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70 साल की मां को मिलता था ऐसा टॉर्चर, खाना चाहिए तो 90 सीढ़ी चढ़ो-उतरो

मौत के डर से कानपुर से लखनऊ भाग आई ये मां, बताई अपनी पूरी स्टोरी।

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 05:36 PM IST

लखनऊ. जीवन के जिस पड़ाव में बुजुर्गों को अपने घरवालों के सबसे ज्यादा साथ की जरूरत होती है, उस उम्र में 70 साल की उमा शर्मा लखनऊ के ओल्ड एज होम में अकेले रहने को मजबूर हैं। कानपुर में रह रहे उनके बेटा-बहू ने न सिर्फ उनके घर आने पर रोक लगा रखी है, बल्कि उनके हसबैंड से भी मिलने नहीं दिया जा रहा। DainikBhaskar.com के साथ उन्होंने अपना दर्द साझा किया।

बेटा-बहू करते थे टॉर्चर


- उमा बताती हैं, "वो मेरे साथ जानवरों जैसा सलूक कर रहे थे। मेरे साथ मारपीट तक उतारू थे। मुझे उम्र के इस पड़ाव पर बेटे ने घर के तीसरी मंजिल पर बने छोटे से कमरे में रखा था, जहां टॉयलेट तक नहीं बनी।"
- "भोजन के लिए मुझे हर रोज 90 सीढ़ियां चढ़नीं और उतरनी पड़ती थीं। अगर किसी दिन मेरी तबीयत खराब हो और मैं नीचे न जा पाऊं, तो मुझे कोई एक गिलास पानी तक पूछने वाला कोई नहीं था। जिस बेटे के लिए मैंने जिंदगीभर मेहनत की, उसने मुझे ये सिला दिया।"
- "बहू मेरे पति के प्रति तो उदार है, लेकिन मुझे अपनी दुश्मन समझती है। अगर मैं अपने पति के साथ बात करती भी दिख जाऊं तो पूरा घर सिर पर उठा लेती थी। उसकी वजह से बेटे ने मुझ पर हाथ तक उठाया था।"

लड़की के घरवालों की गरीबी देख बनाया बहू

 

- उमा बताती हैं, "मैं कानपुर की रहने वाली हूं। 10 साल तक महिला मंच की प्रेसिडेंट रही हूं। मेरे हसबैंड प्रेम किशोर शर्मा पहले इंटर कॉलेज में म्यूजिक टीचर थे। अब वे रिटायर हो चुके हैं।"
- "हसबैंड मेरी बहू प्रियंका को शादी से पहले म्यूजिक सिखाने जाते थे। लड़की की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए वो फीस भी बहुत कम लेते थे। हमें पैसों की कोई कमी नहीं थी, पति सिर्फ शौक के लिए ही म्यूजिक सिखाते थे।"
- "प्रियंका की फैमिली ने मेरे बेटे विकास के लिए हमारे सामने शादी का प्रपोजल रखा। मुझे वो फैमिली पसंद नहीं थी, लेकिन हसबैंड ने रिश्ते के लिए हामी भर दी।"

जॉब लगने के बाद बहू के बदले तेवर

 

- उमा बताती हैं, "प्रियंका शुरुआत में बहुत अच्छी रही। हसबैंड और बेटे के प्रति उसका सेवा भाव देखकर मैंने भी उसे मन ही मन अपना लिया।"
- "मेरे बेटा विकास इंटर तक ही पढ़ा है। उसके पास कोई अच्छी जॉब भी नहीं थी। वो ट्यूशन के जरिए ही कमाई करता है। वहीं बहु पोस्ट ग्रैजुएट है। हमने सोचा कि बहू की जॉब लग जाएगी तो दोनों की जिंदगी ख़ुशी में बीतेगी।"
- "प्रियंका की जॉब के लिए मेरे पति ने बहुत दौड़-भाग की। उनकी मेहनत से उसे म्यूजिक टीचर की गवर्नमेंट जॉब मिल गई। उसकी सैलरी सीधे 40 हजार रुपए की थी।"
- "बेटा बड़ी मुश्किल से ट्यूशन पढ़ाकर 5-6 हजार रुपए महीना ही कमा पाता था। पूरा घर एक तरह से बहु की कमाई पर ही चल रहा था। इसी वजह से उसका बिहेवियर चेंज होने लगा। दवा से लेकर राशन तक में कटौती करने लगी। मैंने पूछा तो मुझे ही भला-बुरा कह दिया। तब हमको एहसास हुआ, कि उससे शादी करवाना एक गलती थी।"

इस मजबूरी में लिया घर छोड़ने का फैसला

 

- उमा बताती हैं, "मैं थर्ड फ्लोर पर रहती थी। पानी की टंकी के पास मुझें रहने के लिए रूम दिया गया था। रोज टंकी का पानी ओवरफ्लो होने पर मेरे कमरे के अंदर आता था।"
- "मैंने बेटे और बहु दोनों से कहा कि मुझे हसबैंड के साथ फर्स्ट फ्लोर पर रहने दें, लेकिन दोनों ने मना कर दिया। मैंने गुस्से में दोनों को खूब बुरा-भला कहा, जिससे बहु नाराज हो गई। उसे नाराज देखकर बेटा भी उसकी तरफ हो गया।"
- "उसने सबके सामने मुझ पर हाथ उठाने की कोशिश की। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। उस रात मैं औए मेरे हसबैंड खूब रोए। उन्होंने कहा कि तुम किसी आश्रम चली जाओ, नहीं तो ये लोग ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे। मैं घर से भाग गई।"

वृद्धाश्रम तक किया पीछा

 

- उमा बताती हैं, "मैंने हसबैंड के कहने पर बेटा और बहु को बिना बताए घर छोड़ दिया। कुछ दिन कानपुर के एक ओल्ड-एज होम में रही। एक दिन ये बात कहीं से मेरे बेटे को पता चल गई। उसने वहां के मालिक को खूब बुरा-भला कहा।"
- "मेरे बेटे की हरकतों से नाराज होकर ओल्डएज होम वाले ने मुझें निकाल दिया। उसके बाद से मैं कुछ दिनों तक सड़कों पर सोई। कानपुर से भटकते हुए फिर लखनऊ पहुंच गई। अब यहीं रह रही हूं।"