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ट्रेन से नीचे फेंक दी गई थी ये लड़की, रातभर जख्म को कुतरते रहे थे चूहे

लखनऊ. फेमस वालीबॉल प्लेयर और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को अब रेलवे 7 लाख 20 हजार रुपए मुआवजा देगा।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 11:18 AM IST
फेमस वॉलीबॉल प्लेयर और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को रेलवे अब करीब 7 लाख रुपए मुआवजा देगा। फेमस वॉलीबॉल प्लेयर और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को रेलवे अब करीब 7 लाख रुपए मुआवजा देगा।

लखनऊ. फेमस वॉलीबॉल प्लेयर और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को अब रेलवे 7 लाख 20 हजार रुपए मुआवजा देगा। रेलवे क्लेक्स ट्र‍िबुनल लखनऊ बेंच ने रेलवे को मुआवजा देने का आदेश दिया है। DainikBhaskar.com आपको उस हादसे के बारे में बताने जा रहा है जिस कारण रेलवे अरुणि‍मा को ये कम्पंशेसन देने जा रहा है।


ट्रेन से फेंक दी गई थी ये लड़की, चूहे कुतर रहे थे कटा पैर...

- यूपी के अंबेडकर नगर में जन्मी अरुणिमा सिन्हा नेशनल वॉलीबॉल टीम का हिस्सा थीं। 12 अप्रैल 2011 को वो एक स्पोर्ट्स इवेंट के लिए दिल्ली जा रही थीं। उस समय वो 24 साल की थीं।
- लखनऊ से अरुणि‍मा पद्मावती एक्सप्रेस में बैठीं। उन्होंने गले में गोल्ड चेन पहनी थी, जिसे ट्रेन में बैठे कुछ बदमाशों ने खींचने की कोशिश की।
- अरुणिमा ने विरोध किया तो बदमाश हाथापाई पर उतारू हो गए। कंपार्टमेंट में कई लोग बैठे थे, लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की। चेन छीनने में नाकाम रहे बदमाशों ने धनेती स्टेशन के पास प्लेयर को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया।
- वह कहती हैं, ''जिस वक्त मुझे ट्रेन से फेंका गया, उस समय दूसरे ट्रैक पर एक और ट्रेन आ रही थी। मैं उस ट्रेन से टकराई और नीचे गिर गई। मैं ट्रैक पर पड़ी थी।''
- कुछ देर बाद मैंने दोनों हाथ के सहारे उठने की कोशिश की, लेकिन उठ नहीं पाई। पीछे पलटकर देखा तो मेरा एक पैर जींस से निकलकर कटा पड़ा था और दूसरे की हड्डियां बिखरी पड़ी थीं।"
- "आसपास अंधेरा था। मैं दर्द से चिल्ला रही थी, लेकिन कोई मेरी मदद के लिए नहीं आया। कुछ देर बाद चूहे मेरे कटे हुए पैर को कुतरने लगे। थोड़ी देर बाद मुझे दिखना भी बंद हो गया। सिर्फ ट्रेन गुजरने के वाइब्रेशन महसूस हो रहे थे।''
- ''करीब 7 घंटे तक कटे पैर के साथ रेलवे ट्रैक पर पड़ी रही। मेरे आसपास से 49 ट्रेनें अप-डाउन हुई थीं।"

जब डॉक्टर से अरुणि‍मा ने कही थी ये बात
- वह कहती हैं, ''दूसरे दिन सुबह 13 अप्रैल को गांववालों ने मुझे बरेली के जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। मेरी हालत देख सरकारी डॉक्टर्स भी घबरा गए थे।
- 2014 में हुए एक प्रोग्राम में अरुणि‍मा ने बताया था, "मैं हिल नहीं पा रही थी, लेकिन ब्रेन पूरी तरह कॉन्शियस था। डॉक्टर्स की बातें मुझे सुनाई दे रही थीं। वो कह रहे थे- एनेस्थीशिया नहीं है, ब्लड नहीं है, इसका इलाज कैसे करें?"
- "मैंने उनसे कहा- पूरी ट्रेन मेरे पैर पर से निकल चुकी है। उससे ज्यादा दर्दनाक कुछ नहीं हो सकता। आप बिना एनेस्थीशिया के ही मेरी सर्जरी कीजिए। मेरी बातों से उन्हें भी हिम्मत आई। दो फार्मासिस्ट ने मुझे ब्लड डोनेट किया और फिर डॉक्टर्स ने बचे हुए पैर को काटकर अलग कर दिया।"
- ''बरेली जिला अस्पताल के बाद लखनऊ के केजीएमयू में शिफ्ट किया गया। फिर वहां से दिल्ली के एम्स रेफर किया गया, जहां मैं 4 महीने हॉस्पिटल में एडमिट रही।''

...तो इसलिए पर्वतारोही बनीं अरुणिमा
- 2014 में कुछ मीडि‍या रिपोर्ट में छपा- अरुणिमा बिना टिकट के ट्रेवल कर रही थीं, इसलिए कूद गईं। जब उनकी फैमिली ने इसका खंडन किया तो खबरें आईं कि अरुणि‍मा सुसाइड करना चाहती थीं, इसलिए ऐसा किया।
- जब हर तरफ हादसे को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही थीं, तब अरुणिमा के दिमाग में सभी आलोचकों को करारा जवाब देने की प्लानिंग चल रही थी।
- दोनों पैर खराब होने के बावजूद उन्होंने माउंटेनियर बनने की ठानी। उन्होंने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली पहली महिला बचेंद्री पाल की मदद और अपने जज्बे से यह कारनामा किया।
- अब तक वो एवरेस्ट (एशिया) (मई, 2013), किलिमंजारो (अफ्रीका) (मई, 2014), एल्ब्रस (यूरोप) (जुलाई, 2014), कोसीउज्को (ऑस्ट्रेलिया) (अप्रैल, 2015), एकॉन्कागुआ (अर्जेंटीना) (दिसंबर, 2015) और कार्सटेन्स्ज पिरामिड (इंडोनेशिया) (जुलाई, 2016) की चोटी पर तिरंगा लहरा चुकी हैं।