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देश के लोग राष्ट्रगान गाने से मना कर दें, तो क्या होगा...ये अधिकार है?

लखनऊ की रहने वाली शालीन मिश्रा ने PCS (J) 2016 में 99वीं रैंक हासिल की।

उज्ज्वल सिंह | Last Modified - Dec 17, 2017, 11:21 AM IST

    • लखनऊ. यूपी लोक सेवा आयोग की तरफ से आयोजित PCS (J) 2016 का रिजल्ट बीते दिनों घोषित किया गया। लखनऊ की रहने वाली शालीन मिश्रा ने 99वीं रैंक हासिल की। उन्होंने फर्स्ट अटेंप्ट में एग्जाम क्वालीफाई किया।DainikBhaskar.com से बातचीत में शालीन ने इंटरव्यू में पूछे गए सवालों और उनके दिए जवाब शेयर किए।

       

      सवाल- अगर देश के लोग राष्ट्रगान गाने से मना कर दें, तो क्या होगा? उनके पास ये अधिकार है?

      जवाब- जी नहीं ये बात संविधान में है कि हमें राष्ट्रगान का सम्मान करना है। राष्ट्रगान कहीं बज रहा है तो हमें खड़े होना है। ये हमारी फंडामेंटल ड्यूटी है।
       
      अपने यूनिवर्सिटी की गोल्ड मेडलिस्ट हैं शालीन
      - शालीन के पिता पवन मिश्रा आर्कीटेक्ट हैं। शालीन एक भाई-एक बहन हैं। भाई यति मिश्रा बीटेक कर रहा है। उनकी मां शिक्षा विभाग में जॉब करती हैं। शालीन बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थी।
      - उन्होंने हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की पढ़ाई लखनऊ से ही की है। इंटरमीडिएट के बाद वो लॉ करने के लिए चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटना चली गई। वहां से शालीन ने 2016 में बीए एलएलबी ऑनर्स किया।
      - बीए एलएलबी ऑनर्स में शालीन ने यूनिवर्सिटी में टॉप किया। इसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल मिला। उसी समय यूपीपीसीएस-जे की वैकेंसी आ गई। शालीन ने भी उसमें अप्लाई किया और पहले ही प्रयास में सिलेक्ट हो गईं। उन्हें 75वीं रैंक मिली है।

       

      डिबेट में भी अव्वल रही हैं शालीन
      - शालीन अपने कॉलेज की ओर से डिबेट्स में भी पार्टि‍सिपेट करती थीं। शालीन ने कई बार अलग-अलग स्टेट्स में जाकर अपने कॉलेज के लिए प्राइज जीता है।
      - वो कहती हैं- ''किसी के हक की लड़ाई लड़ना बचपन से ही मेरी ख्वाहिश रही है। इस टॉपिक पर डिबेट करना ही मेरी पहली पसंद होती थी।''

       

      परिवार की इकलौती अफसर हैं शालीन
      - "पापा और मम्मी दोनों ही वेल एजूकेटेड थे। ऐसे में परिवार में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल अच्छा था। शुरू से ही घर वाले हम भाई-बहन को प्रमोट करते थे कि आगे चलकर अफसर बनना है।''
      - ''लॉ की फील्ड एकदम नई थी। लेकिन पापा की पहली पसंद ज्यूडिशियरी जॉब ही थी। इसलिए उसी फील्ड में जाना ठीक समझा। जब मुझे लॉ में गोल्ड मेडल मिला, तब पापा ने कहा था कि आज मेरा आधा सपना पूरा हो गया। अब मैं आश्वस्त हूं कि मेरी जो तमन्ना है वो जरूर पूरी होगी।''
      - ''उस समय एक दबाव था कि मुझसे पापा-परिवार का सपना जुड़ा हुआ है। मैंने मेहनत से पढ़ाई की और मेरी मेहनत सफल रही, मैं पहले ही प्रयास में सिलेक्ट हो गई।"    

       

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