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जिसका मजाक बनाया उसने LIFE चेंज कर दी, बेसहारों के लिए बनाया धांसू IDEA

लखनऊ: इंड‍ियन रोटी बैंक के संस्थापक व‍िक्रम पांडे ने कहा, स्टेशन पर म‍िली भूखी लड़की ने ये कार्य करने पर मजबूर कि‍या।

Dinesh Mishra | Last Modified - Jan 09, 2018, 11:41 AM IST

    • व‍िक्रम पांडेय।

      लखनऊ. घरों, होटलों और रेस्टोरेंट से बचे हुए खाने को कलेक्ट कर भूखों और बेसहारा लोगों को खाना ख‍िलाने की मुह‍िम का नाम है 'इंड‍ियन रोटी बैंक'। लखनऊ पहुंचे इंडियन रोटी बैंक के संस्थापक व‍िक्रम पांडे ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया, एक साल पहले यात्रा के दौरान रेलवे स्टेशन पर एक लड़की म‍िली थी। वो काफी भूखी थी। मैंने उसे खाना ख‍िलाया। इसके बाद मेरे मन में ये बात आई क‍ि पता नहीं क‍ितने ऐसे बेसहारा लोग होंगे, जो भूख से ब‍िलख रहे होंगे। फ‍िर मेरे द‍िमाग में रोटी बैंक बनाने का आइड‍िया, जो आज 'इंड‍ियन रोटी बैंक' के नाम से मशहूर हो गया। अब भूखों को खाना ख‍िलाना ही मेरा जुनून बन गया है। पहले मैंने उस लड़की का मजाक उड़ाया था...

      - विक्रम पांडे ने बताया, ''मैं हरदोई जिले का रहने वाला हूं। मेरे पिता पेशे से वकील हैं।''
      - ''मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीए पास किया, उसके बाद बिजनेस की प्लानिंग कर रहा था। 25 जनवरी 2016 को लखनऊ मेल में सेकेंड एसी का टिकट बुक कराया था। मुझे किसी काम से दिल्ली जाना था।
      जब हरदोई स्टेशन पर गाड़ी पहुंची, तो होम डिस्ट्रिक्ट होने के नाते मैं स्टेशन पर उतरकर घूमने लगा।''
      - ''मैं सिग्नल होने का इंतेजार कर रहा था। तभी एक लड़की आई और बोली- बाबूजी 10 रुपए दे दो। दुबली-पतली सी थी। मुझे लगा वो मांगने वाली है। मैंने इग्नोर कर दिया। क्योंकि अक्सर सुन रखा था कि ऐसे लोग सिर्फ बातों में उलझाते हैं और जान-बूझकर भीख मांगने वाले होते हैं।''
      - ''मैंने मजाकिये लहजे में पूछा, क्या करोगी पैसों का? वो बोली भूख लगी है, बाबूजी खाना चाहिए। फिर मैंने बोला- तो चलो खाना खिला दूं, लेकिन पैसे नहीं दूंगा।''
      - ''मैं स्टेशन से बाहर आकर उसे खाना खिलाया। वो बहुत भूखी थी। उसने बताया, उसने 2 दिन बाद खाना मिला है। मेरा मन भर आया था, क्योंकि मैंने उसका मजाक उड़ाया था। लेकिन वो मुझे आशीर्वाद देकर आगे चली गई।''
      - ''तब तक सिग्नल हुआ और मैं दिल्ली की ओर चल पड़ा। ट्रेन में बार-बार उस लड़की के शब्द और मेरे द्वारा किया गया मजाक सामने आ रहा था।''
      - ''बोगी में जब वेटर स्नैक्स आद‍ि पूछने के लिए आया तो मेरे मन में एक बात आई क‍ि मैं एसी गाड़ी में कम्बल और बेड पर आराम से खा पी रहा हूं। न जानें उस लड़की के जैसे और कितने लोग होंगे, जो भूखे ही रहते होंगे। उसी वक्त मैंने ऐसे लोगों के लिए कुछ करने का मन बना लिया, लेकिन प्लान नहीं था।''


