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कट्टरपंथियों के हाथों में है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, AIMPLB से निकाले जाने पर बोले नदवी

नदवी ने कहा, मैं शरीयत के हिसाब से फैसला चाहता हूं और शरीयत में मस्जिद शिफ्ट करने का विकल्प है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 12, 2018, 12:52 PM IST

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    मौलाना नदवी ने रविवार को कहा कि बाबरी मसले को सुलझाने के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता जरूरी है। - फाइल

    लखनऊ.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रविवार को अयोध्या विवाद की सुलह का सुझाव बताने वाले और मस्जिद को शिफ्ट करने का बाते कहने वाले मौलाना सलमान नदवी की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। हालांकि, नदवी ने दावा किया है कि बोर्ड से अलग होने का फैसला उन्होंने खुद किया है। नदवी ने आरोप लगाया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कट्टरपंथी लोगों ने कब्जा कर लिया है। 'मैं शरीयत के हिसाब से फैसला चाहता हूं और शरीयत में मस्जिद शिफ्ट करने का विकल्प है। मैं हिंदू-मुस्लिम एकता की बात कर रहा हूं। दोनों समुदाय मिलकर बात करेंगे। सबसे पहले अयोध्या जाऊंगा। साधु-संतों के साथ मिलकर बातचीत करेंगे।

    वसीम रिजवी ने पीएम मोदी को लिखा खत

    -वहीं, यूपी शिया वफ्क बोर्ड के चैयरमैन वसीम रजवी ने पीएम मोदी को एक लेटर लिखा है। उन्होंने लेटर में लिखा है, "कट्टरपंथी मानसिकता के लोग जो अपने आप को तथाकथित मुसलमान कहते हैं वह हिन्दुस्तान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इनकी गतिविधियों से ऐसा लगता है कि हिन्दुस्तान के मुसलमानों से संबंधित अहम फैसले पाकिस्तान और सऊदी अरब के आतंकवादी संगठन तय कर रहे हैं।"

    - उन्होंने कहा- अयोध्या में मंदिर बनना चाहिए और मुसलमान अपनी मस्जिद के वहां से दूर किसी गैर विवादित जगह में बनाएं, यही एक मात्र रास्ता है।

    - उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर समस्या है। राष्ट्रहित में इस एनजीओ की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर दोष सिद्ध हो जाए तो इनका रजिस्ट्रेशन रद्द करके इस पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।


    मुस्लिम बोर्ड के एग्जिक्यूटिव सदस्य थे नदवी

    - बता दें कि मौलाना नदवी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया था और मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का फॉर्मूला सुझाया था, जिसके बाद से बोर्ड उनसे नाराज चल रहा था। नदवी बोर्ड के एग्जिक्यूटिव सदस्य थे।

    - नदवी ने कहा कि उन्हें अफसोस है कि हम सभी जमीन के एक टुकड़े के लिए लड़ रहे हैं। इससे बेहतर होता कि हम देश में शांति और एकता के लिए मिसाल पेश करते हुए बाबरी मस्जिद को शिफ्ट करने की पहल करते।


    'बोर्ड से मैं खुद हुआ बाहर'
    - बोर्ड से बाहर किए जाने पर नदवी ने कहा, 'हैदराबाद में हुई बोर्ड की पहली ही बैठक में जब मुझे मेरे तरीके से अपने विचार नहीं रखने दिए गए, तभी मैंने सोच लिया था कि मैं बोर्ड से बाहर चला जाऊंगा।
    - नदवी ने कहा, 'पिछले 25 वर्षों से इस मामले में कोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है। अगर कोर्ट किसी नतीजे पर पहुंचता भी है तो किसी न किसी पक्ष को दुख होगा। मैं देश में शांति और एकता चाहता हूं।
    - नदवी ने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि हम एक जमीन के टुकड़े के लिए इस तरह क्यों लड़ रहे हैं। इसकी बजाए कि हमें यह लड़ाई उन लोगों के मुआवजे के लिए लड़नी चाहिए जो दंगों में प्रभावित हुए थे।

    - नदवी ने कहा कि इस समझौते के बदले हम सुप्रीम कोर्ट से यह सुनिश्चित करवाने की मांग कर सकते हैं कि इसके बाद इस्लाम से जुड़े किसी भी धार्मिक स्थल के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा और बाबरी विध्वंस के पीड़ित लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए।

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    वसीम रिजवी द्वारा पीएम मोदी को लिखा गया लेटर ।
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    श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात के दौरान मौलाना नदवी (बादामी कपड़ों में)। - फाइल
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