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यूपी उपचुनाव: सपा-बसपा ने मिलकर 27 साल से भाजपा के गढ़ गोरखपुर को छीना, फूलपुर में भी हराया

दोनों सीटों के लिए 11 मार्च को वोटिंग हुई थी। फूलपुर सीट पर 38% और गोरखपुर में 43% मतदान हुआ।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 14, 2018, 08:52 PM IST

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    लखनऊ. गोरखपुर और फूलपुर के लिए आखिरी वक्त पर अनमने ढंग से हुआ सपा-बसपा का गठबंधन काम कर गया। सीएम योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य की पिछली बार जीती फूलपुर लोकसभा सीट इस बार सपा-बसपा ने एक होकर भाजपा से छीन लीं। यह पहला मौका है जब 27 साल से भाजपा के गढ़ गोरखपुर में सपा-बसपा मिलकर जीती है। सबसे पहले फूलपुर के नतीजे आए। यहां सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल जीत गए। वहीं, गोरखपुर में भी सपा के प्रवीण निषाद जीत गए। दोनों सीटों पर पिछली बार से करीब 12% कम वोटिंग हुई थी। हार के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- "‘ये जनता का फैसला है। हम सभी को इसे मानना चाहिए। अति-आत्मविश्वास और आखिरी समय में सपा-बसपा की राजनीतिक सौदेबाजी के कारण हम हारे।’’

    कौन-कितने वोट से जीता?
    फूलपुर
    : सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल को 3,42,796 और बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2,83,183 वोट मिले। नागेंद्र पटेल 59,613 वोटों से जीते।
    गोरखपुर: सपा के प्रवीण निषाद को 4,56,513 वोट मिले। बीजेपी कैंडिडेट उपेंद्र शुक्ल को 4,34,632 वोट मिले। निषाद 21,881 वोटों से जीते।

    1) गोरखपुर में पिछली आठ बार से कौन जीत रहा था?
    - इस सीट पर पिछले आठ चुनाव से गोरखनाथ मठ का कैंडिडेट ही जीतता आ रहा था।

    - बीजेपी के लिहाज से 27 साल बाद और मठ के लिहाज से 29 साल बाद ऐसा हुआ जब यहां गोरखनाथ मंदिर से इतर कोई कैंडिडेट जीता।
    - महंत अवैद्यनाथ 1989, 1991 और 1996 में जीते। 1989 में हिंदू महासभा के टिकट से और बाकी दो बार बीजेपी के टिकट पर।
    - इसके बाद पांच बार यानी 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही यहां जीतते रहे।

    2) इस बार यूपी में क्या अलग हुआ?
    - गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा को रोकने के लिए 25 साल बाद सपा और बसपा साथ आईं। इससे पहले, 1993 में काशीराम और मुलायम सिंह साथ आए थे और सरकार बनाई थी। बाद में यह अलायंस 1995 में टूट गया था।

    3) गोरखपुर : सपा का एक्सपेरिमेंट काम कर गया, कम वोटिंग से फायदा हुआ
    - पिछली बार : 2014 में यहां योगी आदित्यनाथ 5,39,127 वोट पाकर जीते थे। सपा+बसपा को मिले वोटों की संख्या 4,02,756 थी। लेकिन यहां भी 2017 में सपा और बसपा के कुल वोट बीजेपी से 72 हजार आगे थे।
    - इस बार : गोरखपुर में बसपा से पहले सपा ने 10% मुस्लिम वोटरों के बीच पकड़ रखने वाली पीस पार्टी और 18% निषाद वोटरों के बीच पकड़ रखने वाली निषाद पार्टी से गठबंधन किया। यहां तक कि निषाद पार्टी के अध्यक्ष के बेटे प्रवीण निषाद को सपा का टिकट दिया। इसके बाद बसपा ने भी उसे समर्थन दे दिया। बीजेपी ने यहां उपेंद्र दत्त शुक्ल को टिकट दिया था। पहली बार बीजेपी ने किसी ब्राह्मण चेहरे को उतारा।
    - नतीजा : यहां 2014 में 54.6% के मुकाबले 43% मतदान ही हुआ। यानी बीजेपी के कम वोटर घरों से निकले। योगी आदित्यनाथ ने माना कि यहां बीजेपी ओवर कॉन्फिडेंस के चलते पिछड़ गई।

    4) फूलपुर : यहां भी 12% कम वोटिंग से बीजेपी को नुकसान हुआ, घर-बाहर की लड़ाई में वोट कटे
    - पिछली बार: 2014 में केशव प्रसाद मौर्य को 5,03,564 वोट मिले थे। पहली बार यहां बीजेपी जीती थी। उस वक्त के सपा और बसपा कैंडिडेट को मिले वोट मिला दें तो संख्या मौर्य को मिले वोटों से ज्यादा यानी 3,58,966 हो रही थी। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सपा और बसपा के कुल वोट बीजेपी से 36 हजार आगे थे।
    - इस बार: फुलपूर में पटेल वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। बीजेपी ने वाराणसी के मेयर रहे कौशलेंद्र सिंह पटेल और सपा ने नागेंद्र सिंह पटेल को टिकट दिया। इसके बाद बाहरी और घर के पटेल के बीच मुकाबला हो गया। यहां भी बसपा ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया।
    - नतीजा : उपचुनाव में 2014 के 50.2% के मुकाबले महज 38% वोटिंग हुई। इससे बीजेपी को नुकसान हुआ। बीजेपी के यूपी चीफ महेंद्र नाथ पांडेय ने भी माना कि वोटिंग पर्सेंटेज ही बीजेपी की हार का कारण है।

    5) दोनों सीटों पर क्यों उपचुनाव हुए?
    यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने 21 सितंबर, 2017 को गोरखपुर लोकसभा सीट छोड़ दी थी। वहीं, फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद उनकी सीट खाली हुई।

    6) इन नतीजों के क्या सियासी मायने हैं?

