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इस लेडी के अपनों ने कहा था- इसे खत्म कर दो, आज बनी है मिसाल

डॉ. शकुन्तला मिश्रा नेशनल रिहेबिलेटेशन यूनिवर्सिटी में साईन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की पोस्ट पर रजनी चौहान है।

आदित्य मिश्रा | Last Modified - Dec 06, 2017, 12:11 PM IST

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    राजधानी की रजनी चौहान दिव्यांग बच्चों को साईन लैंग्वेज पढ़ाती है। (फाइल)

    लखनऊ.राजधानी के डॉ. शकुन्तला मिश्रा नेशनल रिहेबिलेटेशन यूनिवर्सिटी में साईन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की पोस्ट पर रजनी चौहान कार्यरत है। वह दिव्यांग बच्चों को साईन लैंग्वेज पढ़ाती है। उन्होंने महिंद्रा कोचिंग के साथ एक एमओयू साईन किया है। इसके तहत वह पूरे देश में पहली बार उन बच्चों को कम्पटीशन की प्र‍िप्रेशन करा रही हैं। ये देश के मानव संसाधन मंत्री (एचआरडी) प्रकाश जावडेकर से लेकर यूपी के राज्यपाल राम नाईक सहित कई बड़ी हस्तियों के प्रोग्राम में बतौर इंटरप्रेटर परफार्म कर चुकी है। रजनी ने DainikBhaskar.comसे बात करते हुए अपना लाइफ एक्स्पिरियेंसेज शेयर किया है।

    मां ने बचपन में ऐसे बचाई थी जान...

    - रजनी ने बताया, ''मेरा जन्म 1 जुलाई 1991 फतेहगढ़ के आर्मी हॉस्पिटल में हुआ था। पापा उदयवीर सिंह चौहान आर्मी से रिटायर और मां सुमन हाउस वाइफ है। मुझसे बड़े 2 भाई है। बड़े भाई आर्मी में ऑफिसर और दूसरे भाई शेयर मार्केट का बिजनेस करते है।''
    - ''मेरे पैरेंट्स ने दिव्यांग होने के बावजूद कभी भी भेदभाव नहीं किया। दोनों भाइयों की तरह मेरी भी परवरिश की। मेरे जन्म के डेढ़ महीने बाद मेरे एक पैर में पोलियो हो गया था, जिसके कारण मेरा पैर काम करना बंद कर दिया था। पापा की पोस्टिंग दूसरे शहर में थी।''
    - ''मेरी मां घर पर अकेली थी। वह बहुत ज्यादा उदास और परेशान थी। उसे परेशान देखकर मेरे बाबा ने मां से कहा था- 'बेटी को खत्म कर दो' लेकिन मेरी मां राजी नहीं हुई थी।''
    - ''मुझें लेकर वह फर्रुखाबाद चली गई और वहां पर मेरा इलाज कराया। उसके बाद ही मेरी जान बच पाई। शुरू में मैं कैलिपर के सहारे चलती थी लेकिन अब खुद से बिना किसी के सहारे के चल लेती हूं।''

    ये है उपलब्धियां
    - ''मैंने 2014 में पहली बार लखनऊ के बालागंज स्थित गुरु कौशलेन्द्र कुमार यादव, शैफाली सिंह और रीना यादव के साथ मिलकर साइन लैंग्वेज की शुरुआत की। मैंने अपने एनजीओ सम्पूर्ण समर्पण फॉउडेशन और म‍हेंद्रा कोचिंग के साथ एमओयू साईन किया है। इसके तहत पूरे देश में पहली बार उन बच्चों को कम्पटीशन की प्रिप्रेशन करा रही हूं। जो बच्चे बोल सुन नहीं पाते है।''
    - ''मेरे पढ़ाए 2-3 बच्चे गवर्नमेंट जॉब के लिए सेलेक्ट भी हो चुके है। मैंने 2015 में दिव्यांग बच्चों के लिए फैजाबाद में चेस कम्पटीशन भी करवाया था।''
    - ''2017 में ही मेरा सेलेक्शन 'हेल्थ द ब्लाइंड' फाउंडेशन में वालंटियर के तौर पर हुआ है। इसका ऑफिस चेन्नई में है, ये हांगकांग और सिंगापुर से एफ‍िलेटेड है। यूपी से 2 लोगों का इसमें सेलेक्शन हुआ है।''
    - ''जिसमें लखनऊ से मैं अकेली हूं। इसके तहत मैं ब्लाइंड बच्चों के लिए स्कालरशिप प्रोवाइड कराती हूं, ताकि ब्लाइंड बच्चे बिना किसी रुकावट के पढ़ाई कर सके।''

    ऐसे बन गई गेस्ट फैकल्टी
    - ''2014 में डॉ. शकुन्तला मिश्रा यूनिवर्सिटी में साईन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की जॉब निकली थी। जिसका मैंने इंटरव्यू दिया और मेरा सेलेक्शन हो गया। तब से आज तक मैं वहां पर कामर्स डिपार्टमेंट में साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर के तौर पर कार्य आकर रही हूं।
    - मेरी शादी अभी नहीं हुई हूं। मैं अपने खानदान की अकेली ऐसी लड़की हूं। जो घर से बाहर निकलकर काम कर रही है। मुझें देखकर मेरी और छोटी बहनें घर से बाहर निकलने लगी हैं।''
    - ''मेरी बहनें मेरी मिसाल देती है। मुझे गर्व होता है जब लोग मुझें दिखाकर कहते है वो देखे चौहान साहब की बेटी जा रही है। मैं दिव्यांग होने के बावजूद रोज कॉलेज पढ़ाने जाती हूं।''
    - ''वहां से आने के बाद शाम को कम्पटेटिव एग्जाम की तैयारी करने वाले बच्चों को पढ़ाती हूं, मैं रोज 14-15 घंटे काम करती हूं। मेरी ख्वाहिश है कि दिव्यांगों कि लिए सरकार इंटरप्रेटर की कमी दूर करे।''

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    रजनी महिंद्रा कोचिंग में उन बच्चों को कोचिंग करवा रही है। जो बोल और सुन नहीं सकते हैं। (फाइल)
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    रजनी यूपी के राज्यपाल राम नाईक प्रोग्राम में बतौर इंटरप्रेटर परफार्म कर चुकी है। (फाइल)
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    रजनी ब्लाइंड बच्चों के लिए स्कालरशिप प्रोवाइड कराती हैं।
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    रजनी ने 2014 में 3-4 लोगों के साथ मिलकर बच्चों को सीखना शुरू किया था। (फाइल)
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Web Title: Inspirational Story For Handicapped Children
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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