Hindi News »Uttar Pradesh »Lucknow »News» Indian Grappling Player Struggle Story

मां ने सिलाई करके-चंदा मांगकर भेजा खेलने, बेटी ने देश के लिए जीता गोल्ड

सबा बुतूल आब्दी ने नेपाल के काठमांडू में आयोजित साउथ एशियन ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।

DainikBHaskar.com | Last Modified - Jan 07, 2018, 10:05 AM IST

  • मां ने सिलाई करके-चंदा मांगकर भेजा खेलने, बेटी ने देश के लिए जीता गोल्ड
    +3और स्लाइड देखें
    सबा बुतूल आब्दी ने नेपाल के काठमांडू में आयोजित साउथ एशियन ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।

    लखनऊ. यूपी के रायबरेली जिले की रहने वाली सबा बुतूल आब्दी ने नेपाल के काठमांडू में आयोजित साउथ एशियन ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। सबा की मां ने सिलाई और चंदा मांगकर बेटी को इस मुकाम पर पहुंचाया। DainikBhaskar.com से बातचीत में सबा की मां ने बताया- बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए मैंने अपने पति तक को छोड़ दिया।

    बेटी को कामयाब बनाने के लिए मां करती है ये सब

    - सबा की मां नाहिद आब्दी कहती हैं, मेरे तीन बच्चे हैं। सबा भाई-बहनों में सबसे छोटी है। 11 साल पहले की बात है। पति नाहिद का बिजनेस अच्छा चल रहा था, मैं भी उसमें मदद करती थी। धीरे-धीरे हमने घर फिर 3 ट्रक खरीद लिए।

    - सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन पति को बच्चों का पढ़ना लिखना पसंद नहीं था। इसको देखते हुए मैंने बेटे को पढ़ने के लिए अलीगढ़ भेज दिया।

    - सबा बचपन से ही पढ़ाई और खेल कूद में अव्वल रही। पति को बेटी का भी स्कूल जाना और खेलना पसंद नहीं था। इसको लेकर हमारे बीच रोज लड़ाई झगड़ होने लगे। लेकिन मैंने कभी बेटी को खेलने से नहीं रोका।

    - बेटी का करियर बनाने के लिए आख‍िरकार मैंने पति को छोड़ दिया और बेट‍ियों को लेकर अलग रहने लगी।

    - पति से अलग होने के बाद मेरे सामने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने और घर चलाने के पैसे नहीं थे। फिर मैनें घर पर ही सिलाई-कढ़ाई शुरू की। मैं बेटी को कभी भी किसी चीज की कमी पूरी नहीं होने दूंगी।

    - बेटी की करियर की शुरुआत 19 जुलाई 2017 को हो गई थी, उस दिन उसका सिलेक्शन ग्रेपलिंग के नेशनल टीम में हुआ था। फतेहपुर के क्रिकेट खिलाड़ी और वर्तमान में ग्रेपलिंग गेम के कोच रविकांत मिश्रा ने बेटी को इस गेम के गुर सीखाए हैं। स्कूल से घर आने के बाद वह डेली 3 से 4 घंटे ग्रेपलिंग की प्रैक्ट‍िस करती है।

    - बेटी के खेल की फीस बहुत ही ज्यादा है। चाहकर भी पैसे का इंतजाम नहीं हो पाता। लोगों से चंदे जुटाकर और मदद मांगकर बेटी को खेलने के लिए बाहर भेजती हूं।

    - बेटे ने पढ़ाई पूरी कर दिल्ली के एक होटल में जॉब शुरू कर दी है। धीरे-धीरे वो भी हमारी मदद शुरू कर देगा। मैं अपनी बेटी को बड़ा लेबल का प्लेयर बनाना चाहती हूं।

    गोल्ड मेडल जीतने वाली प्लेयर ने कहा- कभी-कभी मन करता है छोड़ दूं खेलना

    - सबा ने 2016 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुई नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।

    - नेपाल के काठमांडू में 15 दिसम्बर से 17 दिसंबर तक हुई साउथ एशियन ग्रेपलिंग चैंपियनशिप में सबा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता।

    - सबा आगे ओलम्पिक में इंडिया की तरफ से खेलना चाहती हैं।

    - वह कहती हैं, मैं अपने देश का नाम रोशन करना चाहती हूं, इस मेरे पास पैसे की प्रॉब्लम है, इससे तैयारी भी प्रभावित होती है।

    - मां को पैसों के लिए परेशान होता देख कभी-कभी मन करता है गेम खेलना छोड़ दूं। लेकिन मुझे उसका सपना पूरा करना है। बस उन्हीं को देखकर मुझे हौंसला मिलता है। मेरे पापा ने इस सिर्फ ही मां और हम सबको छोड़, अब मैं उनके सामने खुद को साबित करके दिखाऊंगी।

    क्या होती है ग्रैपलिंग

    ग्रैपलिंग कुश्ती, जूडो, ताइकांडो से मिलता जुलता खेल है। इसमें 2 खिलाड़ियों के बीच मुकाबला होता है। इसमें दो खिलाड़ी गद्दों पर ठीक उसी तरह लड़ते हैं, जैसे कुश्ती या जूडो के खिलाड़ी। स्टैंड ग्रैपलिंग में हाथों की ग्रिप से मुकाबला लड़ा जाता है। ग्राउंड ग्रैपलिंग का मुकाबला फ्रीस्टाइल कुश्ती की तरह होता है।

  • मां ने सिलाई करके-चंदा मांगकर भेजा खेलने, बेटी ने देश के लिए जीता गोल्ड
    +3और स्लाइड देखें
    सबा कहती हैं, कहती हैं, मैं अपने देश का नाम रोशन करना चाहती हूं, इस मेरे पास पैसे की प्रॉब्लम है, इससे तैयारी भी प्रभावित होती है।
  • मां ने सिलाई करके-चंदा मांगकर भेजा खेलने, बेटी ने देश के लिए जीता गोल्ड
    +3और स्लाइड देखें
    सबा ने बताया, मां को पैसों के लिए परेशान होता देख कभी-कभी मन करता है गेम खेलना छोड़ दूं। लेकिन मुझे उसका सपना पूरा करना है।
  • मां ने सिलाई करके-चंदा मांगकर भेजा खेलने, बेटी ने देश के लिए जीता गोल्ड
    +3और स्लाइड देखें
    बा ने 2016 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुई नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Lucknow News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Indian Grappling Player Struggle Story
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×