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हाथों से खा नहीं सकता ये शख्स, पैरों से मोती की तरह लिखता है

इस शख्स का नाम राजू है और यह बचपन से ही विकलांग है।

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 12:12 PM IST
राजू बचपन से ही विकलांग है। राजू बचपन से ही विकलांग है।

लखनऊ. राजधानी के गोमतीनगर इलाके में रहने वाला एक शख्स हौसले और हिम्मत की मिसाल है। दरअसल, इस शख्स का नाम राजू है और यह बचपन से ही विकलांग है। विकलांग होने के कारण राजू के दोनों हाथ और पैर बेकार हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी वह अपनी पैर की उंगलियों से अपनी पढ़ाई-लिखाई करता है। इंजीनियर बनना चाहता है राजू...

- गोमतीनगर के तक्वा में रहने वाले सुन्दरलाल यादव के 8 बच्चे हैं, जिनमे 6 बेटे हैं और 2 बेटियां। उनका सबसे छोटा बेटा राजू बचपन से विकलांग है।
- सुन्दरलाल पेशे से किसान हैं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
- सुंदरलाल का कहना है कि राजू उनका सबसे होनहार बच्चा है। हालांकि राजू शारीरिक रूप से विकलांग है और बाएं पैर से ही अपना सब काम करता है। उसकी पढ़ाई-लिखाई पर उसके विकलांगता को कोई प्रभाव नहीं पड़ता। राजू ने हाईस्कूल और इंटर अच्छे नंबर से पास किया और इस वक़्त रमा डिग्री कालेज से बी.ए कर रहा है।

हर वक्त चाहिए सहारा

- राजू का खाना-पीना और टॉयलेट-बाथरूम सब उसकी मां कराती है। राजू को हर वक्त किसी सहारे की जरूरत होती है। उसके पास कोई ना कोई रहना चाहिए।
- विकलांग होने के बावजूद भी राजू अपने बाएं पैर की उंगलियों से एेसे लिखता है मानो कोई हाथ से लिख रहा हो। सारे एग्जाम उसने अपने पैर की उंगलियों से लिख के पास किए हैं।
- राजू की मां कहती हैं कि अभी तो हम लोग इसका खाना-पीना और टॉयलेट-बाथरूम सब करा देते हैं। लेकिन कल को अगर हम नहीं रहे तो कौन करेगा ये सब?
- वहीं, राजू का कहना है कि मैं इंजीनियर बनना चाहता था, लेकिन शारीरिक विकलांगता ने मजबूर कर दिया। आज मैं चाहता हूं की मेरी एक दुकान हो। जैसे मैं अपने पैरों से लिख लेता हूं, वैसे ही मेहनत करके कमा भी सकता हूं।

पैरों से ही लिखकर राजू ने अपनी सारे एग्जाम पास किए हैं। पैरों से ही लिखकर राजू ने अपनी सारे एग्जाम पास किए हैं।
राजू का खाना-पीना सब उसकी मां कराती है। राजू का खाना-पीना सब उसकी मां कराती है।
राजू ठीक के चल भी नहीं पाता है। राजू ठीक के चल भी नहीं पाता है।