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BBAU में किसानों को मिलेगी बेहतर खेती की ट्रेनिंग, CM योगी करेंगे कैंप का इनॉग्रेशन

लखनऊ. बीबीएयू में 6 दिवसीय शून्य लागत प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 19, 2017, 05:29 PM IST

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    प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर का आयोजन 20 से 25 दिसंबर तक चलेगा।

    लखनऊ.बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी(बीबीएयू) में 6 दिवसीय शून्य लागत नेचुरल फार्मिंग ट्रेनिंग शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर का इनॉगेरेशन सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे। 20 दिसंबर से शुरू होने वाले इस प्रशिक्षण में देश के 15 राज्यों से 15 सौ किसान शामिल होंगे। इसके जरिए किसानों को उन्नत खेती करने की नई तकनीक और बिना किसी लागत के फसलों से ज्यादा से मुनाफा कमाने के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। 25 दिसंबर तक चलेगा शिविर...

    - जानकारी देते हुए नेचुरल फार्मिंग के जन्मदाता पद्मश्री सुभाष पालेकर ने बताया, ''देश को समृद्ध बनाना है तो सबसे पहले गांवों को समृद्ध बनाना होगा। गांव के युवा खेती से दूर भाग रहे हैं।''
    - ''किसान अपने बेटे को किसान नहीं बनाना चाहता है। उसे खेती घाटे का सौदा लगती है, क्योंकि उसे अपनी फसल को तैयार करने में काफी पैसे खर्च करने पड़ते है। लेकिन बाद में उसे बेचने पर सही मूल्य नहीं मिल पाता है।''
    - ''जैविक खेती से तैयार फसलों से कैंसर सहित कई अन्य घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है। परम्परागत या ओरगेनिक खेती में खर्चा ज्यादा है और मुनाफा कम। जबकि नेचुरल फार्मिंग में खर्चा न के बराबर है और मुनाफा ही मुनाफा है।''
    - ''नेचुरल फार्मिंग जैविक खेती की तुलना में सस्ती है। इसमें कोई खर्चा नही आता है। ये खेती की अन्य तकनीक से कभी आसान है और मुनाफा भी कई गुना है।''
    - ''किसान आज अपनी बेटी की शादी एक किसान से नहीं करना चाहता है उसे लगता है कि उसकी बेटी का भविष्य सुरक्षित नहीं है।''
    - बता दें, इसके तहत महाराष्ट्र के अरावती से अपने 6 दिवसीय दौरे पर राजधानी में मौजूद हैं।

    क्या है शून्य लागत नेचुरल फार्मिंग?

    - पद्मश्री सुभाष पालेकर के मुताबिक, ''शून्य लागत नेचुरल फार्मिंग में किसान को बाजार से कोई भी चीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तरह की खेती में किसान प्राकृतिक विधि से फसलों को पानी, खाद्य और बाकि चीजें मुहैया कराता है। इसमें खर्चा न के बराबर है और मुनाफ़ा कई गुना है।''


    कैसे होती है नेचुरल फार्मिंग?
    - नेचुरल फार्मिंग के लिए किसान के पास एक देशी गाय होना चाहिए। वह गाय के गोबर से तैयार खाद् को फसलों में डालता है। उसे बाजार से कोई चीज लेने की जरूरत नहीं पड़ती है, फसलों के लिए हवा और पानी की जरूरत प्राकृतिक विधि से प्रकृति से लेकर पूरी की जाती है। क्योंकि प्रकृति में हवा और पानी दोनों ही चीजें मौजूद है।

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    प्राकृतिक कृषि के जन्मदाता पद्मश्री सुभाष पालेकर ने बताया- देश को समृद्ध बनाना है तो सबसे पहले गांवों को समृद्ध बनाना होगा।
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