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UP में बड़ों तक नहीं पहुंचती CBI जांच की आंच, सालों बाद भी न असली भ्रष्टाचारी ढूंढ पाई न हत्यारे

मनरेगा, खाद्यान्न, खनन, एनएचएम, सिंचाई जैसे महकमों के भ्रष्टाचार की CBI के पास है जांच

parvez Ahmad | Last Modified - Jan 30, 2018, 01:19 PM IST

  • UP में बड़ों तक नहीं पहुंचती CBI जांच की आंच, सालों बाद भी न असली भ्रष्टाचारी ढूंढ पाई न हत्यारे
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    केन्द्रीय जांच ब्यूरो

    लखनऊ. उत्तर प्रदेश में CBI की जांचें सवालों के घेरे में हैं। यह एजेंसी UP के खाद्यान्न घोटाले की एक दशक से जांच कर रही है। मनरेगा की जांच शुरू हुए 4 साल, एनआरएचएम (अब एनएचएम) की 6 साल, अवैध खनन की जांच करते डेढ़ साल गुजर गए। मगर एजेंसी के अधिकारी असली गुनगहारों तक नहीं पहुंच पाए। आखिर क्यों ? सवाल विपक्ष का है। जांच के तरीकों पर सवाल उठते रहे हैं। कई लोगों ने CBI पर इल्जाम के साथ आत्महत्या कर ली। मथुरा के बहुचर्चित जवाहरबाग कांड, पुलिस-अपराधी गठजोड़ की नजीर लखनऊ के श्रवण साहू हत्याकांड व आईएएस अनुराग तिवारी की संदिग्ध मौत का भी CBI निष्कर्ष नहीं निकाल पायी। ...(आगे की स्लाइड्स में इन्फो के जर‍िये पढ़‍िए पूरा मामला)

    इन विभागों चल रही CBIजांच

    -ग्राम्य विकास, सिंचाई विभाग, श्रम विभाग, नोएडा अथाॉरिटी, यूपीपीएससी, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, यूपीएसआईडीसी, औद्योगिक विकास विभाग में हुई विभिन्न गड़बड़ियों की जांच सीबीआई कर रही है।

    -लंबा अरसा गुजरने के बाद भी उसने किसी बड़े अधिकारी या राजनेता पर हाथ नहीं डाला है।बाबू सिंह व प्रदीप शुक्ला की एनआरएचएम में गिरफ्तारी अपवाद है।

    -यूपी कैडर के तकरीबन 20 से IAS जांच के घेरे में हैं। एक IPS के खिलाफ चार्जशीट तक दाखिल हो चुकी है।

    - 50 ज्यादा एलाइट सर्विसेज के अधिकारी भ्रष्टाचार के इल्जामों से घिरे हैं, मगर एजेंसी उन तक पहुंच नहीं पा रही है, यह सवाल हर ओर है।

    बड़ों के चक्कर में नहीं बढ़ रही जांच ?

    -सीबीआई जांच के घेरे में यूपी कैडर के 18 से अधिक IAS घिरे हैं। इनमें मुख्य सचिव व अपर मुख्य सचिव स्तर के आधा दर्जन हैं। सचिव स्तर के 10 से अधिक अधिकारी हैं।

    -50 से अधिक पीसीएस अधिकारी, ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी, इंजीनियर, ठेकेदार, राजनेता भी शामिल हैं।
    -कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल का कहना है- "भाजपा ने CBI का राजनीतिकरण कर दिया है। जिन मामलों की जांच चल रही है, उसमें अफसरों के साथ भाजपा, सपा के नेता भी फंसे हैं, इसीलिए जांच नहीं बढ़ रही है।"
    -कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी वीरेन्द्र मदान कहते हैं-"भाजपा सरकार में वही अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं, जिन पर पहले से ढेरों आरोप है। भाजपा सरकार एेसे अधिकारियों के जरिये अपना हित साधने में जुटी है।"
    -सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य किरनमय नंदा कहते हैं-"यह कौन नहीं जानता है कि केन्द्र की सरकारें CBI का दुरुपयोग करती हैं। वह पहले इस जांच एजेंसी को जांचें भेजती हैं फिर उसके जरिये विरोधी दल व उसके नेताओं को धमकाती हैं।"
    -राष्ट्रीय लोकदल के अनिल दुबे का कहना है-"केन्द्र सरकार ने इस जांच एजेंसी को कठपुतली बना लिया है। चुनाव के समय अवैध खनन की जोर-शोर से जांच शुरू हुई मगर जिस बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा अवैध खनन हुआ। गलत पट्टे दिये गये, वहां के मामले में सीबीआई के अधिकारी चुप्पी साध गए।"
    -भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव की राय विपक्ष से इतर है। वह कहते हैं-"CBIपर जनता को पूरा विश्वास है। यही कारण है कि योगी सरकार ने जहां भ्रष्टाचार का संदेह था, वहां की जांच इस एजेंसी को सौंपी है। CBIपर दबाव की बात बेबुनियाद है।"

    योगी सरकार ने इनकी सीबीआइ जांच कराई

    -यूपीपीएससी भर्ती घोटालाः 31 मार्च 2012 से लेकर 31 मार्च 2017 के बीच हुई लगभग 20 हजार भर्तियां हुईं। इसमें PCS से लेकर डॉक्टर और इंजीनियर तक के पद शामिल है।

    -रिवर फ्रन्ट घोटालाः योगी सरकार ने अखिलेश सरकार के बहुचर्चित रिवर फ्रन्ट घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपी थी। इसमें परियोजना की लागत में अपूर्व बढ़ोत्तरी की इल्जाम है।

    -आइएएस अनुराग तिवारी की हत्या की सीबीआई जांच का फैसला

    -चीनी मिल बिक्री घोटाला, अभी इसे सीबीआई ने टेकअप नहीं किया है।

    -सहारनपुर-यमुनोत्री घोटालाः इसमें 14 बैकों ने व कंपनी ने 500 करोड़ से अधिक का घोटाला किया है।

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    10 साल में CBI असली गुनहगार नहीं ढूंढ पाई
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    मनरेगा के घोटालेबाज भी हाथ नहीं आए।
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    यूपीपीएससी भर्ती घोटाला
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    ias की संदिग्ध मौत की सच्चाई भी नहीं खोली
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    बुंदेलखंड नहीं पहुंची CBI जांच की आंच
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    जवाहर बांग अतिक्रमण की जांच बेनतीजा
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    रिवर फ्रन्ट घोटाले की जांच
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    सीबीआई ने हीं ली जांच
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    एनआरएचएम
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