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पिता थे आर्मी में मेजर, 12 साल तक घर में बंद रही बेटी-भीख मांगकर खाया खाना

सेना ने अंजना को सीएसडी कैंटीन में जॉब देने के बाद उसके घर की रिपेयरिंग कराने की बात कही है।

Dainik Bhaskar

Feb 18, 2018, 11:36 AM IST
Indian army helped ex army officer daughter anjana in lucknow

लखनऊ. मेजर पिता और मां की एक दुर्घटना में डेथ के बाद सदमें में 12 साल से एक ही घर में बंद रहने वाली बेटी अंजना की मदद के लिए सेना आगे आई है। सेना ने अंजना को लखनऊ के सीएसडी कैंटीन में जॉब देने के बाद उसके घर की रिपेयरिंग कराने की बात कही है। 12 साल तक अपने ही घर में रहे कैद...

बता दें कि अंजान के पिता इंडियन आर्मी में मेजर रहे फिर सचिवालय में अंडर सेक्रेटरी थे। लेकिन, एक कार एक्सीडेंट में अंजना के माता-पिता की मौत हो गई। इसके बाद अंजना ओर उसके भाई की मानसिक हालत खराब हो गई। इसके बाद दोनों 12 साल तक अपने ही घर में बंद रहे और भीख मांगकर अपना गुजारा करते रहे। अंजना ने DainikBhaskar.com से बात की और अपनी अनटोल्ड स्टोरी शेयर की।

पैरेंट्स की डेथ के बाद छोड़ दी पढ़ाई...

- अंजना बताती हैं- "हमारी फैमिली लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित शालीमार चौराहे के पास रहती थी। मेरे पिता बिपिन चंद्र भट्ट, इंडियन आर्मी के कुमाऊं रेजिमेंट में मेजर थे। रिटायरमेंट के बाद वो सचिवालय प्रोटोकॉल विभाग में अंडर सेक्रेटरी रहे।"

आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे माता-पिता के बाद अंजाना और उसके भाई के सामने भीख मांगने की नौबत आ गई....

Indian army helped ex army officer daughter anjana in lucknow

2004 में माता-पिता की मौत

 

- उन्होंन बताया- "तीन भाई-बहनों में मैं दूसरे नंबर पर हूं। 2004 में एक रोड एक्सीडेंट में मम्मी-पापा की डेथ हो गई। तब मैं 22 साल की थी। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी में एमए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया ही था, लेकिन उस हादसे के बाद मेरी पढ़ाई छूट गई।"

 

- "मां-पापा की मौत के बाद मेरी बड़ी बहन डिप्रेशन में चली गई थी। कुछ समय बाद उसकी भी डेथ हो गई। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। अपने तीन करीबियों को खोने के बाद मैंने और भाई ने खुद को अपने घर में कैद कर लिया।"

 

- "हम दोनों की लाइफ मानो वहीं थम-सी गई। बस गुमसुम घर में बैठे रहते थे। बाद में घर की बिजली-पानी की सप्लाई भी कट गई। घर भी खंडहर में तब्दील होने लगा। फिर हमारी जिंदगी में क्या हुआ, कुछ याद नहीं, जैसे मेमोरी से पिछले 12 साल डिलीट हो गए हों।"

 

Indian army helped ex army officer daughter anjana in lucknow

भूख मिटाने के लिए मांगी भीख

 

- अंजना का इलाज कर रहे डॉ. सुरेश धपोला ने बताया- "अगस्त 2016 में किसी ने अंजना और उसके भाई को रोते और भीख मांगते देखा था। उसने इसकी सूचना पुलिस को दी और पुलिस दोनों को 26 अगस्त 2016 को निर्वाण हॉस्पिटल ले आई। तब से दोनों यहीं हैं।''

 

- डॉ. सुरेश ने बताया- "जब ये दोनों मुझे पहली बार मिले थे, तब ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। सिर्फ रोते रहते थे। एक साल के ट्रीटमेंट के बाद इनकी स्थिति बेहतर हुई है।"

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अपने घर जाने की जिद करते हैं दोनों

 

- डॉक्टर बताते हैं-  "अब ये पूरी तरह बात करने लगे हैं। अंजना मुझसे कहती है कि अंकल, आप मुझे मेरे घर छोड़ दो, मुझे घर की याद आ रही है। वो मुझे घर ले जाकर बिस्किट खिलाने को भी कहती है। अभी दोनों का इलाज जारी है।"

 

- "ये दोनों सिर्फ घर जाने की रट लगाए हैं, लेकिन इनका घर अभी रहने की कंडीशन में नहीं है। मुझे डर है कि कहीं घर जाने पर दोनों को फिर से सदमा न लग जाए। इलाज अभी जारी है।"

Indian army helped ex army officer daughter anjana in lucknow

दोनों को है ये बीमारी

 

- डॉक्टर बताते हैं- ''अंजना और अरुण को सीजोफ्रेनिया नाम की बीमारी है। ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी के होने पर व्यक्ति की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है। वो ठीक से किसी को भी पहचान नहीं पाता।

 

- "वो असामान्य हरकतें करना शुरू कर देता है। उसे भीड़-भाड़ में जाने से डर लगता है। वो किसी पर हमला भी कर सकता है। यदि समय रहते इस बीमारी का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए तो पेशेंट ठीक हो सकता है।"

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जी रही है ऐसी लाइफ

 

- डॉक्टर के मुताबिक- "अंजना काफी हद तक ठीक हो चुकी है। आर्मी ने उसके बिहेवियर में इम्प्रूवमेंट देखते हुए उसे CSD कैंटीन में जॉब दी है और उसके घर की रिपेयरिंग के लिए आठ लाख रूपये देने की बाद भी कही है।"

 

- "लड़की को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने और बात करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उसे डांस भी सिखाया जाता है। उसने सायकिल चलाना भी सीख लिया है। वह अच्छी आवाज में गाना भी गाती है। अब वो बस जल्दी से ठीक होकर अपने घर जाना चाहती है।"

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