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कुंडली नहीं, '4D ब्रेन मैपिंग' बताएगी राज दुलारे का राज, जाने कैसे है तकनीक

प्राॅसेस में एक हफ्ते का समय लगता है। फ्टवेयर इंजीनियर ब्रेन कम्प्यूटिंग करते हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 02, 2018, 06:30 PM IST
बीबीआरएफआई के अध्यक्ष डॉ. आलोक बीबीआरएफआई के अध्यक्ष डॉ. आलोक



लखनऊ. मेरा बच्चा आइएएस। इंजीनियर बने। कुछ सोचते हैं डक्टर बने। कई बार माता-पिता की इच्छा पूरी होती नहीं दिखती। तब 'उनकी फिक्र बढ़ती है बेटा-बेटी न जाने क्या बनेगा, उसका भविष्य क्या होगा ?' अभिभावकों की यह फिक्र '4D ब्रेन मैपिंग' से दूर हो जाएगी। एम्स दिल्ली से शोध करने वाले व इस समय बीबीआरएफआई के अध्यक्ष डा. आलोक मिश्रा ने dainikbhaskar.com से यह दावा किया।

-उनका कहना है कि बच्चा भविष्य में किस प्रोफेशन की ओर जाएगा, यह हाईस्कूल में पढ़ाई के दौरान 4डी मैपिंग से हो जाएगा। जम्मू काश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए अपनी इस तकनीक को व हां की सरकार के साथ साझा कर चुके हैं और यूपी के मुख्यमंत्री योगी

आदित्यनाथ से भी मिलने का समय मांगा है। जनिए क्या है 4 D तकनीक और कैसे होगी जांच।


- डा. आलोक मिश्रा ने बताया कि- 2007 एम्स में पढ़ाई के बाद यूके चला गया। वहीं पर इस तकनीक पर रिसर्च किया।
- इस तकनीक से बच्चे में कितनी क्षमता है। वो किस क्षेत्र में जाएगा और कौन सी फील्ड उसके लिए बेहतर होगी यह भी प ता हो जाएगा।
- बच्चा साइंटिस्ट, इंजीनियर, डाक्टर, या राजनीति में सक्सेस होगा, हम ये बातें पहले से जान सकते हैं।
- इस टेक्नाॅलजी से बच्चों के मन में क्या चल रहा है, वो किस प्रकार की बातें ज्यादाि सोचता है, वो किस ओर आकर्षित होता है, यह भी जाना जा सकेगा।

2013 में रिसर्च, पेटेन्ट नवम्बर 2017 में
- डा आलोक मिश्रा ने बताया कि- 2013 में जब मैं यूके में था, तो कई लेख मैंने लिखे थे। जिनको पढ़ने के बाद इस टेक्नाॅलजी से इम्प्रेस होकर तत्कालीन ‘‘सीबीआई चीफ जोगिन्दर सिंह ने कहा कि हमारे पास बहुत आत्महत्या के एेसे

ढेरों केस आते हैं।
- क्षमता के विपरीत कोर्स में दाखिला लेने या पैरेन्ट्स के दबाव में मन के विरुद्ध पढ़ाई करने से उन्हें दिक्कत होती और वह अप्रिय कदम उठा लेते हैं।
-हमारी इन्वेस्टिगेशन में ये टेक्नाॅलाजी खासी मददगार हो सकती है।
- उनकी एडवाइज़ पर ‘ब्रेन बिहैवियर रिसर्च फाउंडेशन आॅफ इंडिया की स्थापना हुई।
- नवम्बर 2017 में इसका पेटेन्ट मिला। अब सरकार की परमिशन से हर राज्य में इसके सेंटर्स हर राज्य में खोलने पर विचार कर रहे हैं।
- यदि सरकारी सहयोग मिलेगा तो इसे बड़े जिला अस्पतालों में भी लगाया जा सकता है।

