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4 दिन ये मूवी देख 5वें दिन छोड़ दी थी JOB, फिर ऐसे बन गया एक्टर

रवीश मुंबई के रहने वाले हैं और मुंबई में ही उन्होंने फाइनेंस में एमबीए किया है।

Danik Bhaskar | Jan 01, 2018, 09:00 PM IST
एक रेगुलर ग्रैजुएट बैचलर की तरह मैंने भी नौकरी तलाशना शुरू किया और एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब किया। एक रेगुलर ग्रैजुएट बैचलर की तरह मैंने भी नौकरी तलाशना शुरू किया और एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब किया।

लखनऊ. टेलीविजन इंडस्ट्री में 10 साल गुजार चुके एक्टर रवीश देसाई शो "कुंवारा है पर हमारा है" के प्रमोशन के लिए पिछले दिनों राजधानी आए थे। इस दौरान रवीश ने DainikBhaskar.com से अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से रिलेटेड तमाम बातें शेयर कीं।

लगातार 4 दिन देखी 3-इडियट मूवी और बदली Life
- रवीश मुंबई के रहने वाले हैं और मुंबई में ही उन्होंने फाइनेंस में एमबीए किया है। वो कहते हैं- ''एक रेगुलर ग्रैजुएट बैचलर की तरह मैंने भी नौकरी तलाशना शुरू किया और एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब किया।''
- ''3 साल तक जॉब किया, लेकिन दिमाग में था कि एक्टर बनना है। मेरी उम्र 25 या 26 साल थी। जब थ्री इडियट फिल्म रिलीज हुई थी। मैं फिल्म देख कर सीरियस हो गया।''
- ''मेरा एक दोस्त मेरे साथ था, वो मेरी हालत समझ गया और उसने मुझसे कहा- "ओए..मूवी देख के फैसला न करना" मैंने बोला ठीक है। फिर मैं 4 बार गया 'थ्री इडियट' देखने और पांचवे दिन मैंने नौकरी छोड़ दी।''
- ''मैंने ऑडिशन देना शुरू किया। घर में कोई फिल्मी बैकग्राउंड का नहीं था, इसलिए उन्हें भी कन्वेंस करना जरा मुश्किल था। लेकिन एक साल में मैंने इतनी एड फिल्म कर लीं कि मां-पापा को कॉन्फिडेंट हो गया और सफर चल निकला।''

दिन में देता था 6-7 ऑडिशन
- ''एक दिन में 6 से 7 ऑडिशन देता था, लेकिन जब विक्रम भट्ट की फिल्म का ऑडिशन दिया और सिलेक्शन हुआ तो फिल्म के प्लेटफार्म पे काम करने का नया तजुर्बा हासिल हुआ।''
- ''पिक्चर चली हो या नहीं, लेकिन 70mm स्क्रीन पर खुद को देख कर गर्व बहुत महसूस हुआ। वहीं से फिर टेलीविजन का ऑफर आया और मैंने टीवी शोज करना शुरू कर दिया।''

कॉलेज बंक कर भाग जाता था मरीन ड्राइव
- ''मैं बचपन में बहुत शरारत करता था। मुंबई के जय हिंद कॉलेज से मैंने पढाई की, जो मरीन ड्राइव के पास था। कॉलेज बंक करके वहीं भाग जाता था।''
- ''मुझे क्रिकेट का शौक था और मेरा स्कूल टाइम सुबह 8 से 3 होता था तो मैं 1 बजे कॉलेज छोड़ कर क्रिकेट खेलने भाग जाता था।''
- ''मैंने अपनी मां की मार बहुत खाई है, क्योंकि मुझे पढ़ने में इंटरेस्ट नहीं था।

पूरे मोहल्ले के सामने हुई थी पिटाई
- ''एक किस्सा सुनाता हूं- उस वक्त मैं 11 साल का था। मुंबई में एक सर्कुलर कॉलोनी है जहां मैं अपनी फैमिली के साथ रहता था, वहां हमारे पड़ोसियों के काफी बच्चे ट्यूशन पढ़ने आते थे। सभी मुझसे बड़े थे।''
- ''एक दिन मैंने उनमें से 4-5 बच्चों की साइकिल पंचर कर दी। मैं फर्स्ट फ्लोर पर रहता था। ये काम करके मैं चौथे माले पर गया और देखने लगा। उन बच्चों को और उनकी हालत देख मुझे हंसी छूट गई और मैं पकड़ा गया।''
- ''मेरी शिकायत मां से हुई और मां ने पूरी कॉलोनी के लोगों को इकठ्ठा करके मुझे सबके सामने बहुत मारा।''

एक साल डेट के बाद की शादी
- ''मुग्ध और मुझे 'सतरंगी ससुराल' के सेट पर प्यार हुआ था। एक साल तक हमने एक दूसरे को डेट किया और एक दिन घुटने पर बैठ कर उसे अंगूठी पहना दी। मतलब सगाई कर ली।''

- 4 मार्च 1987 को मुंबई, महाराष्ट्र में जन्मी मुग्धा को लोग 'धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान' की 'संयोगिता' के रूप में ज्यादातर जानते हैं, लेकिन वे तब से एक्टिंग कर रही हैं, जब वे मात्र 5 साल की थीं।
- उन्होंने धर्मेंद्र और सचिन के साथ फिल्म 'आजमाइश' (1995) में भी काम किया है। वे साल 2003 में टेलीकास्ट हुए पॉपुलर शो 'जस्सी जैसी कोई नहीं' में भी काम कर चुकी हैं।
- इसके अलावा वे 'धरम-वीर' (2008), 'मेरे घर आई एक नन्हीं परी' (2009) और 'सजन रे झूठ मत बोलो' (2009-2012) जैसे कुछ टीवी शो में नजर आ चुकी हैं।

रैपिड फायर
फेवरेट स्टार- शाहरुख खान
फेवरेट एक्ट्रेस- जूही चावला
क्रश- सिक्स स्टैंडर्ड में एक लड़की से प्यार हुआ था, उस वक्त पोस्ट कार्ड आते थे। उनके पते पर प्रेम पत्र लिख कर भेजता था।
मूवी - रॉकी
म्यूजिशियन बंद- शंकर महादेवन
सॉन्ग- आशाएं खिले दिल की
कजिन- इटैलियन
मदर रेसिपी- आलू मटर
क्रिकेटर- राहुल द्रविड़ दे हार्ड फैन
सुपर हीरो- सुपरमैन
कार्टून करैक्टर- जेटसंस
फेवरेट ड्रेस- जीन्स टी शर्ट
फर्स्ट सैलरी- 2006 में मिली थी। एक कंसल्टेंसी में नौकरी करता था। 3000 रुपए मिले थे। तब एमबीए नहीं किया था।
पहली कार- आई 10