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8 महीने में भी योगी सरकार नहीं कर पाई ये नियुक्तियां, नीति आयोग के उपाध्यक्ष का पद भी खाली

निगमों, समितियों और विभागों में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, एडवाइजर और मेंबर की 80 पद खाली है।

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2017, 12:00 PM IST
निकाय चुनाव के बाद हुई समीक्षा निकाय चुनाव के बाद हुई समीक्षा

लखनऊ. योगी सरकार को सत्ता में आए 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया है। इसके बावजूद निगमों, समितियों और विभागों में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, एडवाइजर और मेंबर की पोस्ट खाली है। इन नियुक्तियों को लेकर बीजेपी वर्कर को बेसब्री से इंतजार है। राज्य के लिए बेहद अहम नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद पर तैनाती नहीं हो पाई है। ये पद है खाली...


- पिछली अखिलेश सरकार में प्रदेश में 80 नेताओं को अलग अलग निगमों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विभागों में एडवाइजर के तौर पर तैनाती मिली थी। 19 मार्च को सीएम योगी के शपथ लेने के बाद ही तत्कालीन मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने अगले ही दिन आदेश जारी कर सभी गैर शासकीय सलाहकारों, निगमों, विभागों व समितियों में अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों को हटाने का आदेश जारी किया था।


- इसके बाद राज्य योजना आयोग (अब नीति आयोग) के उपाध्यक्ष नवीन चंद बाजपेयी ने भी इस्तीफा दे दिया था। योगी सरकार के आने के बाद से सिर्फ हिन्दी संस्थान के के कार्यकारी अध्यक्ष की ही तैनाती की जा सकी है।

- पार्टी ने निकाय चुनाव को लेकर ऐसे पदों पर नियुक्तियों को फिलहाल टाल रखा था, लेकिन चुनाव दर चुनाव पार्टी को जीत दिलाने वाले कार्यकर्ता अब सरकार से कुछ पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

- जानकार सूत्रों ने बताया, "नगरीय निकाय चुनाव में जीत के बाद समीक्षा में शामिल होने आये सीएम योगी के समक्ष भी यह मामला उठा था।"

- करीबी अफसरों की मानें, "इस बाबत कुछ डॉक्यूमेंट्स इधर से उधर हुए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के गुजरात चुनाव में बिजी होने की वजह से इस बारे में चर्चा नहीं हो पाई।

विधायकों को समायोजन की उम्मीद
-बता दें कि इस बार की विधानसभा में 312 से ज्यादा सीटें मिली हैं। मैक्सिमम 60 विधायक ही सरकार का हिस्सा हो सकते हैं, इनमें तकरीबन 47 विधायक सरकार का हिस्सा हैं। ऐसे में पार्टी के विधायकों की निगाहे भी इन पदों पर लगी हैं। सपा-बसपा से विधान परिषद छोड़ भाजपा में आए नेताओं को भी समायोजन की उम्मीद है।

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