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महाराष्ट्र के 'मकोका' कानून की तर्ज पर है UPCOCA, जानिए- इसकी बड़ी बातें

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में योगी सरकार इसे पेश करेगी। इससे पहले आज कैबिनेट में इसे पास किया गया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 13, 2017, 12:42 PM IST

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    ऑर्गेनाइज्ड क्राइम पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार 'यूपीकोका' लेकर आ रही है।

    लखनऊ. योगी कैबिनेट की बैठक में 'यूपीकोका' के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। विधानसभा के शीत सत्र में योगी सरकार यूपीकोका विधेयक लेकर आएगी। संगठित अपराध, माफिया और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए योगी सरकार ये कानून लेकर आ रही है। महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर बना है कानून


    - सीएम योगी ने सत्ता संभालने के बाद संगठित अपराध, माफियाओं पर शिकंजा कसने का आदेश दिया था। इसके बाद तत्कालीन गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने मुंबई, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में संगठित अपराध के लिए बनाए गए कानून के बारे में जानकारी जुटाई।

    -इन सभी राज्यों के कानून के आधार पर ही यूपी में यूपीकोका लाने की तैयारी हुई है। बताया जा रहा है कि इस कानून के तहत कम से कम तीन साल से लेकर उम्रकैद और फांसी की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा पांच से 25 लाख तक जुर्माने का प्रावधान करने की तैयारी है।

    - किसी भी व्यक्ति के ऊपर यूपीकोका आईजी और कमिश्नर की परमिशन के बाद ही लगाया जाएगा। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत भी बनाई जाएगी।

    - जांच के बाद चार्जशीट आईजी(जोन) की मंजूरी के बाद ही कोर्ट में पेश किए जाएंगे। मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई जाएगी। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम से बनाई गई प्रॉपर्टी को मामले की जांच के दौरान कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार जब्त किया जाएगा। आरोपी किसी भी हालत में अपनी प्रॉपर्टी का फायदा नहीं उठा पाएगा।

    -इस कानून के जरिए अपराधियों और नेताओं के नेक्सस पर भी लगाम कसी जाएगी। पुलिस और स्पेशल फोर्स को स्पेशल पावर दी जाएंगी। यूपी में इससे पहले संगठित अपराध पर कार्रवाई के लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स का गठन हुआ था।


    क्या है मकोका
    - साल 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) बनाया था। इसका मुख्य मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड क्राइम को खत्म करना था। 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागू कर दिया। फिलहाल महाराष्ट्र और दिल्ली में यह कानून लागू है।


    -इसके तहत संगठित अपराध जैसे अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपराधी, जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण, हत्या या हत्या की कोशिश, धमकी, उगाही सहित ऐसा कोई भी गैरकानूनी काम जिससे बड़े पैमाने पर पैसे बनाए जाते हैं, मामले शामिल है।


    सख्त है मकोका कानून
    - ‌मकोका लगने के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है। मकोका के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का वक्त मिल जाता है, जबकि आईपीसी के प्रावधानों के तहत यह समय सीमा सिर्फ 60 से 90 दिन की है। मकोका के तहत आरोपी की पुलिस रिमांड 30 दिन तक हो सकती है, जबकि आईपीसी के तहत यह अधिकतम 15 दिन की होती है।


    ऐसे लगता है किसी पर मकोका
    - किसी के खिलाफ मकोका लगाने से पहले पुलिस को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से मंजूरी लेनी होती है। इसमें किसी आरोपी के खिलाफ तभी मुकदमा दर्ज होगा, जब 10 साल के दौरान वह कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो।
    - संगठित अपराध में कम से कम दो लोग शामिल होने चाहिए। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एफआईआर के बाद चार्जशीट दाखिल की गई हो। अगर पुलिस 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।


    इतनी मिलती है सजा
    -मकोका कानून के तहत अधिकतम सजा फांसी की है। वहीं न्यूनतम पांच साल के जेल की सजा का प्रावधान है।

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