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रेगुलेशंस ऑफ फीस बिल पर बोले एक्सपर्ट: शिक्षा माफियाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया ड्राफ्ट

सरकार का दावा है कि बिल के पास होने के बाद प्राइवेट स्कूल हर साल एडमिशन फीस नहीं वसूल पाएंगे।

Danik Bhaskar

Dec 14, 2017, 04:12 PM IST
फीस निर्धारण के लिए बने ड्राफ्ट को लेकर एक्सपर्ट ने अपनी राय रखी है। फीस निर्धारण के लिए बने ड्राफ्ट को लेकर एक्सपर्ट ने अपनी राय रखी है।

लखनऊ. प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोत्तरी पर रोक लगाने के लिए योगी सरकार ने बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे 11 मेम्बर्स की कमेटी ने मिलकर बनाया है। प्रदेश सरकार ने यूपी सेल्फ फाइनेंस इंडिपेडेंट स्कूल्स (रेगुलेशन ऑफ फीस) बिल 2017 का ड्राफ्ट जारी करते हुए 15 दिन में आपत्तियां मांगी है।

- सरकार का दावा है कि बिल के पास होने के बाद प्राइवेट स्कूल हर साल एडमिशन फीस नहीं वसूल पाएंगे। वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि इसमें गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है। ये बिल राजनेताओं और शिक्षा माफियाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

- एजुकेशन एक्सपर्ट और माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा, पैरेंट्स वेलफेयर एसोसियेशन के प्रेसिडेंट डॉ. पीके श्रीवास्तव और मैग्सेस अवार्ड से सम्मानित डॉ. संदीप पाण्डेय ने Dainikbhaskar.com बात की। इस बिल के पास हो जाने के बाद पैरेंट्स को होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में जानकारी मांगी।

डिप्टी सीएम प्रो. दिनेश शर्मा: हर साल की फीस प्रकिया को तीन चरणों में बांट दिया गया है। पहला- संभव फीस, दूसरा- ऐच्छिक फीस, तीसरा- डेवलपमेंट फीस वेटेज।

फायदा: पैरेंट्स को अभी अपने बच्चे की एकमुश्त फीस जमा करना पड़ता है। फीस को तीन बार में देने को कहा गया है। इस प्रस्ताव से एकमुश्त फीस जमा करने की बाध्यता खत्म हो जाएगी। उन्हें फीस जमा करने के लिए टाइम मिलेगा।

नुकसान: डेवलपमेंट फीस वेटेज के नाम पर कालेज को मनमाने फीस वसूलने का एक और मौका मिलेगा। कॉलेज विकास शुल्क अधिभार के नाम पर स्टूडेंट्स से एक्स्ट्रा एक्टिविटीज(सिंगिंग, डांसिंग और स्प्रिचुअलिटी) के नाम पर मनमानी फीस वसूल करेंगे। इससे पैरेंट्स के उपर एक्सट्रा फीस का बोझ बढ़ेगा। डेवलपमेंट फी वेटेज को फी स्ट्रक्चर सिस्टम से हटाना चाहिए।


डिप्टी सीएम प्रो. दिनेश शर्मा: स्कूल छोड़ते समय बच्चों का कॉशन मनी वापस करना होगा। अब स्कूल को बिजनेस एक्टिविटीज से होने वाली इनकम को स्कूल की इनकम में माना जायेगा। इसमें कैंटीन भी शामिल है। इसके रेट भी रेट वाजिब हों, इसकी देखरेख की जाएगी।

फायदा: स्टूडेंट को स्कूल छोड़ने पर अभी तक काशन मनी नहीं लौटाई जाती है। अगर कॉशन मनी लौटाई जाती है, इससे ये होगा कि कोई भी पैरेंट्स जब अपने बच्चे का एडमिशन लेने के लिए स्कूल में पहुंचेंगे, तब वहां की फीस देखकर घबराएंगे नहीं। पहले से मालूम होगा कि फीस का एक हिस्सा स्कूल छोड़ने पर वापस मिलेगा। पैरेंट्स के मन में अपने बच्चे की फीस को जमा करने को लेकर तनाव कम हो सकेगा।

नुकसान: कोई नहीं

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा: स्कूलों को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर फीस एवं आय का ब्योरा पब्लिश करना होगा।

फायदा: फीस एवं आय का ब्यौरा वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर पब्लिश करने से स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लग सकेगी। स्कूल हर साल अपनी फीस नहीं बढ़ा पाएंगे। यदि वे फीस बढ़ाते है, तो इससे होने वाली आय की जानकारी भी उन्हें वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर देनी होगी।इससे सरकार उनकी मानिटरिंग कर सकेगी। वहीं स्कूलों संचालक फीस बढ़ाने से पहले एक बार जरुर सोचेंगे। उनके मन में शासन की कार्रवाई का डर भी बना रहेगा।

नुकसान : कुछ भी नहीं।

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा:
हर मंडल में ‘जोनल फीस कमेटी‘ की व्यवस्था की गई है। सेशन की शुरुआत में और आखिरी में फीस को बढ़ाया जा सकता है।

फायदा: जोनल फ़ीस कमेटी का गठन होने से स्कूलों की प्रॉपर मानिटरिंग हो सकेगी। कोई भी स्कूल सेशन के बीच में फीस नहीं बढ़ा पाएंगे।

नुकसान: जोनल फीस कमेटी का गठन होने से स्कूल संचालकों को अपनी मनमाने करने का एक मौका मिल सकता है। अगर वे जोनल फीस कमेटी के 11 मेम्बर्स में से आधे को भी घूस देकर अपने फेवर में करने में कामयाब हो जाते है। फिर बड़े ही आसानी से अपनी बात को मनमाने में कामयाब हो जायेंगे। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।

योगी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में फीस को कंट्रोल करने के समिति बनाई है। योगी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में फीस को कंट्रोल करने के समिति बनाई है।
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