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101 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण से मोदी-मैक्रों का किया स्वागत, रामायण की चौपाइयां भी पढ़ी

मोदी और मैक्रों ने गंगा में बोट पर 3 किमी की दूरी चर्चा करते हुए तय की

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 01:10 AM IST
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गंगा सैर कराते हुए पीएम मोदी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गंगा सैर कराते हुए पीएम मोदी।

बनारस. भारत और फ्रांस के बीच तीन साल बाद एक बार फिर बोट डिप्लोमेसी की झलक देखने को मिली। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बनारस पहुंचे। यहां मोदी और मैक्रों ने गंगा में बोट पर तीन किमी की दूरी चर्चा करते हुए तय की। दोनों अस्सी घाट से नाव में बैठे और 3 किमी दूर दशाश्वमेध घाट पहुंचे। इस दूरी को तय करने में करीब आधे घंटे का वक्त लगा। मोदी ने मैक्रों को 30 घाटों पर रामाराज्य से लेकर भगवान बुद्ध तक के भारत की झलक दिखाई। उनके साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

- बनारस के घाटों पर मौजूद लोगों ने दोनों नेताओं का जोरदार स्वागत किया।

- वे हाथों में भारत और फ्रांस का झंडा लिए हुए थे। मैक्रों ने दशाश्वमेध घाट पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।

- तीन साल में मैक्रों दुनिया के दूसरे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिन्हें लेकर मोदी बनारस पहुंचे। इससे पहले वह दिसंबर 2015 में जापान के पीएम शिंजो आबे को लेकर बनारस गए थे।

40 स्कूलों के बच्चे भारत और फ्रांस के झंडे लेकर खड़े थे

- मैक्रों ने काशी में मोदी के साथ गंगा के घाटों पर इस प्राचीन शहर की धार्मिक-सांस्कृतिक और अाध्यात्मिक झलक देखी।

- तुलसीघाट पर लड़कियों ने उन्हें कुश्ती में धोबियापाट और पट दांव की कला दिखाई।

- साथ ही 30 घाटों पर 40 स्कूलों के 4000 से ज्यादा बच्चे भारत-फ्रांस का झंडा लेकर मोदी-मैक्रों के स्वागत में खड़े थे।

- अस्सी घाट पर रचना अग्रवाल फ्रेंच में मैक्रों से पूछा..कमातावु यानी आप कैसे हैं। यह सुनकर मैक्रों रुक गए, बोले- बोनजुर यानी मैं ठीक हूं।

- यहां बीएचयू के फाइन आर्ट विभाग के छात्रों ने मैक्रों और मोदी को गुलाब के फूल दिए और आरती की।

3 किमी तक गंगा की सैर कराई, 20 मिनट लगे

- वाराणसी में मोदी ने मैक्रों को गंगा की सैर कराई। दोनों अस्सी घाट से नाव में बैठे और 3 किमी चलने के बाद दशाश्वमेध घाट पहुंचे।

- इस दूरी को तय करने में करीब 20 मिनट का वक्त लगा।

- इससे पहले उन्होंने बड़ा लालपुर के दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल को देखा। बता दें कि जापान के पीएम शिंजो आबे के बाद मैक्रों वाराणसी आने वाले दूसरे राष्ट्राध्यक्ष हैं।

- जापान के पीएम शिंजो आबे ने यहां गंगा आरती भी की थी।

- मैक्रों ने यहां के नादेसर पैलेस में लंच किया था जिसमें बनारस के फेमस पकवान भी परोसे गए।

अस्सी घाट पर हर हर महादेव अस्सी घाट पर हर हर महादेव
तुलसी घाट पर तुलसी का ज्ञान तुलसी घाट पर तुलसी का ज्ञान

तुलसी घाट पर मोदी-मैक्रों का 50 फीट का कटआउट लगा था। यहीं पर तुलसी दास ने रामचरित मानस को लिखा था। वहां रामलीला के कलाकार आकर रामराज्य का मंचन कर रहे थे। 21 ब्राह्मण मानस की चौपाइयों को पढ़ रहे थे। 

महानिर्वाणी घाट पर सधुक्कड़ी परंपरा महानिर्वाणी घाट पर सधुक्कड़ी परंपरा

जानकी घाट पर 10 फीट के दो हनुमान जी के मुखौटे लगे थे। महानिर्वाणी घाट पर 100 साधु-संन्यासी अड़ी लगाकर साधना करते दिखे। केदार घाट पर वेदपाठी बटुकों ने झंडे के साथ मैक्रों का अभिवादन किया। छात्राएं फूलों की होली खेल रहीं थीं।

राणामहल घाट पर संगीत रस राणामहल घाट पर संगीत रस

राणामहल घाट पर 100 कलाकारों ने सितार, तबला, ढोलक, सरोद, शहनाई वादन कर मैक्रों को बता रहा थे कि ये काशी भारत रत्न बिस्मिल्ला खान, पंडित किशन महराज, गिरजा देवी, सितारा देवी की है। जिन्होंने दुनिया को संगीत दिया है।

चेतसिंह घाट पर बुद्ध दर्शन चेतसिंह घाट पर बुद्ध दर्शन

दश्वाश्वमेध घाट पर हिंदू-मुस्लिम पोस्टर लेकर स्वागत कर रहे थे। चेतसिंह घाट पर बुद्ध के ज्ञान उपदेश की झांकी सजाई गई थी। जिसमें भगवान बुद्ध शिष्यों को शांति का उपदेश दे रहे थे। तिब्बती पारंपरिक पोशाक में वाद्य यंत्र बजा रहे थे।