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हॉर्स राइड‍िंग के शौकीन हो जाएं सावधान, हो सकती है ये लाइलाज बीमारी

लखनऊ: घोड़े की प्रजाति के जानवरों में फैलने वाली इस बीमारी का नाम 'ग्लैंडर्स' है। यह बीमारी लाइलाज है।

Dainik Bhaskar

Jan 01, 2018, 07:02 AM IST
glanders disease of horse harmful for horse riders

लखनऊ. अगर आप हॉर्स राइड‍िंग (घुड़सवारी) के शौकीन हैं तो अलर्ट रहने की जरूरत है। घोड़ों में एक ऐसी बीमारी फैल रही है, जो लाइलाज है। डॉक्टरों के अनुसार, घोड़ों से ये बीमारी उसके सवारों या पालकों को भी हो सकती है। अभी इस बीमारी की कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है। इससे ग्रसित घोड़ों को जहर का इंजेक्शन देकर मारने का काम पशुपालन विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसको लेकर अभियान चलाकर इस बीमारी से ग्रसित जानवरों को चिन्हित किया जा रहा है। आगे पढ़‍िए कौन सी है ये बीमारी और क्या कहते हैं डॉक्टर्स...

(आगे की स्लाइड्स में इन्फो के जर‍िये पढ़‍िए इस बीमारी के बारे में और इसके लक्षण)

-पशुपालन विभाग के डायरेक्टर (डिजीज कंट्रोल) डॉ. एएन सिंह ने बताया, घोड़े की प्रजाति के जानवरों में फैलने वाली इस बीमारी का नाम 'ग्लैंडर्स' है। यह बीमारी लाइलाज है।

-अभी तक मेडिकल साइंस इसकी दवा नहीं बना सका है। इस बीमारी की चपेट में न केवल पशु, बल्कि‍ इंसान भी आ सकते हैं, जो उसके संपर्क में रहते हैं।

-ग्लैंडर्स से ग्रसित पशुओं के चिन्हीकरण के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। इस बीमारी से सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन डरने की आवश्यकता नहीं है।

-यह रेयर अश्व प्रजाति के पशुओं में मिलता है। हालांक‍ि, चिंताजनक बात यह है कि ये बीमारी लाइलाज है। इसके संक्रमण वाले अब तक 235 पशुओं को चिन्हित किया जा चुका है जिनमें 185 जानवरों को मारा जा चुका है।

-उन्होंने बताया, हर जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को टारगेट दिया गया है, उन्हें प्रति महीने अपने जिले से 20 अश्व प्रजाति के बीमार जानवरों के सैम्पल राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार, हरियाणा भेजने होते हैं। वहां टेस्ट के बाद यह बात कन्फर्म हो पाती है कि किस जानवर के सैम्पल में इस बीमारी के लक्षण मिले हैं।

अब तक 235 जानवरों में मिल चुके हैं इस बीमारी के लक्षण
-एएन सिंह ने बताया, पूरे यूपी में अब तक 235 जानवरों में इस लाइलाज बीमारी के लक्षण मिल चुके हैं। इन जानवरों को संबंधित जिलों के जिलाधिकारी की परमीशन लेकर इंजेक्शन देकर मारा जा रहा है।

-उसके बाद उन्हें जमीन में कम से कम 7 फीट गहराई के गड्ढे में दफनाया जा रहा है जिससे इस बीमारी के बैक्टीरिया फैलने न पाएं।

-इस बीमारी के बैक्टीरिया को फैलने का खतरा देखते हुए इसको लेकर काफी सतर्कता बरती जा रही है। इस बीमारी से ग्रसित जानवरों से इसके बैक्टीरिया मनुष्यों में भी फैल सकते हैं।

पशुपालकों को मिलेगा मुआवजा
-पशुपालन विभाग की ओर से ग्लैंडर्स से पीड़ित जिन घोड़ों और खच्चरों को डेथ इंजेक्शन दिया जाएगा, उनके पालकों को विभाग की तरफ से निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा।

-घोड़े के लिए 25 हजार और खच्चर की हत्या पर 16 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाएगी।

साल 2000 में मिला था इंसानों में अंतिम केस
-वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अनूप शुक्ला ने बताया, घोड़ों, खच्चरों और गधों से इंसानों में यह जानलेवा बीमारी आ सकती है, इसको लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

-हालांक‍ि, पशुओं में इसके जीवाणुओं की संख्या कम होती है और वह इंसानों में जल्दी संक्रमण नहीं कर सकते। इंसानों में ऐसा केस अंतिम बार साल 2000 में अमेरिका में मिला था।

-शुरुआत में यहां यह बीमारी वेस्ट यूपी और दिल्ली एनसीआर में शुरू हुई थी, लेकिन हाल ही में इस बीमारी से ग्रसित जानवर पूर्वांचल में भी मिलने से हड़कंप मच गया है जो घोड़े, खच्चर, गधे आदि में फैल रही है।

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