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अब निकाह के वक्त कुबूल करना होगा, नहीं बोलूंगा 'तीन तलाक'

मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड माडल निकाहनामा में नया प्रावधान लाने की कोशिश कर रही है।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:24 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में तीन तलाक को गैर कानूनी माना गया है। फाइल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में तीन तलाक को गैर कानूनी माना गया है। फाइल

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केन्द्र सरकार तीन तलाक के मामले में कानून लेकर आई हैं। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) अपने निकाहनामा में बड़ा बदलाव करने की योजना बना रहा है। AIMPLB के प्रवक्ता फ‍िरंगी महली ने गुरूवार को बताया कि अब निकाहनामे को मॉडल बनाया जा रहा है। इस निकाहनामा में शौहर (पति) को कुबूलनामे के वक्त ही कुबूल करना होगा कि वह एक साथ तीन तलाक नहीं देगा। उन्होंने बताया कि ये कदम बढ़ते तीन तलाक को रोकने के लिए उठाया जा रहा है। आपको बता दें कि केन्द्र के द्वारा लाए गए मसौदे पर पहले ही AIMPLB अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। AIMPLB ने जहां तीन तलाक को धर्म से जुड़ा मामला बताया था वहीं, सरकार की तरफ से कहा गया था कि यह बिल किसी धर्म से नहीं जुड़ा बल्कि महिलाओं के हित के लिए है।


ये है पूरा मामला...

-हालांकि बोर्ड एक साथ तीन तलाक को सामाजिक बुराई मानता है और इस पर सामाजिक स्तर पर ही पाबंदी लगाने के पक्ष में है। बता दें कि बोर्ड पहले ही तलाक के मामले में कोड ऑफ कंडक्ट जारी कर एक साथ तीन तलाक देने वाले का सामाजिक बहिष्कार करने का एलान कर चुका है।
-AIMPLB के प्रवक्ता फ‍िरंगी महली ने कहा- एक ही वक्त में तीन तलाक से कई बार परिवार बिखर जाते हैं, लेकिन कई मौकों पर ये महिलाओं के हित में रहता है और वे खुद एक ही वक्त में तलाक चाहती हैं।

-महिलाओं और परिवार के हित को ध्यान मे रख कर बोर्ड ने मॉडल निकाहनामे में एक लाइन जोड़ी है, जिसमें शौहर ये वादा करेगा कि वो भविष्य में एक ही वक्त में तीन तलाक नहीं कहेगा। तलाक जरूरी होने पर वो एक वक्त में एक ही तलाक देगा ताकि परिवार टूटने की गुंजाइश न बने।


हैदराबाद में होगी चर्चा
- हैदराबाद में 9 फरवरी से AIMPLB की होने वाली सालाना बैठक में सभी मसलकों के उलेमा से मॉडल निकाहनामे को लेकर चर्चा की जाएगी। सभी उलेमा की मंजूरी मिलने के बाद एक ही मॉडल निकाहनामे को चलन में लाने के लिए बोर्ड काजियों को तैयार करेगा।
-काजी पर्सनल लॉ बोर्ड के निकाहनामे पर निकाह पढ़ाने के साथ ही शौहर को एक साथ तीन तलाक नहीं देने के वादे पर दस्तखत करवाएंगे।


लोकसभा में पास हो चुका है बिल
-लोकसभा में ट्रिपल तलाक से जुड़ा बिल पास हो गया। वहीं, राज्यसभा में बिल अभी पेडिंग में है।
-बता दें कि यह बिल लोकसभा के पटल में 28 दिसंबर, 2017 को रखा गया था। बिना किसी संशोधन के 1400 साल पुराने ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ बिल लोकसभा में 7 घंटे के भीतर पास हो गया था।
-बिल पास होने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था, "ये बिल धर्म, विश्वास और पूजा का मसला नहीं है, बल्कि जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वालिटी से जुड़ा मसला है। अगर देश की मुस्लिम महिलाओं के हित में खड़ा होना अपराध है तो हम ये अपराध 10 बार करेंगे।"

कितना सख्त है ट्रिपल तलाक का मसौदा?
- मसौदे के मुताबिक, एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी तौर पर गैरकानूनी ही होगा। इसमें बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सएेप, ईमेल, एसएमएस) के जरिये भी एक बार में तीन तलाक देना शामिल है।
- ऑफिशियल्स के मुताबिक, हर्जाना और बच्चों की कस्टडी महिला को देने का प्रोविजन इसलिए रखा गया है, ताकि महिला को घर छोड़ने के साथ ही कानूनी तौर पर सिक्युरिटी हासिल हो सके। इस मामले में आरोपी को जमानत भी नहीं मिल सकेगी।
- देश में पिछले एक साल से तीन तलाक के मुद्दे पर छिड़ी बहस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने इस बिल का मसौदा तैयार किया। सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन तलाक को बुनियादी हक के खिलाफ और गैरकानूनी बता चुका है।

AIMPLB के प्रवक्ता फ‍िरंगी महली। AIMPLB के प्रवक्ता फ‍िरंगी महली।
तीन तलाक को रोकने के लिए उठाया जा रहा है। तीन तलाक को रोकने के लिए उठाया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में तीन तलाक को गैर कानूनी माना गया है। फाइलसुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में तीन तलाक को गैर कानूनी माना गया है। फाइल
AIMPLB के प्रवक्ता फ‍िरंगी महली।AIMPLB के प्रवक्ता फ‍िरंगी महली।
तीन तलाक को रोकने के लिए उठाया जा रहा है।तीन तलाक को रोकने के लिए उठाया जा रहा है।
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