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यूपी उपचुनाव: गोरखपुर में सपा कैंडिडेट ने ईवीएम पर उठाये सवाल, काउंटिंग जारी

यूपी उपचुनाव में 2 लोकसभा सीटों गोरखपुर और फूलपुर के लिए वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है।

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 09:34 AM IST
बीएसपी समर्थित सपा कैंडिडेट प बीएसपी समर्थित सपा कैंडिडेट प

लखनऊ. सीएम योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य की पिछली बार जीती फूलपुर लोकसभा सीट इस बार सपा-बसपा ने बड़ा झटका दिया है। दोनों सीटों पर बीजेपी की हार हुए है। फूलपुर से सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल को 3,42,796 और बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2,83,183 वोट मिले। नागेंद्र पटेल 59,613 वोटों से जीते। वहीं, सपा के प्रवीण निषाद को 4,56,513 वोट मिले। बीजेपी कैंडिडेट उपेंद्र शुक्ल को 4,34,632 वोट मिले। निषाद 21,881 वोटों से जीते।

वहीं, सीएम योगी ने हार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम जनता के फैसले को स्वीकार करते हैं। पीएम के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है लेकिन उपचुनाव में लोकल मुद्दे हावी होते हैं। दोनों चुनाव हमारे लिए सबक हैं। आगे हम समीक्षा करेंगे। सपा-बसपा के गठबंधन के कारण हमें नुकसान हुआ है। हम इन चुनावों से सबक लेते हुए आगे बढेंगे।

क्या कहा अखिलेश यादव ने ?

अखिलेश यादव ने बसपा प्रमुख मायावती को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि देश की महत्वपूर्ण लड़ाई में उनका सहयोग मिला। आज जो परिणाम आया है। दोनों लोकसभा के लाखों लोगों ने हमें जिताया है। उनका धन्यवाद। आज के चुनाव परिणाम से राजनैतिक सन्देश गया है। एक मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को जनता ने हराया है।
-नौजवानों को रोज़गार नहीं दिया गया किसानों की कर्जमाफी का ढोंग का जवाब जनता ने दिया है। 2017 में हम काम गिनाते रहे। भाजपा कह रही थी हमारे कारनामे बोल रहे हैं। ये भाजपा के लोग हमेशा समाज में जहर घोलने का काम करते हैं। भाजपा की वादाखिलाफी से नाराज जनता ने एक हो के हमारे पक्ष में मतदान किया है।

गोरखपुर में पिछली आठ बार से कौन जीत रहा था?

- इस सीट पर पिछले आठ चुनाव से गोरखनाथ मठ का कैंडिडेट ही जीतता आ रहा था।
- महंत अवैद्यनाथ 1989, 1991 और 1996 में जीते। 1989 में हिंदू महासभा के टिकट से और बाकी दो बार बीजेपी के टिकट पर।
- इसके बाद पांच बार यानी 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही यहां जीतते रहे।
- बीजेपी के लिहाज से 27 साल बाद और मठ के लिहाज से 29 साल बाद ऐसा हुआ जब यहां गोरखनाथ मंदिर से इतर कोई कैंडिडेट जीता।

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