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इन वजहों से कमजोर हुई कांग्रेस, एक्सपर्ट ने कहा- BJP ऐसे टक्कर दे पाना मुश्किल

28 दिसंबर, 1885 में कांग्रेस की स्थापना हुई थी।

आदित्य तिवारी | Last Modified - Dec 28, 2017, 01:26 PM IST

    • 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब था।

      लखनऊ. देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस का आज (गुरुवार) को 133वां स्थापना दिवस है। पार्टी कार्यकर्ता इस अवसर पर प्रदेश पार्टी मुख्यालय पर पार्टी की स्थापना दिवस का जश्न मना रहे हैं। यूपी को कांग्रेस का सबसे बड़ा सियासी गढ़ माना जाता है, साल दर साल यूपी में कांग्रेस कमजोर होती जा रही है। DainikBhaskar.com आपको बता रहा है कैसे कांग्रेस की पकड़ यूपी में कमजोर पड़ती गई।


      -1992 में बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के दौरान देश की सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी कांग्रेस के नेतृत्व कमजोर रहा और स्पष्ट रुख न होने के चलते समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव यूपी में मुसलमानों के बड़े नेता रूप में खुद को स्थापित करने में सफल रहे।
      -वहीं, कांग्रेस का यूथ विंग का शीर्ष नेतृत्व के कमजोर होने के नाते सपा की ओर चला गया जबकि दलित वर्ग यूपी की राजनैतिक क्षितिज पर सशख्त रूप से उभरे काशीराम और मायावती की नेतृत्व वाली पार्टी के संग हो चला। दूसरी तरफ राजनैतिक भागीदारी की छटपटाहट में ब्राह्मण वर्ग तेजी से उभर रही क्षेत्रीय पार्टियों की ओर तथा खुद को हिंदूवादी राष्ट्रवादी होने का दावा करने वाली भाजपा के साथ हो चला।
      -कांग्रेस के वर्षों की जमापूंजी (दलित, ओबीसी, मुसलमान और ब्राह्मण वोट बैंक) कई टुकड़ो में बंट गया। जिससे कांग्रेस में कमजोर पड़ती गई।

      विधानसभा चुनावों में साल दर साल कम होता गया जनाधार

      -साल 1985 विधानसभा चुनावों में 269 सीटें कांग्रेस जीती थी।
      -1989 में हुए चुनाव में कांग्रेस के पास 94 सीट थी।
      -1991 में 46 सीट।
      -1993 में 28 सीट कांग्रेस को मिली।
      -वहीं, 1996 में थोड़ा सुधार हुआ तो 33 सीट मिली।
      -2002 में 25 सीटों पर ही कांग्रेस को संतोष करना पड़ा।
      -फिर 2007 में कांग्रेस को 22 सीट मिली।
      -2012 में 29 सीट मिलीं।
      -2017 में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और केलव 7 सीटें मिलीं।

      NSUI का कमजोर होना, चुनाव कराने का प्रयोग हुआ फेल

      -कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2000 में उपाध्यक्ष बनने से पहले NSUI में नियुक्त करने की बजाय चुनाव प्रक्रिया शुरू कर की थी।
      -यह प्रयोग कांग्रेस दल की सबसे बड़ी रीढ़ माना जाने वाला NSUI को और कमजोर कर गया, इसके बाद यूपी में कभी यह संगठन सड़क पर प्रदर्शन और संघर्ष करते हुए नहीं देखा गया।
      -भारत की सबसे पुरानी छात्र संगठन NSUI के 46वां स्थापना दिवस है पर राहुल गांधी ने कहा था- "केंद्रीय नेतृत्व NSUI को मजबूत करे क्योंकि NSUI मजबूत होगी तो कांग्रेस खुद मजबूत हो जायेगी।"

      कांग्रेस दलित से दूर हुई तो पैदा हुई बीएसपी


      -2017 के विधान सभा चुनाव में दलित वोटों के लिए काफी संघर्ष किया जिसके बाद उन्होंने सपा के साथ गठबंधन किया। दलित बाहुल्य 66 जिलों की 85 आरक्षित विधानसभाओं में यात्रा की गई जिसमे यहां के दलितों के लिए कांग्रेस ने वादा किया था।

      क्या कहना है वरिष्ठ नेताओं का


      -कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश चेयरमैन रहे के भगवती चौधरी ने बताया- "प्रदेश में बीएसपी इसलिए पैदा हुई क्योंकि कांग्रेस दलितों से दूर करने के लिए लोक लुभावन वादे किये थे।"
      -कांग्रेस मुख्यधारा की पार्टी है। दलित के साथ कांग्रेस हमेशा रही और दलित भी जानता हैं उनका हित कांग्रेस के साथ ही है।
      -अब राहुल गांधी की मंशा है कि दलित नेतृत्व आगे आए और राजनीति, सरकार हर जगह शामिल हो, कांग्रेस पार्टी बाबू जगजीवन राम के बाद उसी कद का बड़ा नेता तैयार कर रही है।

      कांग्रेस से आखिर क्यों दूर हुए ब्राह्मण

      -उत्तर प्रदेश की सियासत में सभी राजनीतिक दलों की ब्राह्मणों के 14 फीसदी वोटों पर नजर है। उत्तर प्रदेश के अंतिम ब्राह्मण मुख्यमंत्री एनडी तिवारी थे जो बाद में उत्तराखंड के भी मुख्यमंत्री बने।
      -फिलहाल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस शासन के बाद पिछले 27 सालों में ब्राह्मण वोट बीजेपी, बीएसपी और बाकी दलों में बंटते रहे हैं।

      कांग्रेस प्रवक्ता अमर नाथ अग्रवाल का कहना है- "कांग्रेस ने कभी विचारधारा नहीं बदली आज भी सभी वर्ग के लोगों को विश्वास कायम है। जो भी कांग्रेस से दूर उनको भी मालूम हो गया हैं कि कांग्रेस में ही सभी का हित हैं। इसका जीता जागता उदाहरण कांग्रेस का गुजरात में प्रदर्शन है।"

      क्या कहना है एक्सपर्ट का


      -पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर पत्रकार उदय सिन्हा कहते हैं- "जब तक क्षेत्रीय पार्टियों के विचार धारा को कांग्रेस टक्कर नहीं देगी तब तक कांग्रेस का दोबारा वापस आना और भाजपा को टक्कर दे पाना मुश्किल है।"

      पार्टी कार्यालय में मनाया गया स्थापना दिवस

      -प्रदेश पार्टी कार्यालय में कांग्रेस का स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को कांग्रेस के संविधान के अनुसार काम करते देश सेवा करने की शपथ दिलाई गई।

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