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22 दिसंबर को यूपी के 5 लाख राजकीय कर्मचारी उतरेंगे सड़कों पर, ये है मांगे

कर्मचारी रोज की तरह ही उस दिन भी अपना काम टाइम पर खत्म करने के बाद रैली में शामिल होंगे।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 03:38 PM IST
ड्यूटी खत्म होने के बाद 2:30 बजे से अपने–अपने जिलों में सड़कों पर उतरकर अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग करेंगे। ड्यूटी खत्म होने के बाद 2:30 बजे से अपने–अपने जिलों में सड़कों पर उतरकर अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग करेंगे।

लखनऊ. राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर प्रदेश भर में 22 दिसम्बर को विभिन्न संवर्गों के राजकीय कर्मचारियों की तरह से एक बाइक रैली का आयोजन किया गया है। इस रैली में परिवहन निगम, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य राजकीय संवर्गों के करीब 5 लाख से ज्यादा राजकीय कर्मचारी शामिल होंगे। ड्यूटी खत्म होने के बाद 2:30 बजे से अपने–अपने जिलों में सड़कों पर उतरकर अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग करेंगे। ये है पूरा मामला...

- राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के उपाध्यक्ष सुनील यादव के मुताबिक़, शासन स्तर पर विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगति का मामला काफी टाइम से लम्बित पड़ा हुआ है।
- इसके लिए कई बार शासन स्तर पर वार्ता भी हुई, लेकिन राज्य कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया गया। इससे कमर्चारियों में खासा रोष है। कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध सांकेतिक रूप से दर्ज कराने का डिसीजन लिया है।
- इसी कड़ी में लखनऊ में 2:30 बजे सभी राजकीय संवर्गों के कर्मचारी ड्यूटी खत्म होने के बाद बाइक लेकर हजरतगंज स्थित वन विभाग के ऑफिस के पास एकत्र होंगे और वहां से बाइक रैली की शुरुआत होगी। जो विधान सभा होते हुए बलरामपुर हॉस्पिटल पर आकर खत्म होगी।
- कर्मचारी रोज की तरह ही उस दिन भी अपना काम टाइम पर खत्म करने के बाद रैली में शामिल होंगे। काम काज को प्रभावित नहीं किया जाएगा।


ये है कर्मचारियों की मांगे
- वेतन विसंगति को दूर किया जाए।
- केंद्र के बराबर भत्ता दिया जाए।
- 50 वर्ष की सेवा पर जबरन सेवानिवृति पर रोक लगाए जाए।
- संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
- आउटसोर्सिंग पर रोक लगाई जाए।
- पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए।

कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध सांकेतिक रूप से दर्ज कराने का डिसीजन लिया है। कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध सांकेतिक रूप से दर्ज कराने का डिसीजन लिया है।