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10 हजार कारोबारियों की गिरफ्तारी के आदेश, आगरा में 3 व्यापारी भेजे गए जेल

आगरा में 3 व्यापारियों को गिरफ्तार किए गए हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 08, 2018, 03:28 PM IST

  • 10 हजार कारोबारियों की गिरफ्तारी के आदेश, आगरा में 3 व्यापारी भेजे गए जेल
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    फाइल ।

    लखनऊ.राजधानी के 10 हजार कारोबारियों पर वाणिज्य कर विभाग ने एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए टैक्स वसूली के लिए गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू कर दी है। कारोबारियों को इसका पता तब चला जब अमीन वसूली के लिए पहुंच गया। गिरफ्तारी के मामले में आगरा में जिले के एडीशनल कमिश्नर- ग्रेड-वन डॉ बुद्धेशमणि ने जुलाई से लेकर 26 दिसंबर तक कुल 135 कारोबारियों को बकाया वसूली के लिए अब तक गिरफ्तार करा लिया है। इसमें तीन कारोबारियों द्वारा पैसा न जमा किये जाने पर उन्हें जेल भेजा गया, जबकि शेष कारोबारियों द्वारा पैसा जमा किये जाने के बाद उन्हें तहसील की हवालात से रिहा किया गया।

    राजस्व वसूली एक्ट तहत जारी हुआ गिरफ्तारी आदेश

    -राजधानी में भी अब तक करीब दस हजार कारोबारियों के खिलाफ खंड अधिकारियों ने राजस्व वसूली के अधिनियम के तहत उत्पीड़ात्मक कार्रवाई करते हुए आरसी जारी करने के साथ ही गिरफ्तारी के आदेश भी जारी कर दिये हैं।
    -विभाग के अमीन वसूली व गिरफ्तारी के लिए कारोबारियों के घरों के चक्कर लगा रहे हैं, हालत ये हैं की अमीनों के डर से कई कारोबारी घरों से फरार तक हो गये हैं।
    -वहीं, जीएसटी एक्ट में राज्य कर विभाग के अधिकारियों को गिरफ्तारी की भी शक्तियां मिल जाने के बाद अधिकारियों ने कार्यालय में प्रवर्तन इकाई की अस्थाई हवालात तक बनवाने के प्रयास तक शुरू कर दिये है।

    कार्रवाई रोकने की मांग

    -लखनऊ सेल्स टैक्सबार एसोसिएशन ने विभाग की कार्रवाई की इस प्रक्रिया को गलत बताते हुए इसे रोकने की मांग राज्य कर आयुक्त से की है।
    -वैट में पंजीकृत कारोबारियों का वर्ष 2014-15 का कर निर्धारण किया जा रहा है, पहली जुलाई को जीएसटी लगने के बाद से वाणिज्य कर विभाग में सभी ऑर्डर व नोटिस ऑनलाइन भेजे जा रहे हैं।

    ई-मेल से भेजा गया नोटिस

    -विभाग ने अब तक दर्ज हजार कारोबारियों पर लाखों का बकाया टैक्स निकालते हुए, उनके ईमेल पर ऑनलाइन नोटिस भेज दी है। वैट की धारा -32 के तहत कारोबारी के पास अपना पक्ष रखने व केस को पुन: विचार के लिए खुलवाने का 30 दिन का समय होता है।
    -फिलहाल जीएसटी लगने के बाद अधिकतर कारोबारियों के पुराने मेल आईडी व फोन नम्बर बदल जाने के कारण उन्होंने इस पर ध्यान ही नहीं दिया।
    -विभाग ने भी कारोबारियों के प्रतिष्ठान या आवास पर कोई नोटिस न तो तामिल कराई और न ही चस्पा की, केवल ऑनलाइन नोटिस भेज कर 30 दिन पूरे होते ही वसूली अधिनियम के तहत उत्पीड़ात्मक कार्रवाई के तहत आरसी व गिरफ्तारी तक के आदेश जारी कर दिये।

    लखनऊ के बाद आगरा में चर्चा में अफसर

    -लखनऊ में एसआईबी चीफ रहने के दौरान करापंचकों के खिलाफ अभियान चलाने व अघोषित गोदामों पर छापा- डालवाकर जमानत जमा कराने की व्यवस्था लागू करने के लिए र्चचा में आए, एडिशनल कमिश्नर डॉ बुद्धेशमणि जून 2017 में आगरा के एडिशनल कमिश्नर- ग्रेड वन होकर गए थे।
    -उन्होंने 6 जुलाई से राजस्व वसूली के लिए सीधे गिरफ्तारी के आदेश जारी करने शुरू कर दिये, इसी की तर्ज पर लखनऊ में भी कार्रवाई शुरू हो गयी है।

    क्या कहना है व्यापारियों का

    -व्यापारियों का कहना है कि अगर समय पर विभाग के इस फैसले की जानकारी मिल जाती तो वे वैट की धारा 32 के तहत पुन: विचार के लिए ग्रेड-2 अपील के समक्ष वाद दायर कर सकते थे, और अपना पक्ष रखते।
    -अपील अधिकारी के पास 50 फीसदी तक की वसूली पर स्थगन लगाने का अधिकार होता है, इसके तहत कारोबारियों को सहूलियत भी मिलती लेकिन एक माह का समय बीत जाने के बाद अब धार-32 के तहत विभाग में अपील नहीं की जा सकती है।
    -हालांकि इस मामले में विभाग के अधिकारियों का भी अपना तर्क है कि वैट में पंजीकृत सभी कारोबारियों ने अपनी वही मेल आईडी जीएसटी में भी पंजीकृत करायी है, जो पहले थी।
    -अगर मेल आईडी काम कर रही थी तो नोटिस का संज्ञान लेने की जिम्मेदारी कारोबारी की है। यही नहीं कारोबारियों के अधिवक्ताओं को भी केस को लेकर सजग रहना चाहिए।
    -सेल्स टैक्सबार एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी अधिवक्ता सौरभ गहलौत का कहना है- "विभाग को वसूली का नोटिस सिविल कोर्ट की तरह पत्र के माध्यम से तामील कराना चाहिए था। इसके बाद एक पक्षीय निर्णय दिया जाना चाहिए था, इस तरह से एक पक्षीय फैसला कर देने से कारोबारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।"

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