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कभी ठेले पर चाय-सैंडविच बेचते थे ये 2 इंजीनियर, ऐसे बन गए करोड़पति

यूपी के बरेली के रहने वाले अभिनव टंडन और प्रमित शर्मा ने हाईप्रोफाइल जॉब छोड़कर चाय का बिजनेस कर रहे हैं।

Danik Bhaskar | Feb 08, 2018, 05:34 PM IST
वाइफ के साथ चाय कॉलिंग के फाउंडर अभिनव टंडन। वाइफ के साथ चाय कॉलिंग के फाउंडर अभिनव टंडन।

लखनऊ. नरेंद्र मोदी के बयान के बाद पकौड़े पर पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। विरोध-प्रदर्शन के लिए लोग सड़कों पर पकौड़े तलकर बेच रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह भी कमेंटबाजी हो रही है कि जब चायवाला पीएम बन सकता है तो अब अगला मंत्री को पकौड़ेवाला ही होगा। पॉलिटिक्स के बीच पकौड़ा और चाय बेचने वालों का जमकर मजाक उड़ रहा है। इस मौके पर DainikBhaskar.com ऐसे दो दोस्तों के बारे में बता रहा है जो चाय बेचकर करोड़पति बन गए हैं।

1 लाख से शुरू किया बिजनेस, आज टर्नओवर 1 Cr से ज्यादा

- यूपी के बरेली के रहने वाले अभिनव टंडन और प्रमित शर्मा ने हाईप्रोफाइल जॉब छोड़कर चाय का बिजनेस कर रहे हैं। दोनों ने अपने स्टार्ट-अप 'चाय कॉलिंग' को 1 लाख रुपए से शुरू किया था। आज इनका सलाना टर्नओवर एक करोड़ रुपए से ज्यादा है।
- एक मॉडर्न चाय स्टॉल से ब्रांड बन चुके 'चाय कॉलिंग' के पूरे यूपी में 16 आउटलेट हैं। यहां पर 15 तरीके की चाय मिलती है। आप यहां 2 रुपए से लेकर 30 रुपए की चाय का आनंद ले सकते हैं। चाय के अलावा स्नैक्स भी मिलते हैं, जिनके रेट 5 रुपए से 30 रुपए तक हैं।"

ऐसे आया था IDEA

- प्रमित बताते हैं, "हम दोनों ने गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की है। कॉलेज डेज में हमें चाय पीने के लिए बाहर जाना पड़ता था। चाय की दुकानों पर काफी गंदगी रहती थी। इस वजह से कई बार हम बिना चाय पिए ही लौट जाते थे।"
- "यही प्रॉब्लम जॉब करते टाइम भी सामने आई थी। तब लगा क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि जिससे बिजेनस भी हो सके और लोगों को साफ-सुथरी चाय पीने को मिल सके। यह एक बड़ा रिस्क था, लेकिन हमने सोचा क्यों न खतरा मोल लिया जाए। अपनी सेविंग्स का कुछ पार्ट लगाकर हमने 'चाय कॉलिंग' का पहला आउटलेट खोला।''

25 हजार और 40 हजार रुपए की छोड़ी जॉब

 

- अभिनव टंडन के मुताबिक, ''इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो दिल्ली में क्रॉम्पटन फैन बनाने वाली कंपनी में क्वालिटी एनालिस्ट की पोस्ट पर कार्यरत थे। उस टाइम मुझे हर महीने 25 हजार रुपए की सैलरी मिलती थी। मैंने एक साल बाद जॉब छोड़ी दी।''
- ''प्रमित भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद टीसीएस कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। मेरी तरह उसने भी 1 साल बाद जॉब छोड़ दी। जॉब छोड़ने के टाइम प्रमित को 40 हजार की सैलरी मिलती थी।''

ठेले से हुई 'चाय कॉलिंग' की शुरुआत

 

- प्रमित बताते हैं, ''हम दोनों ने एक साथ 2013 में नोएडा में एक ठेले पर चाय बेचना शुरू किया। तब हम चाय के साथ सैंडविच बेचा करते थे। इस काम के लिए हम लोगों ने एक लड़के को रखा था। 6 महीने के अंदर लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा।''
- ''उसके बाद हम दोनों ने अपनी सेविंग में से 50-50 हजार रुपए मिलाकर 1 लाख रुपए में बरेली शहर में 'चाय कॉलिंग' नाम से अपना पहला आउटलेट ओपन किया, जहां चाय और सैंडविच दोनों बेचते थे।''
- ''धंधा चल पड़ा। छह महीने के अंदर ही ठेले से शुरू हुए बिजनेस को हमने एक बड़ी शॉप में कन्वर्ट कर दिया। हमने नोएडा सेक्टर-16 में अपनी चाय की पहली शॉप खोली। इसके बाद से हमने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।''
- ''आज चाय कॉलिंग एक कंपनी के रूप में कन्वर्ट हो गई है। 16 में से 10 आउटलेट्स पर 30 से ज्यादा का स्टाफ काम कर रहा है। उन्हें मिनिमम 6 से 12 हजार तक सैलरी दी जाती है।

शादी के टाइम आई थी काफी अड़चनें

 

- अभिनव बताते हैं, "हमारा चाय का बिजनेस है। बिजनेस थोड़ा चला तो घरवालों ने रिश्ते देखने शुरू कर दिए। कई रिश्ते सिर्फ चाय की वजह से टूट गए। जब भी लड़की वाले आते, मुझ से एक ही सवाल पूछा जाता था- 'अच्छा बेटा तुम काम क्या करते हो।' चाय के बिजेनस की बात सुनकर उन्हें लगता था इंजीनियंरिंग के बाद ऐसा क्यों कर रहा है लड़का।"
- "2017 में फाइनली मुझे ऐसी लड़की मिली, जिसने मेरे कॉन्सेप्ट को समझा और सराहा। आज हमारी शादी हो चुकी है।"
- "प्रमित की शादी में कोई दिक्कत नहीं आई। उसकी गर्लफ्रेंड के घरवाले आसानी से मान गए।"