाती थी। हम दोनों दुर्गा मंदिर के पास मिलते थे। लेकिन, घटना वाले दिन जब मैं तय समय पर दुर्गा मंदिर नहीं पहुंची तो गरिमा मुझे ढूंढने आ गई।"

'फ्रेंड ने मचाया शोर'

- "जब घटनास्थल पर गरिमा ने मुझे देखा तो उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। ये देख किडनैपर्स मुझे सड़क पर ही फेंककर भाग गए। इस तरह से मैं बच गई।"

 

PM मोदी ने किया था सम्मानित

- इसके बाद 23 जनवरी 2017 को पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में अंशिका को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा यूपी के एक्स सीएम अखिलेश यादव ने 8 मार्च 2016 को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से नवाजा था।

 

'बचपन से मिली हिम्मत'

- अंशिका ने बताया "मेरे पिता शशिकांत पाण्डेय सोशल वर्कर, मां लली पाण्डेय बीडीसी मेंबर और चाचा पुलिस में हैं। घर का माहौल ऐसा था कि मुझे बचपन से ही हिम्मत मिली थी।"

 

'डॉक्टर बनना चाहती है अंशिका'

- अंशिका बताती हैं कि वो 12वीं के बाद मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती हैं और इसके बाद आर्मी में डॉक्टर बनकर सेना के जवानों का इलाज करना चाहती हैं।