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लेसा ने बादशाहनगर रेलवे स्टेशन की ब‍िजली काटी, अफसर बोले- 45 लाख रु. है बकाया

लेसा के चीफ इंजीनियर आशुतोष कुमार ने बताया, बादशाहनगर रेलवे स्टेशन का 45 लाख रुपए का बिल कई महीनों से बकाया है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Dec 30, 2017, 09:09 PM IST

  • लेसा ने बादशाहनगर रेलवे स्टेशन की ब‍िजली काटी, अफसर बोले- 45 लाख रु. है बकाया
    फाइल।

    लखनऊ.यूपी की योगी सरकार का सपना 'पावर फाॅर आॅल' को पूरा करने के ल‍िए लेसा ने कमर कस ल‍िया है। लेसा के चीफ इंजीनियर आशुतोष कुमार ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया, बादशाहनगर रेलवे स्टेशन का 45 लाख रुपए का बिल कई महीनों से बकाया है। इसी वजह से ब‍िजली काटी गई। उन्होंने कहा, ''मुझे जो टास्क दिया गया है, उसे पूरा करने में लगा हूं। सच ये है क‍ि जो भी बड़े बकायदार हैं और देने में सक्षम हैं, लेक‍िन वो हमारे सख्ती के बिना जमा ही नहीं करना चाहते। किसानों को 2 घंटे बिजली तभी मिल पाएगी, जब हम बड़े बकायदारों पर निश्चित कार्रवाई कर रहे हैं।''


    क्या कहते हैं लेसा के अध‍िकारी
    - आशुतोष कुमार ने बताया, ''बादशाहनगर रेलवे स्टेशन का बिजली का बिल काफी महीनों से बकाया चल रहा था। कई बार नोटिस दी गई, लेकिन जमा नहीं किया गया।''
    - ''हमारी बड़े बकायेदारों की लिस्ट में उनका भी नाम था। आज हमारी टीम ने मौके पर पहुंचकर वहीं की मुख्य बिजली काट दी गई।''
    - ''बादशाहनगर रेलवे स्टेशन का लास्ट बिल सबमिट अक्टूबर में था। नवंबर और दिसम्बर का बिल नहीं जमा किया गया था। कई बार रिक्वेस्ट करने के बाद भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसीलिए मजबूरी में हमें बिजली काटनी पड़ी थी।''
    - ''हमारे पास नोटिस भेजने के बाद यही एक रास्ता था, क्योंकि हमें बिजली विभाग को हर क्षेत्र के लिए बनाना है। बड़े बकायेदार यदि इस तरह से जमा नहीं करेंगे, तो गरीबों को बिजली उपलब्ध कैसे होगी।''

    क्या कहते हैं रेलवे के प्रवक्ता
    -रेलवे के प्रवक्ता आलोक श्रीवास्तव ने कहा, ''हमें इस बार की कोई जानकारी नहीं है। बिजली विभाग ने बिना किसी सूचना के बिजली काटी थी। बाद में उन्हें गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने खुद ही जोड़ भी दी। इस बीच अगर कोई हादसा होता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती। ये निहायती गैर जिम्मेदाराना हरकत है।''
    - वहीं चीफ इंजीनियर आशुतोष कुमार ने कहा, ''हमने हर तरह से उनसे बात की थी। लिखित नोटिस हर महीने की तरह ही दी गई थी। हमने फोन पर या मिलकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, लेकिन रेलवे की ओर से लोगों ने बात को घुमाने की लगातार कोशिश करते रहे।''

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