      3 फरवरी को हरदोई से शुरू हुआ रोटी बैंक और बन गया 'इंडियन रोटी बैंक'
      - ''दिल्ली से वापस आकर मैंने कई लोगों से चर्चा की, लेकिन हर कोई मजाक समझकर टाल दे रहा था। कोई कहने लगा कि नेतागिरी छोड़कर नौकरी या बिजनेस पर ध्यान दो।''
      - ''लेकिन मेरे पापा ने कहा- कुछ भी करो, निस्वार्थ करो, तभी सक्सेस मिलेगी। बस उसी दिन 3 फरवरी 2016 से अपने 5 दोस्तों के साथ बैठकर प्लान बनाया और इसका नाम द‍िया 'रोटी बैंक'।''
      - ''जब मेरे जिले में ये प्लान सक्सेस हुआ तो इसे देश भर में खोलने का प्लान बनाया और आज सब 'इंडियन रोटी बैंक' के नाम से जानते हैं।''
      - विक्रम पांडे ने बताया, शुरुआत में हमारी कोर कमेटी कुल 6 दोस्तों की थी। कोर कमेटी में एमएससी, इंजीनियर, टीचर और प्रोफेसर शाम‍िल हैं।


      हरदोई में सप्ताह में 4 दिन मुफ्त भोजन, बाकी जिलों में 1 दिन
      - विक्रम पांडे ने कहा, ''हमारा कोई अकाउंट नहीं है। हम किसी से डोनेशन नहीं लेते हैं, क्योंकि जहां पैसा होगा, वहीं समस्या होगी। पैसों को हम दिक्कत नहीं मानते हैं, क्योंकि हर कोई कुछ करना चाहता है। मैं इसे पुण्य मानता हूं। शहरी गरीबों को विशेष ध्यान रखते हैं, लेकिन अब हम धीरे धीरे गांवों में जा रहे हैं।''
      - ''वर्तमान में हरदोई में सभी शहरी क्षेत्र के कस्बे पर 4 दिन मुफ्त खाना देते हैं। जब किसी भी जिले में नया खोलते हैं, तो हम सप्ताह में 1 दिन ही भोजन देते हैं।''
      - ''हम स्टाॅल लगाकर बांटते नहीं है, बल्कि जिसको देखते हैं कि वो भूखा है, उसे पूछकर देते हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के आसपास भूखे लोगों को चिन्हित करते हैं। फिर पूछकर भोजन के पैकेट देते हैं।''


      कलेक्शन सेंटर पूरे शहर में, पैकिंग होती है एक जगह पर
      - हर जिले में कलेक्शन सेंटर शहर में बहुत सारे होते हैं। इसके ल‍िए हम पूरे शहर में पर्चे बंटवाते हैं। अलग-अलग मोहल्ले में डिब्बे रख देते हैं, लेकिन पैकिंग सेंटर सिर्फ एक होता है। इसके ल‍िए इंड‍ियन रोटी बैंक के वॉलेंट‍ियर तैनात रहते हैं।
      - अचार, मिर्चा, प्याज, गुड़। ये सब रिटायर्ड अधिकारियों से लेते हैं, लेकिन पैसे नहीं लेते हैं। उनसे सिर्फ उनकी इच्छानुसार करने को कहते हैं।


      यूपी के 16 जिलों में चल रहा इंडियन रोटी बैंक
      -इस वक्त यूपी के 16 जिलों में इंडियन रोटी बैक चल रहा है। 1 स्टेट को-ऑर्डिनेटर, 1 मुख्य एडवाइजर, 1 महिला को-ऑर्डिनेटर होते हैं।
      -हरदौई, फरूखाबाद, सीतापुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, कानपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद, सहारनपुर, गोरखपुर, मुरादाबाद, लखीमपुर, बहराइच, उन्नाव में खुल चुके हैं। फरवरी में इलाहाबाद, वाराणसी में खोलने की तैयारी है।


      इन राज्यों में चालू है ये रोटी बैंक
      -जबलपुर , देवास (मध्य प्रदेश)
      -रायपुर ,कांकेर ( छत्तीसगढ़)
      -भजनपुरा (नई दिल्ली)
      -देहरादून (उत्तराखंड)
      -पलामू (झारखंड)
      -गुड़गांव (हरियाणा)
      -हैदराबाद (तेलंगाना)

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      इंड‍ियन रोटी बैंक में मह‍िलाएं पैक‍िंग का काम करती हैं।
    • जिसका मजाक बनाया उसने LIFE चेंज कर दी, बेसहारों के लिए बनाया धांसू IDEA
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      नए साल पर इंड‍ियन रोटी बैंक ने गरीबों को कंबल भी बांटे।
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