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DB IMPACT: IGRUA में ब‍िना ट्रेन‍िंग बांटे जा रहे पायलट सर्टिफिकेट, 24 घंटे में दूसरी FIR

IGRUA में फैले भ्रष्टाचार पर DainikBhaskar.com ने प्रमुखता से खबर छापने के बाद प्रदेश की पुलिस हरकत में आ गई है।

आदित्य तिवारी | Last Modified - Jan 16, 2018, 01:32 PM IST

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    15 जनवरी 2018 को आगरा के एत्मादपुर थाने में उपनेश कुमार की हत्या और आपराधिक षड्यंत्र मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। (फाइल)

    लखनऊ.अमेठी के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (IGRUA) में फैले भ्रष्टाचार और डायरेक्टर की खबर DainikBhaskar.com के प्रमुखता से छापने के 24 घंटे बाद प्रदेश की पुलिस हरकत में आ गई है। IGRUA में पायलट की ट्रेनिंग कर रहे उपनेश कुमार की हत्या और आपराधिक साजिश मामले में 15 जनवरी 2018 को आगरा के एत्मादपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 29 दिसंबर​ से दर्ज नहीं हुई थी FIR...

    - बता दें, 29 दिसंबर 2017 को उपनेश कुमार की लाश एत्मादपुर इलाके के सड़क के किनारे मिली थी। जिसके बाद से उसके परिजनों ने IGRUA पर छात्र को प्रताड़ित और शोषण का आरोप लगाया था।

    - मुकदमा दर्ज कराने के लिए 3 महीने से परिजन थाने के चक्कर काट रहे थे, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया था।

    चार दिन पहले हुई थी पहली FIR

    - Dainikbhaskar.comको हाथ लगी एक्सक्लूस‍िव डॉक्यूमेंट्स से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। डॉक्यूमेंट्स से मालूम हुआ कि यहां देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बिना ट्रेनिंग पूरी किए पायलट उड़ान भर रहे हैं। यहां कार्यरत उच्चाधिकारी अपनी निजी संपत्ति समझकर इस अकादमी को चला रहे हैं।

    - बता दें, 25 नवंबर 2014 में कंट्रोलर एंड ऑड‍िटर जनरल (CAG) के जांच में कई चौंका देने वाले खुलासे हुए थे, लेकिन सरकार की लापरवाही से जांच रिपोर्ट लिफाफे में बंद होकर रह गई। जांच में अकादमी पर कई सवाल भी खड़े किए थे।

    - डॉक्यूमेंट्स से खुलासा हुआ कि 2007 में कनाडा की कंपनी CAE को IGRUA को वर्ल्ड क्लास अकादमी बनाने के लिए प्रति वर्ष 5 लाख US डॉलर (करीब 3 करोड़, 17 लाख, 95 हजार इंड‍ियन करेंसी) पर कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। लेकिन CAG ने अपनी जांच में पूछा कि कोई भी काम न करने वाली कंपनी CAE को बार-बार कॉन्ट्रेक्ट क्यों दिया जा रहा है?

    - इस मामले में 12 जनवरी 2018 को अमेठी के फुरसतगंज में डायरेक्टर विनोद कुमार वर्मा समेत अकाउंटेंट सचिन टंडन और अकादमी के कर्मचारी सुरेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।


    डायरेक्टर की नियुक्ति निकली फर्जी
    - विजलेंस जांच में भी खुलासा हुआ कि IGRUA में डायरेक्टर पद पर तैनात विनोद कुमार वर्मा की नियुक्ति ही फर्जी है। उनके द्वारा कई कर्मचारियों की भी नियुक्ति गलत ढंग से की गई है, क्योंकि मंत्रालय ने साफ-साफ पत्र संख्या (27 अगस्त 2003) में कहा है कि कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 60 साल से ज्यादा है, उसकी नियुक्ति इस पद पर नहीं हो सकती।
    - 8 जुलाई 2015 को विजलेंस ने पूरे मामले की जांच कराने के लिए सीबीआई की संस्तुति की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    डायरेक्टर ने छुपाए तथ्य
    - जांच में सामने आया कि देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ के बावजूद डायरेक्टर विनोद कुमार वर्मा को महानिदेशक नगर विमानन विभाग द्वारा 11 फरवरी 2016 को निर्देशित किया गया। उन्होंने अपना ट्रेनिंग संबंधी मैन्युअल अपडेट कराया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
    - यही नहीं, विनोद वर्मा ने अपने भतीजे को बिना DGCA का पेपर पास कराए उसका उड़ान के लिए प्रशिक्षण सर्टिफिकेट दे दिया। इस प्रकार ट्रेनिंग प्रोसेसर मैन्युअल के बिना ही उसकी ट्रेनिंग चल रही है।
    - बताया जाता है क‍ि जब इस मामले में वहां का एक स्टूडेंट ने आवाज उठाई तो उसे मानस‍िक रूप से बीमार बताकर संस्था से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जबक‍ि मेडिकल जांच में छात्र पूरी तरह से नॉर्मल पाया गया और उसने DGCA के आवश्यक पेपर भी पास कर लिए थे। आरोप है क‍ि छात्र से प्रशिक्षण संबंधी उपकरण मांगने पर घुस मांगे गए। घुस नहीं देने पर छात्र को प्रताड़ित किया गया।
    - इस पूरे मामले में एफआईआर कराई गई, जिसके बाद मुख्य अभियोजन अधिकारी और सीओ तिलोई ने जांच में सभी आरोप सही पाया।