क्या है 4डी ब्रेन मैपिंग टेक्नाॅलाजी

- इंसान के दिमाग में 2 पार्ट होते हैं। लेफ्ट और राइट। लेफ्ट पार्ट अगर ज्यादा तेज एक्टिव है तो निश्चित तौर पर बच्चा इंजिनियरिंग मैथमेटिकल के लिए बेस्ट होगा।
- जब एक पार्ट एक्टिव होता है तो दूसरा शांत रहता है। बहुत कम केस ऐसे होते हैं, जिनमें राइट और लेफ्ट दोनों या बराबर एक्टिव हों।
- हम बच्चे का डीएनए लेकर उसे अपने रिसर्च टूल में डालते हैं, फिर बच्चे की ब्रेन मैपिंग 4डी पर करते हैं।
- जिससे इलेक्ट्रोड, इलेक्ट्राॅन, और अन्य टेक्निक के इस्तेमाल से हम ये देख पाते हैं, कि उसका कौन सा पार्ट क्या काम कर रहा है। कितनीं तेजी से एक्टिव है। किस रेज़ पर शून्य है, कौन से प्वाइंट पर बेस्ट है।
- डीएनए और 4डी ब्रेन मैपिंग से जो रिपोर्ट तैयार करते हैं, उसमें यह निष्कर्ष निकालते हैं कि बच्चा किस फील्ड के लिए बना है।
- इस पूरे रिपोर्ट के आधार पर पर संबंधित बच्चे की कुंडली तैयार करते हैं, जिसे एक पेन ड्राइव या चिप में अपने पास रख सकते हैं।
- हम ये तक मालूम कर सकता है कि वह किन परिस्थितियों में डिप्रेशन में होगा या नहीं, उसका बेस्ट परफार्मेंस क्या होगा, कहां होगा।

स्किल पता होंगी, तो उसे डेवलप करके देश आगे बढ़ेगा
- डा आलोक मिश्रा ने कहा कि आज हर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट के कोर्स कर रहा है। मगर समस्या ये कि बच्चों को पता ही नहीं कि उन्हें करना क्या है।
- क्यों वो अपने आप से अंजान हैं, हमारे यहां बच्चे के समझने से पहले पैरेंन्ट्स उसकी लाइन तय कर देते हैं। फिर वो उन्ही रूटीन कोर्साे के बीच उलझता है।
- कोई पास करके वो लाइन छोड़ देता है, कोई डिप्रेशन में आकर लाइफ को खत्म कर देता है।
- इसके जरिए हमें बच्चे की स्किल पता होगी, तो हम उसे स्किल्ड बनाकर आगे बढ़ा सकेंगे, अभी तो बस एक अंधी दौड़ है रनिंग चालू है।

कितना लगता है समय, कौन है टीम में

- इस पूरे प्राॅसेस में एक हफ्ते का समय लगता है। इसमें एक साफ्टवेयर इंजीनियर ब्रेन कम्प्यूटिंग करते हैं। इसके बाद इसका डायलिसिस कर रिकार्ड किया जाता है। इसके अलावा कई मेडिकल प्रोफेशनल्स और कम्प्यूटर साइंस से जुड़े

एक्सपर्ट टीम के रूप में लगे रहते हैं।

जम्मू कश्मीर सरकार को प्रेजेन्टेशन दे चुके, योगी से मिलने का मांगा समय

- डा आलोक मिश्रा ने बताया कि- हमारी टीम ने अपना पहला प्रेजेन्टेशन जम्मू कश्मीर सरकार को दिया है। क्योंकि वहंा के स्टूडेंट्स को अपनी क्वालिटी पता होगी, तो वो उनको कोई धर्म या मजहब के नाम पर भटका नहीं सकेगा।
- अब हमने इसी प्रोजेक्ट को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने समय मांगा है। मुझे यकीन है, यूपी में इसे सरकार का सपोर्ट जरूर मिलेगा।

कौन हैं डा आलोक कुमार मिश्रा
- डा आलोक कुमार मिश्रा ने 2002 में पीएचडी आॅफ ‘‘फिलोसाफी आॅफ माइंड रिर्सच एंड साइंसेज़‘‘ में किया।
- ‘‘पोस्ट डाक्टोरल प्रोग्राम इन साइकोलाॅजिकल एंड बिहैविरल‘‘ एम्स 2004 में पढ़ाई की।
- 2007 में ‘‘पीएचडी इन माइंड बाॅडी मेडिसिन‘‘ में एम्स नई दिल्ली से पीएचडी की है।
- 2011 में यूके से क्रिमनालाॅजी रिसर्च स्टडी को पूरा किया। 2013 तक लंदन में रहे। कई आर्टिकल और लेक्चर वहंा दिये।
- इसके अलावा ‘‘आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्टेट्स लाॅ‘‘ की टेªनिंग भी की।
- इंडिया में 2013 को वापस आए। इसके बाद यहंा जुवेनाइल क्राइम कमेटी हाईकोर्ट ने जो बनाई उसके मुख्य सदस्य रहे।
- दिल्ली जुवेनाइल बोर्ड का फाउंडर मेम्बर हैं।

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बीबीआरएफआई के अध्यक्ष डॉ. आलोकबीबीआरएफआई के अध्यक्ष डॉ. आलोक
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