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इस टेक्नोलॉजी से पता चलेगा बच्चों का फ्यूचर, ब्रेन की ऐसे होगी मैपिंग

Dainikbhaskar.com से इस टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता डॉक्टर आलोक मिश्रा ने पूरी डिटेल बताई।

दिनेश मिश्रा | Last Modified - Jan 05, 2018, 10:45 PM IST

    • VIDEO: ऐसे काम करेगी 4D ब्रेन मैपिंग टेक्नोलॉजी।

      लखनऊ.हर मां-बाप की इच्छा होती है कि मेरा बच्चा आईएएस, इंजीनियर, डॉक्टर बनें। लेकिन उसकी कैपेसिटी को बिना समझे पैरेंट्स अपनी ख्वाहिशें पूरी कराने में लगा देते हैं। इसके चलते बच्चे कई बार गलत डिसीजन भी ले लेते हैं। कभी डिप्रेशन में भी चले जाते हैं। पैरेंट्स कि यह चिंताएं अब '4D ब्रेन मैपिंग' से दूर हो जाएगी। एम्स दिल्ली से शोध करने वाले और बीबीआरएफआई के अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा ने Dainikbhaskar.comसे बात की और टेक्नोलॉजी के बारे में बताया। बच्चों का फ्यूचर करेगा सिक्योर 4डी ब्रेन मैपिंग...

      - डॉक्टर आलोक मिश्रा ने बताया, ''2007 एम्स में पढ़ाई के बाद मैं यूके चला गया। वहीं पर इसपर और बेहतर तरीके की रिसर्च और डेवलप करने की टेक्निक जानीं।''
      - ''इस टेक्नोलॉजी की मदद से जान सकते है कि बच्चे का किस फील्ड में बेटर फ्यूचर होगा। साथ ही साइंटिस्ट, इंजीनियर, डॉक्टर या पॉलिटिकल में सक्सेस मिलेगी या नहीं।''
      - ''इसके अलावा इस टेक्नाॅलजी से बच्चों के मन में क्या चल रहा है, वो किस तरह की बातें सोचता है, इसकी पूरी डिटेल मैपिंग के जरिए पहले से पता चल जाएगी।''


      क्या है 4डी ब्रेन मैपिंग टेक्नाॅलजी?

      - डॉक्टर ने बताया, ''इंसान के दिमाग में 2 पार्ट होते हैं। लेफ्ट और राइट। लेफ्ट पार्ट अगर ज्यादा तेज एक्टिव है तो निश्चित तौर पर बच्चा इंजीनियर, मैथमेटिकल के लिए बेस्ट होगा।''
      - ''इसी तरह एक पार्ट एक्टिव होगा तो दूसरा शांत रहेगा। बहुत कम केस ऐसे होते हैं, जिनमें राइट और लेफ्ट या बराबर एक्टिव हों।''
      - ''हम बच्चे का डीएनए लेकर उसे अपने रिसर्च टूल में डालते हैं, फिर बच्चे की ब्रेन मैपिंग 4डी पर करते हैं।''
      - ''इससे इलेक्ट्रोड, इलेक्ट्राॅन और अन्य टेक्निक के यूज से हम ये देख पाते हैं कि उसका कौन सा पार्ट क्या काम कर रहा है। कितनीं तेजी से एक्टिव है। किस रेंज पर शून्य है और कौन से प्वाइंट पर बेस्ट है।''
      - ''डीएनए और 4डी ब्रेन मैपिंग दोनों को मिलाकर जो रिर्पोट हम तैयार करते हैं। उसके आधार पर हम तय करते हैं कि वो किस कोर्स या किस फील्ड के लिए बना है।''
      - ''इस पूरे रिर्पोट को वो बच्चे की जैसे कुंडली तैयार करते हैं, उसी तरह से एक पेन ड्राइव या चिप में अपने पास रख सकते हैं।''
      - ''हम ये तक मालूम कर सकते हैं कि वो किन परिस्थितियों में डिप्रेशन में होगा या नहीं। उसका बेस्ट परफार्मेंस कब और कहां होगा।''