    ये हैं आरोप

    आरोप नंबर-1
    -इंद‍िरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी के निदेशक विनोद कुमार वर्मा की नियुक्ति नियम के विरुद्ध हुई।

    -नियम के विरुद्ध प्रत‍ि वर्ष लगभग 55 लाख रुपए वेतन ले रहे हैं।

    आरोप नंबर-2
    -अपने करीबियों की नियुक्ति नियम के विरुद्ध की और करोड़ों रुपए भत्तों के नाम पर दे दिए।

    -मुख्य सतर्कता अधिकारी ने अपनी जांच में अपराध सिद्ध करते हुए CBI जांच की संस्तुत‍ि की थी, लेक‍िन संबंध‍ित व‍िभाग से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    आरोप नंबर-3
    -CAG की रिपोर्ट के अनुसार, CAE का अकादमी में कोई अस्तित्व नहीं है, फिर भी 5 सालों से 5 लाख डॉलर में बार-बार इस कंपनी को रिन्युवअल किया जा रहा है।

    आरोप नंबर-4
    -CAE ने अग्रीमेंट के हिसाब से कुछ भी नहीं किया। इस संबंध में एक एक्सपर्ट कमेटी ने मंत्रालय को अनुबंध को खत्म करने की संस्तुत‍ि की, लेक‍िन कोई कार्रवाई नहीं हुई।


    आरोप नंबर-5
    -छात्र द्वारा आवाज उठाने पर आपराधिक साजिश कर उसे टर्मिनेट कर द‍िया गया।

    आरोप नंबर-6
    -CAG र‍िपोर्ट के अनुसार, वीके वर्मा के भतीजे ने उड़ान प्रशिक्षण से पूर्व न तो कोई पेपर पास किया और न ही कभी उपस्थित पूर्ण रही, फिर भी उसका उड़ान प्रशिक्षण पूर्ण करा दिया गया।

    आरोप नंबर-7
    -IGRUA में हो रही नियमों को ताक पर रखकर फर्जी फ्लाइंग हुई। इसके बावजूद महानिदेशक नागर विमानन ने कोई कार्रवाई नहीं की। महानिदेशक नागर विमानन की जांच रिपोर्ट 12 अगस्त 2016 में खुलासा हुआ।

    आरोप नंबर-8
    -IGRUA के कोर्ट केसेज केवल सरकारी अधिवक्ता ही कर सकते हैं, लेक‍िन एक-एक केस में प्राइवेट अधिवक्ता को बिना अनुमति के करोड़ों रुपए का भुगतान क‍िया गया।

    आरोप नंबर-9
    -प्रशिक्षण संबंधी उपकरणों को देने के लिए घूस की मांग। साथ ही आपराधिक षड्यंत्र में निदेशक लेखाधिकारी के खिलाफ जांच में सीओ तिलोई और एसपीओ द्वारा सभी आरोप सही पाए गए।

    1985 में हुई थी स्थापना

    - बता दें, IGRUA देश की बेहतरीन उड्डयन अकादमी में शामिल है। यहां से हर साल कई छात्र काबिल पायलट बनकर निकलते हैं।

    - इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी की स्थापना साल 1985 में सचिव नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अमेठी के फुरसतगंज में किया था।

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    15 जनवरी 2018 को आगरा के एत्मादपुर थाने में दर्ज FIR की कॉपी।
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    12 जनवरी को डायरेक्टर विनोद कुमार वर्मा समेत अकाउंटेंट सचिन टंडन और अकादमी के कर्मचारी सुरेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
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Web Title: One More FIR Lodged Against IGRUA Director Flying Academy In Amethi
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