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शहीद पिता के पास तिरंगा लेकर खड़ा रहा 11 साल का बेटा, नारे लगाते हुए बोला ‘मेरे पापा अमर रहें'

जम्मू-कश्मीर में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुआ था निलेश।

Dainik Bhaskar

Apr 04, 2018, 02:09 AM IST
शहीद की पत्नी और इनसेट में बेटा। शहीद की पत्नी और इनसेट में बेटा।

सुल्तानपुर, यूपी. कश्मीर के शोपियां में आतंकी हमले में रविवार को शहीद हुए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के जवान निलेश सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक नगरी गांव पहुंचा। शहीद जवान के 11 वर्षीय बेटे ने शव को मुखाग्नि दी। इस दौरान मासूम पहले रोया, फिर नारे लगाते हुए बोला ‘मेरे पापा अमर रहें। अंतिम संस्कार में पूरे गांव के लोग शामिल हुए थे। उनका बड़ा बेटा यथार्थ (12) शहीद पिता के पदचिह्नों पर चलने की बात कहकर हर किसी को सोचने पर मजबूर कर गया। देशभक्ति से लबरेज़ बेटे ने DainikBhaskar.com से कहा था-'मेरे पिताजी मरे नहीं हैं, वो शहीद हुए हैं। मैं भी बड़ा होकर सेना में जाऊंगा और पाकिस्तान से अपने पिता का बदला जरूर लूंगा।' आर्थिक मदद दी गई...

- शहीद की पत्नी के खाते में 20 लाख रुपए डलवा दिए हैं। साथ ही छोटे भाई को नौकारी देने का आश्वासन भी दिया है।
- जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर दूर अखंडनगर थाना क्षेत्र के नगरी गांव में मातम पसरा है। यहीं जांबाज निलेश सिंह का घर है।
- शहादत की खबर जब गांव पहुंची, तो लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ। पुष्टि के लिए शहीद जवान के परिजनों ने सेना मुख्यालय में फोन कर विस्तृत जानकारी ली।

2006 में हुई थी शादी

- शहीद नीलेश सिंह का जन्म नगरी ग्राम पंचायत निवासी साधारण किसान राम प्रसाद सिंह के बड़े पुत्र के रूप में सन 1987 में हुआ था।
- शहीद के अंदर छात्र जीवन से ही राष्ट्र सेवा का भाव जागृत हो चुका था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सन 2003 में पहले ही प्रयास से सेना में सिलेक्ट हो गया था।
- देश सेवा के तीन वर्ष बाद 2006 में सुलतानपुर के देवलपुर निवासी अर्चना सिंह से शादी हुई थी।
- साधारण गृहस्थ परिवार में जन्मे नीलेश कुमार सिंह के पिता रामप्रसाद सिंह व माता ऊषा सिंह निलेश की पत्नी और उसके दो बच्चों यथार्थ और 14 महीने के शिवाय के साथ रहते हैं।
- निलेश की पत्नी गोंडा के परसपुर में टीचर हैं।

शहीद की पत्नी पति को विदा करती हुई। शहीद की पत्नी पति को विदा करती हुई।
तिरंगा पकड़े हुए 11 साल का बेटा। तिरंगा पकड़े हुए 11 साल का बेटा।
शहीद का बेटा अपनी छोटी बहन के साथ। शहीद का बेटा अपनी छोटी बहन के साथ।
शहीद की पत्नी अपनी बेटी को संभालते हुए। शहीद की पत्नी अपनी बेटी को संभालते हुए।
शहीद की पत्नी मौत की खबर सुनने के बाद बेसुध हो गई थीं। शहीद की पत्नी मौत की खबर सुनने के बाद बेसुध हो गई थीं।
शहीद की अंतिम यात्रा। शहीद की अंतिम यात्रा।
शहीद के शव को सेना के जवान घर तक लेकर आए थे। शहीद के शव को सेना के जवान घर तक लेकर आए थे।
शहीद का फ्यूनरल। शहीद का फ्यूनरल।
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शहीद की पत्नी और इनसेट में बेटा।शहीद की पत्नी और इनसेट में बेटा।
शहीद की पत्नी पति को विदा करती हुई।शहीद की पत्नी पति को विदा करती हुई।
तिरंगा पकड़े हुए 11 साल का बेटा।तिरंगा पकड़े हुए 11 साल का बेटा।
शहीद का बेटा अपनी छोटी बहन के साथ।शहीद का बेटा अपनी छोटी बहन के साथ।
शहीद की पत्नी अपनी बेटी को संभालते हुए।शहीद की पत्नी अपनी बेटी को संभालते हुए।
शहीद की पत्नी मौत की खबर सुनने के बाद बेसुध हो गई थीं।शहीद की पत्नी मौत की खबर सुनने के बाद बेसुध हो गई थीं।
शहीद की अंतिम यात्रा।शहीद की अंतिम यात्रा।
शहीद के शव को सेना के जवान घर तक लेकर आए थे।शहीद के शव को सेना के जवान घर तक लेकर आए थे।
शहीद का फ्यूनरल।शहीद का फ्यूनरल।
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