    • 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की रिकाॅर्ड जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को पीएम कैंडिडेट बताने वालों को झटका। मोदी-अमित शाह के सामने अब योगी झुके रहेंगे। अगले लोकसभा चुनाव में कैंडिडेट्स की पसंद केंद्रीय नेतृत्व पर ज्यादा निर्भर रहेगी।
    • ये 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए खतरे की घंटी हैं। अगर पूरे प्रदेश में सपा-बसपा तालमेल करते हैं और कांग्रेस भी अगर उनके साथ आ जाती है तो बीजेपी के लिए पिछली बार की 71 सीटों की रिकॉर्ड जीत को दोहराना बेहद मुश्किल होगा।
    • अगर 2014 के नतीजों में सपा-बसपा के वोटों को मिला दें तो बीजेपी की सीटें 71 से घटकर 37 और सपा-बसपा की सीटें बढ़कर 41 हो जाती हैं। इसमें भी अगर कांग्रेस के वोट मिला दें तो बीजेपी की सीटें 71 से घटकर 24 ही रह जाती हैं।
    • यूपी से सबक लेते हुए अन्य राज्यों में गैर-भाजपाई दल एक हो जाएं तो बीजेपी के मिशन 2019 को चुनौती दे सकते हैं।
    • दोनों उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। सोनिया-राहुल की परंपरागत सीटों को छोड़कर उसके पास राज्य में बसपा-सपा से तालमेल करने के अलावा विकल्प नहीं है।

    7) भाजपा की रणनीति क्या होगी?

    - लोकसभा चुनाव के पहले सपा-बसपा गठबंधन को तोड़ना। इन दोनों में कमजोर कड़ी बसपा ही है। वह पिछले लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई थी। मायावती को पुरानी फाइलें दिखाकर भाजपा बसपा को सपा से अलग होने पर विवश कर सकती है।

    दोनों सीटों पर हर राउंड में क्या रही वोटों की स्थिति?

    गोरखपुर सीट

    राउंडबीजेपीसपा+कौन आगे
    11557713911बीजेपी
    22919429218सपा
    34345644979सपा
    45694559907सपा
    57031774077सपा
    68281189950सपा
    791690105156सपा
    8108829119427सपा
    9120917135565सपा
    10133333149312सपा
    11150062163941सपा
    12165487180155सपा
    13179823194760सपा
    14192860212061सपा
    15206492229622सपा
    16220415244983सपा
    17235836262346सपा
    18250239278611सपा
    19264416293153सपा
    20279369307627सपा
    21294947321093सपा

    फूलपुर सीट

    राउंडबीजेपीसपाकौन आगे
    1990612383सपा
    22140222460सपा
    33078633227सपा
    43995543562सपा
    54763154562सपा
    65709264974सपा
    76714675354सपा
    87734887272सपा
    98732699557सपा
    1097369111668सपा
    11106534122247सपा
    12116219131978सपा
    13125528143611सपा
    14134819155314सपा
    15144166167008सपा
    16152740180367सपा
    17160839191014सपा
    18171016201205सपा
    19179935211063सपा
    20189489218963सपा
    21198844228794सपा
    22208128238233सपा
    23217032250285सपा
    24225125261684सपा
    25233254271752सपा
    26241764281445सपा
    27248886294645सपा
    28257821305172सपा
    29267776318942सपा
    30275217329191सपा
    31280535337683सपा
    32283183342796सपा की जीत

    गोरखपुर लोकसभा सीट पर पिछली बार कितना वोट शेयर रहा?

    पार्टीउम्मीदवार 20142014 में वोट शेयरउम्मीदवार 2018
    बीजेपीयोगी आदित्यनाथ51.8%उपेंद्र दत्त शुक्ल
    सपारमापति निषाद21.8%प्रवीण निषाद
    कांग्रेसअष्टभुजा प्रसाद त्रिपाठी4.4%सुरहिता करीम
    बसपाराम भुआल निषाद17%बसपा ने सपा को समर्थन दिया, उम्मीदवार नहीं उतारा

    फूलपुर लोकसभा सीट का पिछली बार कितना वोट शेयर रहा?

    पार्टीउम्मीदवार 20142014 में वोट शेयरउम्मीदवार 2018
    बीजेपीकेशव प्रसाद मौर्या52.4%कौशलेंद्र सिंह पटेल
    सपाधर्मराज सिंह पटेल20.3%नागेंद्र सिंह पटेल
    कांग्रेसमोहम्मद कैफ6.1%मनीष मिश्रा
    बसपाकपिल मुनि करवरिया17%बसपा ने सपा को समर्थन दिया, उम्मीदवार नहीं उतारा
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    गोरखपुर और फूलपुर सीट से जीत के रुझान मिलने के बाद लखनऊ में समाजवादी पार्टी के वर्कर्स ने जश्न मनाना शुरू कर दिया था।
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Web Title: यूपी उपचुनाव के नतीजे: BJP Leading On Phulpur And Gorakhpur Loksabha Seat, BJP Leading On Gorakhpur And SP On Phulpur
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