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सूखी नहर से आ रही थी रोने की आवाजें, कपड़े में लिपटी पड़ी थी बच्ची

राहगीरों की मदद से बच्ची को नहर से बाहर निकाल उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया।

Danik Bhaskar | Dec 04, 2017, 03:38 PM IST
राहगीरों की मदद से बच्ची को नहर से बाहर निकाल उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। राहगीरों की मदद से बच्ची को नहर से बाहर निकाल उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया।

लखनऊ. राजधानी के आशियाना स्थित शिव मंदिर के सामने शारदा सहायक नहर में शनिवार को एक नवजात बच्ची को उसके घरवाले कपड़े में लपेटकर फेंककर भाग गए थे। नहर सूखी हुई थी। लिहाजा बच्ची के रोने की आवाज सुन मंदिर में पूजा करने जा रहे एक पुजारी की नजर उस पर पड़ी। राहगीरों की मदद से बच्ची को नहर से बाहर निकाल उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। तब जाकर उसकी जान बच पाई। मंदिर के पुजारी पंडित राम सुरेश पांडेय ने DainikBhaskar.com से बात की और इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
 
ये है पूरा मामला
- गाजियाबाद के रहने वाले पंडित राम सुरेश पांडेय के मुताबिक, ''शनिवार को मैं लखनऊ के आशियाना स्थित शिव मंदिर में हनुमान जी की पूजा कराने के लिए आया हुआ था।''
- ''पूजा कराने के बाद दोपहर में 2 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के बाहर निकला था। तभी मुझे पास से बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी।''
- ''बच्चा 10 मिनट से रो रहा था। उसके रोने की आवाज सुनकर जब रहा नहीं गया तो मैं उसे देखने के लिए पुल की तरफ बढ़ा। लेकिन वहां बच्ची नहीं दिखाई नहीं दी।''
- ''उसकी रोने की आवाज अभी भी मेरे कानों में सुनाई दे रही थी। मैंने चारों तरफ उसे देखने की कोशिश की, लेकिन मुझे वो कहीं पर भी नजर नहीं आई।''
- ''मैं नहर की तरफ बढ़ता ही जा रहा था। 100 कदम चलने के बाद मुझे नहर के अंदर कपड़े में लिपटी हुई बच्ची दिखाई दी। रोने की आवाज उसी बच्ची की थी। तब मैंने जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया था। मेरी आवाज सुनकर पुल से गुजर रहे राहगीर मेरी तरफ बढ़े चले आए।''
- ''मैंने उन्हें नहर की ओर इशारा करते हुए कपड़े में लिपटी हुई बच्ची को दिखाया। बाद में राहगीरों की मदद से बच्ची को निकाला गया।''
 
प्राइवेट हॉस्पिटल ने एडमिट करने से किया इनकार
- ''पुलिस को फोन पर इस मामले की सूचना दे दी। फोन करने के दस मिनट के अंदर ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। हम उसे राजा राम हॉस्पिटल गए, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने बच्ची की हालत देख उसे एडमिट करने से मना कर दिया। उस टाइम बच्ची की सांसे तेज चल रही थीं।''
- ''मैंने डॉक्टरों के सामने काफी मिन्नतें भी कीं, लेकिन डॉक्टरों ने बच्ची के इलाज की व्यवस्था न होने का हवाला देकर उसे कहीं और दिखाने को कहा।''
- ''डॉक्टरों द्वारा बच्ची को न भर्ती करने पर उसे लेकर पुलिस के साथ आलमबाग स्थित अवध हॉस्पिटल पहुंचे। वहां के डॉक्टरों ने बच्ची को एडमिट कर लिया।''

पुजारी ने बच्ची के इलाज के लिए जमा किए 5 हजार रुपए
- ''बच्ची को एडमिट करने के बाद डॉक्टरों ने 5 हजार रुपए तत्काल जमा करने को कहा। उस टाइम मेरे जेब में 5 हजार रुपए ही थे। वे पैसे मुझे शिव मंदिर में पूजा करने के बदले में मिले थे। मैंने अपनी जेब से वो पैसे निकालकर जमा कर दिए।''
- ''उसके बाद बच्ची का इलाज करना शुरू हो गया। बच्ची अभी भी अवध हॉस्पिटल में एडमिट है। उसका इलाज जारी है।''
 
बच्चे को गोद लेने के लिए आगे आए कपल
- ''इस मामले की जानकारी चाइल्ड लाइन को भी दी गई थी। चाइल्ड लाइन ने बच्ची को हॉस्पिटल में एडमिट कराने से लेकर उसके इलाज में हेल्प की।''
- ''सूचना पाकर पावर हाउस चौराहे से एक कपल मुझसे मिलने के लिए आया था। उन्होंने बच्ची को गोद लेने को कहा। लेकिन मैंने बच्ची को देने से मना कर दिया। मैंने बच्ची की परवरिश खुद से करने का डिसीजन लिया है।''
 
क्या कहती है पुलिस?
- मानक नगर थाने के दरोगा राम नवल पांडेय के मुताबिक, बच्ची को अवध हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। डॉक्टरों से बच्ची का इलाज प्राथमिकता के तौर पर करने के लिए कहा गया है। बच्ची के पैरेंट्स का पता लगाया जा रहा है। लेकिन अभी तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
 
क्या कहते हैं डॉक्टर्स ?
- अवध हॉस्पिटल के डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची की हालत पहले से बेहतर है। हॉस्पिटल में जिस टाइम उसे लाया गया था। उस वक्त उसकी नाल भी नहीं कटी हुई थी। देखने से लग रहा था जैसे उसका जन्म सिर्फ 24 घंटे पहले का अंदर हुआ हो। उसके बाद उसे किसी ने फेंक दिया हो। उसका इलाज अभी भी जारी रहा है।
 
चाइल्ड लाइन का पक्ष
- चाइल्ड लाइन के मेंबर मनोज कुमार ने बताया कि वे अवध हॉस्पिटल के डॉक्टरों के लगातार संपर्क में हैं। डॉक्टरों से बच्ची की तबीयत के बारे में पल-पल की अपडेट ले रहे हैं। उसके इलाज के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, वो उठाए जाएंगे।

 

डॉक्टरों से बच्ची का इलाज प्राथमिकता के तौर पर करने के लिए कहा गया है। डॉक्टरों से बच्ची का इलाज प्राथमिकता के तौर पर करने के लिए कहा गया है।
पुजारी ने कहा- मैंने बच्ची की परवरिश खुद से करने का डिसीजन लिया है। पुजारी ने कहा- मैंने बच्ची की परवरिश खुद से करने का डिसीजन लिया है।