      कितना लगता है समय?
      - इस पूरे प्राॅसेस में एक हफ्ते का समय लगता है। इसमें एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुबोध कुमार ब्रेन कम्प्यूटिंग करते हैं।
      - इसके बाद इसका डायलिसिस करके उसको रिकॉर्ड किया जाता है। इसके अलावा कई मेडिकल प्रोफेशनल्स और कम्प्यूटर साइंस से जुड़े एक्सपर्ट हमारे साथ काम कर रहे हैं।

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      बच्चों की कैपसिटी किस फील्ड में बेस्ट होगी इसका पता लगाया जा सकता है।

      2013 में हुए की रिसर्च- नवंबर 2017 में हुआ पेटेन्ट

      - इनके मुताबिक, ''2013 में यूके में जब था, तो कई लेख लिखे थे। इस दौरान मेरी किताबों को पढ़कर सीबीआई चीफ जोगिन्दर सिंह काफी इम्प्रेस हुए।''
      - ''उन्होंने बताया कि हमारे पास ज्यादातर ऐसे सूसाइट केस आते हैं, जिसमें बच्चे पैरेंट्स के दबाव के चलते गलत कोर्स में एडमिशन ले लेते हैं। इन्वेस्टिगेशन में कुछ ऐसे केस भी देखने को मिले, जिसमें बच्चे किसी गलत सोच या लत के शिकार हो जाते हैं।''
      - ''उनकी एडवाइज और गाइडेंस के बाद ही मैंने ''ब्रेन बिहेवियर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया की स्थापना की।''
      - ''नवंबर 2017 में पेटेन्ट कराया। अब सरकार की परमिशन लेकर इसके सेंटर्स हर राज्य में खोलने पर विचार कर रहे हैं।''
      - ''अगर राज्य सरकार इसको सहयोग करेगी तो हर आम इंसान के लिए ये सुलभ होगी। सरकारी सहयोग मिलेगा तो इसे बड़े जिला अस्पतालों में भी लगाया जा सकता है।''

      जम्मू सरकार को दे चुके प्रेजेंटेशन, योगी से मिलने का मांगा समय

      - डॉक्टर ने बताया, ''हमारी टीम ने अपना पहला प्रेजेंटेशन जम्मू कश्मीर सरकार को दिया है। वहां के स्टूडेंट्स को अपनी क्वालिटी पता होगी, तो वो उनको कोई धर्म या मजहब के नाम पर भटका नहीं सकेगा।''
      - ''अब हमने इसी प्रोजेक्ट को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने समय मांगा है। मुझे यकीन है, यूपी में इसे सरकार का सपोर्ट जरूर मिलेगा।''

      कौन है डॉक्टर आलोक कुमार मिश्रा ?
      - डॉ. आलोक कुमार मिश्रा ने 2002 में पीएचडी आॅफ ''फिलोसाफी आॅफ माइंड रिर्सच एंड साइंसेज'' में किया।
      - पोस्ट डाक्टोरल प्रोग्राम इन साइकोलॉजिकल एंड बिहैविरल'' एम्स 2004 में पढ़ाई की।
      - 2007 में ''पीएचडी इन माइंड बाॅडी मेडिसिन'' में एम्स नई दिल्ली से पीएचडी की है।
      - 2011 में यूके से क्रिमनालाॅजी रिसर्च स्टडी को पूरा किया। 2013 तक लंदन में रहे। कई आर्टिकल और लेक्चर वहंा दिए।
      - इसके अलावा आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्टेट्स लॉ'' की टेनिंग भी की।
      - इंडिया में 2013 को वापस आए। इसके बाद यहंा जुवेनाइल क्राइम कमेटी हाईकोर्ट ने जो बनाई उसके मुख्य सदस्य रहे।
      - दिल्ली जुवेनाइल बोर्ड का फाउंडर मेम्बर हैं।

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      डॉ. आलोक कुमार मिश्रा ने बताया- टेक्नोलॉजी के जरिए बच्चों के दिमाग में क्या चल रहा है यह जान सकते हैं।
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      2013 में रिसर्च की शुरुआत की और नवंबर 2017 में पेटेन्ट हुआ।
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    Web Title: Brain Mapping Technology 4D
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