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सदन में 'यूपीकोका' पर चर्चा शुरू, योगी ने कहा- 9 महीने में हुआ 25 अपराधियों का एनकांउटर

यूपीकोका में सदन पर चर्चा शुरू हो गई है।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 01:20 PM IST
यूपीकोका को लेकर विधानसभा में आज से चर्चा शुरू हुई है। यूपीकोका को लेकर विधानसभा में आज से चर्चा शुरू हुई है।

लखनऊ. यूपीकोका बिल आज (शुक्रवार) को दोपहर बाद विधान परिषद में पेश किया जाएगा। इससे पहले गुरुवार को भारी हंगामे और विपक्षी दलों (सपा, कांग्रेस व बसपा) की गैरमौजूदगी में गुरुवार को विधानसभा में 'यूपीकोका' बिल पर चर्चा शुरू हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- " विपक्ष अनावश्यक यूपीकोका का विरोध कर रहा है। बीजेपी ने किसी कानून का दुरुपयोग नहीं किया है। हमारी सरकार बिना भेदभाव के काम कर रही है।" विपक्ष के लोग बिना चर्चा के कैसे इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा- 'जब सावन ही आग लगाए...उसे कौन बुझाए।' जबिक नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने सदन से बाहर आकर कहा है कि यूपीकोका के दुरुपयोग का पहला नमूना सपा महासचिव आजम खां को सदन में बोलने न देना है। यूपीकोका काला कानून है। अघोषित इमरजेंसी है। शुक्रवार को यह बिल विधान परिषद में टेबल होगा लेकिन इस सदन में विपक्ष का बहुमत है। एेसे में इस बिल को प्रवर समिति को भेजे जाने की संभावना है।

-सपा, बसपा और कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट किया। मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा- साम्प्रदायिक और जातिगत आधार पर यूपीकोका की व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। हमारा प्रेस पर सेंसरशिप का कोई इरादा नहीं है।

-वही, श्रीकांत शर्मा ने कहा- "सदन में 'यूपीकोका' बिल रखा गया। विपक्ष ने इसको संप्रदाय से जोड़ दिया। प्रदेश में सभी अपराध और अपराधियों से पीड़ित हैं पर विपक्ष इसको धर्म और जाति से जोड़ रहा है।"
-सपा, बसपा, दलित और पिछड़ों का अपमान कर रही हैं। सपा और बसपा नहीं चाहती कि प्रदेश अपराध मुक्त हो।

सीएम योगी ने कहा- विपक्ष क्यों कर रहा विरोध

-सीएम योगी आदित्यनाथ ने सदन में कहा, "बीते 9 महीने में बेहतर वातावरण बनाने का काम किया। शासन-प्रशासन के प्रति बेहतर माहौल के लिए कई प्रयास किये लेकिन इसके बावजूद ये महसूस हुआ कि संगठित अपराध के रोकथाम के लिए एक कानून चाहिए। क्योंकि सबको जीने का अधिकार है, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ सालों में ऐसा माहौल बना की लोगों का विश्वास टूटा और प्रदेश की खराब तस्वीर दुनिया के सामने बनी।"

यूपी में आने से डरते थे निवेशक

-प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय आधी हो गई थी निवेशक यूपी में निवेश करने से डरने लगे। जब हमने 9 महीने पहले सत्ता संभाली तो इसे ठीक करने के लिए कई काम किये गए। धार्मिक कार्यक्रमों को तबीक किया गया। दीवाली, जन्माष्टमी और ईद का त्योहार शांति से मनाने का प्रयास हुआ। हमने अपराध मुक्त सरकार देने का वादा किया था।
-पुलिस के टूटे मनोबल को बहाल करने, आमजन के मन में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा करने के प्रयास पिछले 9 महीनों में किए गए। इसके बाद भी महसूस हुआ कि प्रदेश में संगठित अपराध को रोकने के लिए कुछ और प्रावधान की जरूरत है। पिछले कुछ सालों में ऐसा माहौल बना की लोगों का विश्वास उठ गया, कोई निवेश नहीं करना चाहता। पिछले किसी भी चुनाव की तुलना में प्रदेश का नगरीय निकाय चुनाव शांति पूर्ण रहा।

-21 और 22 फरवरी को इन्वेस्टर समिट बुलाया गया है। ये प्रदेश के लिए शुभ है क्योंकि हम सुरक्षा की गारंटी दे रहे हैं।

2000 से ज्यादा गिरफ्तारी


-आम जन शासन से विकास के साथ सुरक्षा चाहता है। विश्वास बहाली के लिए हमने पुलिस अधिकारियों को पेट्रोलिंग करने को कहा। हमने पाया कि कई शरारतन वारदातें हो रही हैं। पुलिस पर हमले हो रहे थे। पुलिस का कार्य करने का तरीका बदला। 800 से ज्यादा मुठभेड़ हुईं, 2000 से ज्यादा गिरफ्तारी हुईं। एनएसए, गैंगस्टर एक्ट भी लगाए गए। 25 अपराधी मारे गए। इसका एक सकारात्मक प्रभाव लोगों पर पड़ा।
-वारदातें कम हुई हैं, डकैती, लूट, हत्या, रोड होल्डिंग की घटनाओं में कमी आई है। हमें इस गिरावट को और कम करना है इसीलिए हम पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में भी एफआईआर काउंटर खुलवाए। 2700 से ज्यादा अपराधियों ने अदालतों में समर्पण किया। महिलाओं की सुरक्षा से सम्बंधित मामले के लिए हमने एंटी रोमियो स्क्वायड बनाया।
-7,95,077 स्थानों पर 3022 पर कार्रवाई हुई। 9 लाख 67 हजार से ज्यादा लोगों को चेतावनी देकर छोड़ा गया। काफी सारे असलहे बरामद किए गए। प्रदेश में आतंकवाद से निपटने के लिए एटीएस को और मजबूत किया गया। कई आतंकी इस दौरान गिरफ्तार हुए हैं। 228 अपराधियों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया।
-आम आदमी शांति और विकास चाहता है। इस मोर्चे पर खामियों को दूर करने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि 2016 की तुलना में 2017 में अपराध कम हुए हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने काला कानून बताया

-विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने यूपीकोका को काला कानून ठहराते हुए कहा कि यह कानून राजनैतिक विरोधियों, पत्रकारों को, गांव के किसानों को, दलितों को, पिछड़ों और विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को डराने के लिए यह विधेयक लाया गया है। इसका जीता जागता उदाहरण सदन में मिल गया।

-हमारे पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री आठ-नौ बार के विधानसभा के सदस्य दो बार के संसदीय कार्य मंत्री, नेता प्रतिपक्ष के तौर पर काम कर चुके आजम खां बोलने को खड़े हुए तो अल्पसंख्यक होने के नाते, अल्पसंख्यकों की असली बात यह रख न सकें, इसके लिए भाजपा ने बोलने नहीं दिया। इससे सिद्ध होता है कि ये जो विधेयक लाते हैं, ये लोग विपक्ष विहीन राजनीति करना चाहते हैं।

बसपा ने भी किया विरोध

-बसपा के नेता व पूर्व संसदीय कार्यमंत्री लालजी वर्मा ने कहा कि हमे इस बात की आशंका है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार काम कर रही, अपने विरोधियों को फंसाने का कार्य कर रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण अलीगढ़ का है। बसपा इस कानून का विरोध करती है।

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फाइल। फाइल।