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कड़ाके ठंड में up police के माथे पर पसीना, हाईकोर्ट के आदेश पर ढूंढ रहे ये दस्तावेज

धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के परमीशन ढूंढी जा रही हैं फाइलें, हाईकोर्ट के आदेश पर अमल का आदेश

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 07:35 PM IST
लाउडस्पीकर पर रोक लाउडस्पीकर पर रोक

लखनऊ. धार्मिक स्थलों पर किसके आदेश से लाउडस्पीकर बज रहे हैं ? 20 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के इस सवाल के बाद सरकार में हलचल शुरू हो गई है। आईजी ( लॉ एंड ऑर्डर) ने प्रदेश के SSP, SP को भेजे आदेश में कहा है कि लाउडस्पीकर इस्तेमाल की अनुमति का ब्यौरा जुटा जाए। बिना इजाजत लाउडस्पीकर बजाने वालों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश के आदेशों के हिसाब से कार्रवाई की जाए। ...पढ़ें क्या था पूरा मामला

- 20 दिसम्बर 2017 को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि किसके आदेश पर धामिर्क स्थल पर लाउडस्पीकर बज रहे है। किन अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत दी है, एेसे कितने धार्मिक स्थल हैं।

प्रमुख सचिव गृह ने किया यह आदेश

-प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि पब्लिक प्लेस पर 10 डिसिबेल (डीबी) से ज्यादा और प्राइवेट प्लेस पर 5 डिसिबल से ज्यादा की आवाज नहीं होनी चाहिए।

-यूपी के आईजी एलओ एसपी-एसएसपी को हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक डीजीपी आनन्द कुमार का कहना है कि "हाइकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए सर्कुलर जारी किया गया है।"

कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी

- 'अफसरों में नियम लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं है या उनका उत्तरदायित्व तय नहीं है, दोनों ही हालात गंभीर हैं क्योंकि इसमें अदालत को दखल देना पड़ रहा है।'

- ध्वनि प्रदूषण नियम- 2000 को प्रदेश में सख्ती से लागू कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?

- क्या धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर लिखित अनुमति के बाद लगाए गए ? यदि नहीं तो उन्हें हटाने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
- जिन अधिकारियों पर बिना अनुमति के लाउडस्पीकर का प्रयोग रोकने की जिम्मेदारी थी, उन पर क्या कार्रवाई हुई?
- नियम को सख्ती से लागू न कराने वाले अधिकारियों का क्या उत्तरदायित्व तय किया गया?
- ध्वनि प्रदूषण की शिकायत के लिए क्या कोई वेबसाइट बनाई गई?

ये था हाईकोर्ट का आदेश

-इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को ध्वनिप्रदूषण (रेग्यूलेशन एण्ड कंट्रोल) नियम- 2000 का पालन न कराने पर सरकार को फटकार लगाई थी।
-न्यायमूर्ति विक्रमनाथ एवं न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की बेंच ने एक जनहित याचिका पर धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति लाउडस्पीकरों के बजाने पर एतराज जताया था।

-कोर्ट ने बेंच ने प्रमुख सचिव (गृह) व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड़ के चेयरमैन से पूछा था कि नियम बना दिए गए तो फिर अफसर उनका पालन क्यों नहीं कराते है।

- मंदिरों, मस्जिदों व अन्य धार्मिक स्थलों पर बिना अनुमति के कितने लाउडस्पीकर लगे हैं, कितने उतारे गए हैं?
-समारोहों या जुलूसों में तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर क्या कार्रवाई की गई? कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से ये सारी सूचनाएं व्यक्तिगत हलफनामे में 1 फरवरी तक पेश करने का आदेश दिया है । सूचना न देने पर खुद हाजिर होने को कहा है।

यह है नियम

-याची के मुताबिक नियम है कि बिना अधिकारी की अनुमति के लाउडस्पीकरों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
- ऑडिटोरियम और कॉन्फ्रेंस रूम जैसे बंद स्थानों को छोड़कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकरों का प्रयोग नहीं होगा।
- हालांकि, राज्य सरकार साल में अधिकतम 15 दिनों के लिए सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यो के लिए रात 10 से 12 बजे के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की छूट दे सकती है।

20 दिसम्बर 2017 को HC ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था- किसके आदेश पर धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बज रहे हैं। 20 दिसम्बर 2017 को HC ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था- किसके आदेश पर धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बज रहे हैं।
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