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मां ने कैंसर से जूझते हुए लड़ी पति के लिए 'जंग', बेटी ने IAS बन दिलाया इंसाफ

बचपन में पिता की हत्या और जवानी में मां की मौत का दर्द झेलते हुए IAS अफसर बनना बच्चों का खेल नहीं।

DanikBhaskar.com | Last Modified - Mar 07, 2018, 08:01 PM IST

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    लखनऊ. बचपन में पिता की हत्या और जवानी में मां की मौत का दर्द झेलते हुए IAS अफसर बनना बच्चों का खेल नहीं। लखनऊ की किंजल सिंह ने अपनी बहन प्रांजल के साथ मिलकर यह कारनामा किया था। इस वुमन्स डे, DainikBhaskar.com IAS किंजल सिंह की सक्सेस स्टोरी बता रहा है।

    मां ने पेश की थी मिसाल, तभी इतनी स्ट्रॉन्ग हैं किंजल

    - इन दिनों रेवेन्यू डिपार्टमेंट में स्पेशल सेक्रेटरी का पद संभाल रहीं किंजल सिंह ने हाल ही में अपनी मां से जुड़ा एक पोस्ट फेसबुक पर डाला। उन्होंने लिखा, "मेरी मां का जन्म एक औसत परिवार में हुआ था। उन दिनों लड़कियों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन मेरे नाना ने अपनी तीनों बेटियों को हायर एजुकेशन दिलाई। मां विभा के अंदर पढ़ाई का जज्बा काबिल-ए-तारीफ था। वो पोस्टग्रैजुएशन कंप्लीट करने के लिए हर रोज 16 किमी पैदल चलकर यूनिवर्सिटी जाती थीं।"
    - "मेरी मां भी IAS अफसर बनना चाहती थीं। स्टडीज के दौरान ही उन्हें टीबी हो गई। उन्होंने उस बीमारी से लड़ते हुए पीसीएस का एग्जाम दिया और सिलेक्ट हुईं। उनके जज्बे को देखकर मेरी मौसियों ने भी पीसीएस का एग्जाम क्लियर किया।"
    - "मां मुझसे कहती थीं, अगर उनके पास पढ़ाई के लिए आज जैसी सुविधाएं और कोचिंग होती तो वो जरूर IAS बनतीं। मुझे खुद पर नाज है कि मैंने उनका यह सपना पूरा किया।"

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    किंजल सिंह अपने पिता केपी सिंह की गोद में। साथ हैं उनकी मां विभा सिंह।

    गोंडा एनकाउंटर ने बिखेरी थी जिंदगी

    - साल 1982 का गोंडा एनकाउंटर आज भी चर्चाओं में रहता है। इस मुठभेड़ ने किंजल सिंह की पूरे परिवार को उलट-पलट कर दिया था।
    - किंजल ने एक इंटरव्यू में बताया, "मेरे पापा केपी सिंह यूपी पुलिस में डीएसपी थे। तब वे गोंडा में पोस्टेड थे। 12 मार्च 1982 को उन्हें खबर मिली कि माधवपुर गांव में कोई बड़ी क्रिमिनल एक्टिविटी होने वाली है। वे अपने साथियों के साथ बदमाशों का एनकाउंटर करने पहुंचे थे। वहीं उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। मीडिया को बताया गया कि कुछ डकैतों ने बम धमाका किया, जिसमें कुछ डकैतों के साथ मेरे पिताजी भी शहीद हो गए। लेकिन मेरी मां को यकीन था कि उन्हें डिपार्टमेंट के ही लोगों ने मारा है। एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी है। मेरी मां विभा सिंह ने हाई कोर्ट में अपील कर सीबीआई जांच की मांग की थी। घटना के लगभग चार साल बाद चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें 8 पुलिसवालों को आरोपी बनाया गया।"
    - "तब मैं महज ढाई महीने की थी और मेरी मां प्रेग्नेंट थीं। उन्होंने प्रेग्नेंसी के बावजूद केस लड़ा था।"
    - "हमारी मां हमें पापा की दिलेरी और ईमानदारी के बारे में बताती थीं। वो बताती थीं कि कैसे पापा के साथ बेइंसाफी हुई। तभी से मैंने ठान लिया था कि IPS से ऊपर वाली पोस्ट IAS हासिल कर अपने पिता को जस्टिस दिलाऊंगी।"

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    अपने हसबैंड अभय कुमार के साथ किंजल सिंह। पिता को इंसाफ मिलने के बाद इमोशनल हो गई थीं किंजल।

    फिर मां का छूटा साथ

    - किंजल सिंह की मां ने अकेले न सिर्फ अपनी दोनों बेटियों को संभाला, बल्कि बेस्ट एजुकेशन भी दी।
    - किंजल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रैजुएशन किया है।
    - पोस्ट ग्रैजुएशन के फर्स्ट ईयर में किंजल की मां विभा सिंह कैंसर के कारण चल बसीं। अब किंजल पर अपने साथ-साथ छोटी बहन की भी जिम्मेदारी थी।
    - दोनों बहनों ने ठान लिया कि अब हर हाल में यूपीएससी क्लीयर करना है। किंजल ने साल 2007 और प्रांजल ने 2008 में यह एग्जाम क्रैक किया।
    - किंजल टॉपर रहीं और IAS रैंक हासिल की, वहीं प्रांजल आईआरएस अफसर हैं।

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    प्रांजल सिंह आईआरएस अफसर हैं।

    फिर मिला इंसाफ

    - साल 2013 में सीबीआई कोर्ट ने गोंडा एनकाउंटर के 8 आरोपी पुलिस अफसरों में से तीन (आरबी सरोज, राम नायक पांडे और राम करण सिंह यादव) को डेथ सेंटेंस सुनाया और पांच (नसीम अहमद, रमाकांत दीक्षित, मंगला सिंह, परवेज हुसैन और राजेंद्र प्रसाद सिंह) को उम्र कैद की सजा दी गई।

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Web Title: IAS Officer Who Got Justice For Her Murdered Father After 31 Years Of Murder
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