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सपा के समर्थन से बसपा कैंडिडेट जायेगा राज्यसभा, एमएलसी चुनावों में हम देंगे सपा को समर्थन: मायावती

मायावती ने यह साफ़ कर दिया है कि उपचुनावों में समर्थन को आगामी 2019 लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन न माना जाए।

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 06:17 PM IST
मायावती (फाइल फोटो) मायावती (फाइल फोटो)

लखनऊ. मायावती ने यह साफ़ कर दिया है कि प्रदेश की 2 लोकसभा सीट गोरखपुर और फूलपुर पर होने वाले उपचुनावों में सपा को समर्थन देने के पीछे बड़ी डील हुई है। इसे आगामी 2019 लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन न माना जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरे चल रही है कि सपा और बसपा का गठबंधन हो गया है यह तथ्य पूरी तरह गलत है। आपको बता दे कि बसपा ने लोकसभा उपचुनावों में अपना कैंडिडेट नहीं उतारा है।

बसपा कैंडिडेट को सपा भेजेगी राज्यसभा

-मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी के लोगों ने सपा के लोगों के साथ बातचीत करके यह डिसीजन लिया है कि सपा हमारे कैंडिडेट को राज्यसभा भेजने के लिए अपना वोट देगी साथ ही हम उनके एक सदस्य को एमएलसी चुनावों में वोट देंगे।
-उन्होंने कहा कि सपा का एक सदस्य आसानी से राज्यसभा और विधानपरिषद में चला जायेगा जबकि बसपा के एक कैंडिडेट को राज्यसभा सपा के समर्थन से भेजा जायेगा और सपा के एक कैंडिडेट को विधानपरिषद में बसपा के समर्थन से भेजा जायेगा।
-उन्होंने कहा कि बसपा का कोई कार्यकर्ता ही राज्यसभा जायेगा।

जब गठबंधन होगा तो मीडिया को पहले बताएँगे

-उन्होंने कहा कि यूपी में सपा और बसपा का या किसी अन्य पार्टी से आम लोकसभा चुनाव में कोई चुनावी गठबंधन होगा तो फिर वह गुपचुप तरीके से नहीं होगा। बल्कि पूरे तौर से खुल कर ही होगा।
-जब भी किसी पार्टी के साथ बसपा का चुनावी गठबंधन होगा तो सबसे पहले यह मीडिया को ही अवगत कराया जायेगा। क्योंकि मीडिया ही उलटी सीधी खबरे छापता रहता है।
-उन्होंने कहा कि गोरखपुर और फूलपुर में हो रहे उपचुनाव में वोट देने का जो सवाल है तो मीडिया को मालूम होना चाहिए कि पहले की तरह हमने अपना कैंडिडेट नहीं उतारा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे लोग अपना वोट डालने नहीं जायेंगे। संविधान ने जो अधिकार दिया है उसका हमारे वोटर सही इस्तेमाल करेंगे।
-उन्होंने कहा कि पूर्व में मेरे द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के मुताबिक चलकर दोनों सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार को हराने के लिए यह सभी विरोधी पार्टियों में से जो मजबूत उम्मीदवार हैं उन्हें ही अपना वोट देने वाले हैं।

ऐसा है राज्यसभा की 10 सीटों का गणित

-राज्यसभा की 58 सीटों के लिए 23 मार्च को इलेक्शन होना है। जिन 58 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें से सबसे ज्यादा 10 सीटें यूपी की हैं। खाली हो रही 10 सीटों में से 6 सीटें सपा, बसपा के पास दो सीट थीं लेकिन मायावती के इस्तीफा देने के बाद से ही एक सीट खाली है और 1-1 सीटें कांग्रेस और बीजेपी के पास हैं।
-2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिले अपार बहुमत के कारण ये माना जा रहा है कि इन 10 सीटों में एक 8 सीटें बीजेपी के खाते में जाएंगी, जबकि सपा को एक सीट मिलेगी।

-वहीं, 1 सीट को लेकर कांटे की टक्कर है। अगर इस एक सीट के लिए विपक्ष एकजुट होता हो तभी ये सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है या फिर ये कहा जाए कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले यूपी में विपक्ष की एकजुटता का सबसे बड़ा टेस्ट है। हालाँकि अब यह सीट बसपा के खाते में जा सकती है।

ऐसा है विधानपरिषद का गणित

-5 मई 2018 को विधानपरिषद की 13 सीटें खाली हो रही हैं। जिसमे 7 सपा के पास हैं। 2 बसपा के पास हैं और 2 भाजपा के पास हैं जबकि एक सीट राष्ट्रीय लोक दल के पास है। वहीँ एक सीट सपा से बसपा में आये अम्बिका चौधरी के इस्तीफे के बाद से खाली है।

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मायावती (फाइल फोटो)मायावती (फाइल फोटो)
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