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19 साल के लड़के ने बनाया ऐसा डिवाइस, 200 रु. खर्च कर बनेगी एलेक्ट्रिसिटी

आशुतोष पाठक ने DainikBhaskar.com से बात कर अपने एक्सपीरिएंस को शेयर किया।

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 05:27 PM IST
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लखनऊ. यहां एक 19 साल के आशुतोष ने अपने भाई के साथ मिलकर एक अनोखा 'फ्री एनर्जी' डिवाइस बनाया है। 200 रुपए की लागत से तैयार इस डिवाइस से घरों को रोशन किया जा सकता है। साथ ही 6 हजार या उससे ज्यादा की लागत लगाकर डिवाइस की कैपिसिटी बढ़ाई जा सकती है। जिसकी मदद से पंखे से लेकर टीवी और वाशिंग मशीन तक चलाया जा सकता है। DainikBhaskar.com से आशुतोष पाठक ने फ्री डिवाइस एनर्जी की पूरी डिटेल शेयर की। ऐसे आया डिवाइस बनाने का आईडिया...

 

 

-आशुतोष का कहना है, ''मेरे गांव में बिजली नहीं है। शहर को जाने वाली सड़क आज भी टूटी हुई है। अंधेरा होने के बाद लोगों को काफी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है। कई लोग गिर कर चोटिल हो चुके हैं।''

- ''8वीं क्लास के दौरान मन में ख्याल आया- क्यों न एक ऐसी डिवाइस बनाई जाए। जिससे गांव में बिजली की प्रॉब्लम दूर हो सके।''

- ''मन पक्का करके घर के कबाड़ से काम की चीजें इकट्ठा की। फिर मैं स्कूल से आने के बाद सीधे इलेक्ट्रनिक की शॉप पर जाने लगा। वहीं से जरूरत की चीजें जुटा लेता था।''

- ''इसके बाद मैंने अपने भाई आशीष पाठक की मदद से 'फ्री एनर्जी' डिवाइस तैयार किया। उस वक्त 200 रुपए के खर्चे से एक छोटा सा डिवाइस बनाया। अब 5 दिन के अंदर एक बड़ा डिवाइस बनाया है।'' 

 

 

ऐसे बनाया 'फ्री इनर्जी' डिवाइस

-आशुतोष बताते है, ''फ्री इनर्जी डिवाइस बनाने के लिए सबसे पहले इलेक्ट्रानिक की शॉप से एक पुराना डायनेमो और  डीवीडी कार्ड लेते हैं।''

- ''उसके बाद डायनेमो में पुली लगाते है। फिर उसके ऊपर सीडी कार्ड को पुली के माध्यम से पट्टे पर चढ़ाएंगे। उसके बाद डायनेमो को तार के माध्यम से बैटरी से जोड़ देंगे।''

- ''सीडी कार्ड के माध्यम से कम से कम पांच डायनमो जोड़ देंगे। उसके बाद स्विच ऑन करेंगे। बिजली बनना शुरू हो जाएगी।''

- ''जो बिजली बनेगी उससे बैटरी को चार्ज करेंगे। उसके बाद एक तरह बिजली बनती रहेगी दूसरी तरफ उसका उपयोग किया जा सकेगा।''

 

ये है ड्रीम

- आशुतोष पाठक रूपडीहा के सीमावर्ती डिग्री कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। उसका कहना है, ''मैं हायर स्टडीज की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साइंटिस्ट बनना चाहता है।''

- ''मेरी इच्छा है कि मैं अपने गांव की बिजली और सड़क की प्रॉब्लम को दूर कर सकूं। इसलिए अभी मैं रोड बनाने के एक प्रोजेक्ट पर काम भी कर रहा हूं।''

- ''इस प्रोजक्ट के कम्प्लीट होने के बाद कचरे से सड़क का निर्माण किया जा सकेगा। इस सड़क को बनाने में कोई ज्यादा खर्च भी नहीं आने वाला है।''

 

ऐसे बीता था बचपन

- 25 जुलाई 1998 को आशुतोष का जन्म यूपी के बलरामपुर के बरगदही गांव में हुआ था। पिता रमेश चन्द्र पाठक डिस्ट्रिक्ट के हॉस्पिटल में क्लर्क और मां हाउस वाइफ  है।

- तीन भाई और तीन बहनों में आशुतोष दूसरे नंबर पर है। पिता की गवर्नमेंट जॉब की वजह से इन्हें पढ़ाई में कोई प्रॉब्लम  नहीं हुई।

- आशुतोष बताते हैं, ''मैं शुरू से ही पढ़ने में काफी अच्छा था। बचपन काफी अच्छे में बीता था।''

 

 

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