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'पाप अपने बाप का नहीं होता'- लालू के चारा घोटाले से IPS ने ऐसे लिया ये सबक

यूपी पुलिस के स्टार आईपीएस नवनीत सिकेरा ने फेसबुक पर शेयर की चारा घोटाले से मिली सीख।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 01, 2018, 10:29 AM IST

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    IPS नवनीत सिकेरा ने फॉडर स्कैम के दोषी साबित हुए सजल चक्रवर्ती की हालत पर सहानुभूति जताई है।

    लखनऊ. उत्तर प्रदेश पुलिस के बेहतरीन आईपीएस अफसरों में शुमार नवनीत सिकेरा अपने फेसबुक प्रोफाइल पर इन्सपिरेशनल पोस्ट डालते रहते हैं। 31 जनवरी को उन्होंने बिहार के चारा घोटाले पर अपने व्यूज रखे। उन्होंने करप्ट अधिकारियों की आलोचना करने की जगह उनकी बेबसी से सहानुभूति दिखाई। नवनीत सिकेरा ने चारा घोटाले से मिली सीख बताते हुए लिखा- "पाप अपने बाप का नहीं होता ये 24 Jan को रांची कोर्ट में देखने को मिला।"

    57 एनकाउंटर कर चुके हैं सिकेरा

    - यूपी के पॉपुलर आईपीएस नवनीत सिकेरा ने अपने अब तक के करियर में 57 एनकाउंटर किए हैं। उन्होंने बताया कि रमेश कालिया को दबोचने के लिए उन्होंने एक महीने तक प्लानिंग की थी।

    सिकेरा ने चारा घोटाले से ये लिया है सबक

    "पाप अपने बाप का नहीं होता ये 24 Jan को रांची कोर्ट में देखने को मिला। ये सजल चक्रवर्ती हैं। कुछ दिन पहले तक झारखंड के चीफ सेक्रेटरी थे, लेकिन चारा घोटाला में इनका भी नाम आ गया और दोषी भी करार हो गए।"

    "सोचिए एक हमारे बिहार में दरोगा बन जाता है तो पूरे गांव प्रखंड में उसकी टशन हो जाती है। बड़े-बड़े लोग झुक के हाय-हेलो करते हैं।"

    "सजल चक्रवर्ती तो मुख्य सचिव थे दिन में ना जाने कितने IAS/IPS पैर छूते होंगे लेकिन आज इनकी बेबसी देख कर दिल रो गया।"

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    चारा घोटाले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम के बाहर बैठे सजल चक्रवर्ती।

    बेबसी एक राज्य के सबसे बड़े अधिकारी का

    "सजल चक्रवर्ती का वजन करीब 150 किलो है। कई बीमारियों से ग्रसित हैं, ठीक से चल नहीं पाते।

    रांची कोर्ट में चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में पेशी थी सुनवाई पहले मंज़िल पर थी। जब वो ऊपर आए तब मैं कोर्ट रूम था, उनको चढ़ते हुए नहीं देखा, लेकिन उतरते वक्त वो सीढ़ी पर खुद को घसीटते दिखे थे। एक सीढ़ी घसीट कर उतरने के बाद फिर दूसरी सीढ़ी पहुंचने के लिए खुद को घसीट रहे थे।

    सोचिए जिसके सामने कल तक बड़े-बड़े अधिकारी गाड़ी का दरवाज़ा खोलने के लिए आतुर रहते थे, वो खुद दुनिया के सामने जमीन पर पड़ा हुआ, एक बच्चे की तरह ममता भाव से सबको देख रहा था। जैसे कह रहा हो कोई गोद में उठा लो।

    कहते हैं ना, सुख के सब साथी दुख में ना कोई। बेचारे दो शादी किए, लेकिन दोनों बीवियों ने तलाक दे दिया, वजह जो भी हो। कोर्ट रूम में सबका कोइ कोई ना कोई था, लेकिन इनकी आंखें जैसे किसी अपने को खोज रही थीं।

    मालूम किया तो पता चला कि कोई इनसे ज्यादा मिलने भी नहीं आता। माता-पिता रहे नहीं। भाई भी था जो सेना में बड़े अफसर था, जो अब नहीं रहा। शायद किसी को गोद लिए थे, उसकी भी शादी हो चुकी है। उसे भी इनसे ज्यादा कोई मतलब नहीं रहता।

    घर मे कुछ पालतू बंदर और कुत्ते पाल रखे हैं। अपनों के नाम पर वो भी कहां हैं, मालूम नहीं।

    ये शान, ये शौकत, ये पैसा, सब मोह माया है। परमानेंट तो कुछ भी नहीं है, सिवाए एक चीज़ के, वो है मौत।

    यह विचार एक व्हाट्सएप्प फारवर्ड के माध्यम से मेरे पास आए, मुझे लगा इसमें एक जीवन का संदेश छुपा हुआ है। अतः शेयर कर रहा हूं।

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