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गीता का उर्दू अनुवाद कर आए थे चर्चा में, पढ़ें अनवर जलालपुरी के नगमें

उर्दू शायर अनवर जलालपुरी का दिल का दौरा पड़ने के कारण मंगलवार सुबह करीब 10 बजे केजीएमयू में निधन हो गया।

Dainik Bhaskar

Jan 02, 2018, 01:53 PM IST
Anwar Jalalpuri Urdu Shayari special story

लखनऊ. उर्दू शायर अनवर जलालपुरी का कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ने के कारण मंगलवार सुबह करीब 10 बजे केजीएमयू (किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) में निधन हो गया। वो अंबेडकर नगर जिले के जलालपुर कस्बे से संबंध रखते हैं। सारी दुनिया उन्हें मुशायरों के संचालक के तौर पर पहचानती है। साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन हमेशा से उनके स्वभाव में रहा। उन्होंने ग्रैजुएशन का फॉर्म भरते समय अंग्रेजी, उर्दू और अरबी लिटरेचर भर दिया। उन्होंने इस्लाम को पढ़ने के साथ-साथ हिंदू धर्म की कई किताबें भी पढ़ीं।

गीता और टैगोर की 'गीतांजलि' का किया उर्दू में अनुवाद
- देश के मशहूर शायर अनवर जलालपुरी ने गीता के बाद उमर कय्याम की 72 रुबाइयों और टैगोर की गीतांजलि का भी उर्दू में अनुवाद किया।
- वो अपनी शायरी के माध्यम से समाज को हमेशा बड़े पैगाम देने की कोशिश करते रहते हैं। नई पीढ़ी के लिए उनकी शायरी किसी टीचर की तरह राह दिखाती है।
- वो हर वक्त एक ऐसी दुनिया का ख्वाब देखते हैं, जिसमें जुल्म, ज्यादती की कोई जगह नहीं है।

कुरान पढ़ी है हिंदू धर्म की किताबें भी क्यों न पढ़ ली जाएं
- वो कहते थे- ''छात्र जीवन से उनके दिमाग में एक बात बैठी हुई थी कि कुरान तो पढ़ी ही है, फिर हिंदू धर्म की किताबें भी क्यों न पढ़ ली जाएं।''
- उसके बाद उन्होंने गीता, रामायण और उपनिषदों का अध्ययन किया। उनके मुताबिक, "मेरे दिमाग में सन 1983 के आसपास उन्हें गीता का अध्ययन करते समय लगा कि इसकी तो तमाम बातें कुरान और हदीसों से मिलती-जुलती हैं।''
- ''जब मैंने काम शुरू किया तो ये इतना विस्तृत विषय हो गया कि मैंने सोचा कि मैं ये काम कर नहीं पाऊंगा। मैं चूंकि शायर हूं, इसलिए मैंने सोचा कि अगर मैं पूरी गीता को शायरी बना दूं, तो ये ज्यादा अहम काम होगा।"

जहां से पढ़े, वहीं इंग्लिश के लेक्चरर अप्वाइंट हुए
- अवनर जलालपुरी मूलत अंबेडकरनगर के जलालपुर कस्बे के दलाल टोला मोहल्ले के रहने वाले थे। उनका जन्म 6 जुलाई 1947 को एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था।
- प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने मकतब करामतिया दारुल फैज से प्राप्त की। इसके बाद इंटर तक की शिक्षा नरेंद्र देव इंटर कॉलेज जलालपुर से लेने के बाद शिबली डिग्री कॉलेज आजमगढ़ से ग्रैजुएशन किया।
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उन्होंने पोस्ट ग्रैजुएट की डिग्री ली। पीएचडी की डिग्री भी लेने वाले अनवर 19 जुलाई 1973 को नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में ही अंग्रेजी प्रवक्ता के रूप नियुक्त हुए थे।
- पढ़ाने के साथ-साथ लेखन, शेरो-शायरी और मंच संचालन में अधिक रुचि होने के कारण देश ही नहीं विदेशों में भी उन्होंने खूब नाम कमाया।

लखनऊ और जलालपुर में लगी चाहने वालों की भीड़
- अनवर जलालपुरी के निधन की खबर मिलते ही लखनऊ के हुसैनगंज स्थित उनके आवास पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई।
- उधर, जलालपुर स्थित उनके पैतृक आवास पर भी लोग शोक जताने पहुंचे।

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